स्मृति ईरानी के खिलाफ नारेबाजी का जवाब है प्रीति

  • योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर में लगे थे स्मृति ईरानी के खिलाफ नारे
  • कल योगी के विरोधी माने जाने वाले भाजपा विधायक राधा मोहन समेत सभी विरोधी
    थे प्रीति के साथ
  • प्रीति के आने से भाजपा में गुटबाजी तेज, पैसे की चर्चा ने शुरू की बदनामी

Captureप्रभात तिवारी
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा नेताओं की खेमेबाजी गुजरात की अरबपति और राज्यसभा की निर्दलीय उम्मीदवार प्रीति महापात्रा की वजह से खुलकर सामने आ गई। भाजपा नेताओं का एक धड़ा नरेन्द्र मोदी की करीबी मानी जाने वाली प्रीति महापात्रा के साथ नामांकन करने विधानसभा पहुंच गया। इसमें पूर्वांचल में योगी आदित्यनाथ के प्रभुत्व से खुद को अछूता रखने वाले भाजपा नेता राधा मोहन दास अग्रवाल और फतेहबहादुर सिंह दमदारी के साथ नामांकन प्रक्रिया में शिरकत करते दिखे। इनके समर्थन में पीस पार्टी के नेता और योगी की विचारधारा के धुर विरोधी माने जाने वाले पीस पार्टी के प्रमुख डॉ अयूब भी मौजूद रहे। इससे पूर्वांचल की राजनीति में योगी और स्मृति ईरानी को लेकर भाजपा में चल रहे अंदरूनी विरोध और वस्तु स्थिति का मामला सबके सामने आ गया। अब पार्टी हाईकमान में स्मृति ईरानी और योगी को लेकर चल रही उठापटक की स्थिति काफी हद तक साफ नजर आने लगी है। मतलब साफ है कि आने वाले चुनाव में पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने का सपना देखने वाले योगी आदित्यनाथ को तरजीह देकर पार्टी अपने विरोधियों की संख्या और अधिक नहीं बढ़ाएगी।
भाजपा की तरफ से प्रीति महापात्रा को राज्यसभा उम्मीदवार बनाने की खबर दो दिन पहले सुर्खियों में आई थी।

स्मृति ईरानी के खिलाफ…
…इस खबर ने राजनीतिक गलियारे में उद्योगपतियों की घुसपैठ और पार्टी की वर्षों तक सेवा करने वाले नेताओं की उपेक्षा का मुद्दा गरमा दिया था। उत्तर प्रदेश ही नहीं दिल्ली में भी प्रीति महापात्रा को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। ऐसा माना जा रहा था कि मोदी, अमित शाह और गुजरात की मुख्यमंत्री आनन्दी बेन पटेल की करीबी और गुजरात के अरबपति उद्योगपति हरी महापात्रा ही यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार के नाम से नामांकन करेंगी। लेकिन सोमवार को अचानक ही राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में शिव प्रताप शुक्ला का नाम घोषित कर दिया गया। प्रीति को पार्टी की तरफ से राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलों को खारिज कर दिया गया लेकिन ठीक 24 घंटे बाद प्रीति महापात्रा अपने पति हरी महापात्रा और अपने दर्जनों समर्थकों के साथ लखनऊ पहूंच गईं। उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा के अपना पर्चा भरा। इस दौरान वहां मौजूद भाजपा विधायकों में भगदड़ मच गई। करीब आधा दर्जन विधायक शिव प्रताप शुक्ला, उपेन्द्र चौधरी और दयाशंकर सिंह का नामांकन छोडक़र प्रीति के साथ खड़े हो गये। इन नेताओं में पार्टी की अनुशासन कमेटी और हाईकमान की नाराजगी का कोई खौफ नहीं था। क्योंकि सबको मालूम था कि प्रीति का नामांकन नरेन्द्र मोदी के इशारे पर किया जा रहा है। नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रीति महापात्रा को बाहर से समर्थन कर रहे हैं। ऐसा करके नरेन्द्र मोदी और अमित शाह ने उत्तर प्रदेश और खासकर पूर्वांचल की राजनीति में अपना दबादबा समझने वाले नेताओं को करारा जवाब दिया है। अब अपने मन मुताबिक टिकटों का बंटवारा और उम्मीदवारों का चयन करवाने की कोशिश में जुटे नेताओं को सतर्क हो जाना चाहिए। वहीं इस बात को भी अच्छी तरह समझना चाहिए कि नरेन्द्र मोदी और अमित शाह अपने करीबी नेताओं और समर्थकों को सत्ता में शामिल करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

दो साल से कर रहीं मोदी की विचारधारा का प्रचार-प्रसार
नरेन्द्र मोदी विचार मंच के नेशनल प्रेसीडेंट के रूप में करीब डेढ़ साल से काम करने वाली प्रीति महापात्रा को यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाये जाने का फैसला दो दिन पहले ही हो गया था लेकिन अचानक ही सोमवार को शिव प्रताप शुक्ला का नाम घोषित कर दिया गया। इसके बाद माना जा रहा था कि उनका राज्यसभा पहुंचना नामुमकिन है लेकिन मंगलवार को अचानक प्रीति महापात्रा अपने पति हरी महापात्रा के साथ विधानसभा में नामांकन करने पहुंच गईं। उन्होंने राज्यसभा के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन करने का निर्णय लिया। चूंकि प्रीति महापात्रा को नरेन्द्र मोदी और गुजरात की मुख्यमंत्री आनन्दी बेन पटेल का करीबी माना जाता है। इसलिए भाजपा विधायकों में प्रीति महापात्रा का प्रस्तावक बनने की होड़ लग गई। भाजपा नेता शिव प्रताप शुक्ल, उपेन्द्र चौधरी और दयाशंकर सिंह का नामांकन छोडक़र प्रीति के इर्द-गिर्द मंडराने लगे। भाजपा विधायकों में प्रीति का प्रस्तावक बनने की होड़ मच गई। गोरखपुर के लोकप्रिय विधायक आरएमडी और करीब करीब दो साल पहले भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने वाले फतेहबहादुर सिंह नामांकन के वक्त प्रीति के साथ-साथ रहे। इस दौरान सपा से बाहर निकाले गये विधायक राम पाल यादव और पीस पार्टी के डॉ. अयूब खान भी मौजूद थे। ऐसे में पार्टी में सीएम उम्मीदवार को लेकर माहौल गरमाने में जुटे नेताओं को संदेश मिल चुका होगा

कौन हैं प्रीति महापात्रा

प्रधानमंत्री के साथ फेसबुक पर अपनी फोटो लगा कर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा करने वाली प्रीति महापात्रा खुद को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की भतीजी भी बताती हैं। वह वर्ष 2015 से नरेन्द्र मोदी विचार मंच की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसके अलावा वह कृष्ण लीला फाउंडेशन नामक संस्था भी चलाती हैं। उन्होंने सेंट जोसफ स्कूल और मुंबई यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की है। लखनऊ में नामांकन करने पहुंची प्रीति महापात्रा बीजेपी कार्यालय में भी देखी गई थीं। भाजपा के संगठन मंत्री सुनील बंसल से लेकर प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या तक ने उनसे मुलाकात की है। इससे स्पष्ट है कि पार्टी के सभी बड़े नेताओं को अच्छी तरह मालूम है कि प्रीति महापात्रा का पार्टी हाईकमान के लोगों से कितना करीबी संबंध है।

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