स्मार्ट सिटी के लिए 800 एकड़ क्षेत्रफल की आवश्यकता

नगर निगम के अधिकारियों की टीम प्रस्ताव बनाने में जुटी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत चयनित शहरों में शामिल कर लिया गया है। स्मार्ट सिटी की दौड़ में अंतिम रूप से चयनित होने के लिए चैलेंज राउंड से गुजरना है। इसलिए नगर निगम के अधिकारी स्मार्ट सिटी प्रपोजल तैयार करने में जुट गये हैं। अधिकारियों ने स्मार्ट सिटी का खाका तैयार कर लिया है, जिसमें 800 एकड़ क्षेत्रफल की आवश्यकता बताई गई है। इसके साथ ही स्मार्ट सिटी के चार प्रकार के मॉडल भी तैयार किये हैं। जिसकी विभन्न विशेषताओं का ब्यौरा तैयार कर अंतिम चयन के लिए भेजा जायेगा।
अपर नगर आयुक्त पी.के श्रीवास्तव के मुताबिक नगर निगम की तरफ से लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसमें स्मार्ट सिटी के चार मॉडल बनाये गये हैं। जिसमें पहला मॉडल रेट्रोफिटिंग मॉडल है। यह एरिया बेस्ड डेवेलपमेंट है, जिसके लिए न्यूनतम 500 एकड़ क्षेत्रफल की की आवश्यकता होगी। इस मॉडल के अंतर्गत वर्तमान संरचना में मूलभूत परिवर्तन किए बिना स्मार्ट सल्यूशन लागू किया जाएगा। दूसरा मॉडल री-डेवेलपमेंट मॉडल है। यह एरिया बेस्ड डेवेलपमेंट है, जिसमें न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल की आवश्यकता होगी। इसके अंतर्गत वर्तमान संरचना को ध्वस्त करके नये सिरे से हाईटेक स्मार्ट सिटी बनाया जायेगा। तीसरा मॉडल ग्रीन सिटी डेवेलपमेंट है। इसमें एरिया बेस्ड डेवेलपमेंट होना है, जिसके लिए न्यूनतम 250 एकड़ खाली जमीन पर स्मार्ट सल्यूशन के साथ हाईटेक सिटी बनायी जायेगी। चौथा मॉडल पैन सिटी डेवेलपमेंट है। इस माडल के अंतर्गत एक या एक से अधिक स्मार्ट सॉल्यूशन को पूरे शहर में लागू किया जायेगा।

स्मार्ट सिटी की खासियतें
नगर निगम ने स्मार्ट सिटी की खासियतों का भी निर्धारण कर दिया है। इसमें ई-गर्वनेंस एवं नागरिक सुविधाएं, नागरिकों की सहभागिता, शहर की पहचान, संस्कृति एवं हेरिटेज, अर्थव्यवस्था एवं रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा, मिश्रित भू-उपयोग, खुला क्षेत्र, नागरिकों के लिए पर्याप्त खुले स्थान एवं पार्क, सभी आय वर्ग के लिए आवास, परिवहन एवं गतिशीलता, शहर के नागरिकों के पैदल एवं साईकिल से चलने के लिए अतिक्रमण रहित फुटपाथ एवं साइकिल ट्रैक का निर्माण, आई.टी. कनेक्टिविटी, ई-गर्वनेंस के अंतर्गत नागरिकों को सुविधाएं उपलब्ध कराना, 24 घंटे विद्युत आपूर्ति, गैर परम्परागत एवं नवीनीकृत ऊर्जा स्रोतों को विकसित किया जाना शामिल है। इसके अलावा 24 घंटे जलापूर्ति एवं स्मार्ट मीटर लगाया जाना, वेस्ट वॉटर मैनेजमेंट, सीवरेज का शत प्रतिशत ट्रीटमेंट, विद्युत ऊर्जा की बचत, विद्युत तारों को भूमिगत किया जाना, सभी शहर वासियों को स्वच्छ शौचालय की सुविधा प्रदान कराकर खुले में शौच की प्रथा को समाप्त किया जाना, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के अंतर्गत शहर के सभी आवास, कार्यालय, प्रतिष्ठान एवं दुकान इत्यादि से डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण, परिवहन एवं ट्रीटमेंट की व्यवस्था को प्रभावी बनाकर शहर को स्वच्छ बनाया जाना शामिल है।

सुरक्षा व्यवस्था
उच्च स्तर की जन सुरक्षा के अंतर्गत महिलाओं बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा हेतु आवश्यक व्यवस्था किया जाना। इस संबंध में नगर निगम ने राजधानी के लोगों की सलाह भी मांगी है। इसके साथ ही विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर स्मार्ट सिटी पर लोगों की राय पर चर्चा भी की जायेगी।

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