स्कूल से ज्यादा साइबर कैफे में समय बिताने लगे हैं स्टूडेंट

बच्चों की देखरेख के लिए समय न निकाल पाने वाले मां-बाप परेशान
बिना पहचान पत्र के साइबर कैफे में धड़ल्ले से इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे स्टूडेंट

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
captureलखनऊ। पहले मां-बाप से बच्चे खिलौने, साइकिल और कामिक्स की डिमांड करते थे। इन चीजों के न मिलने पर नाराज हो जाते थे, लेकिन आजकल के बच्चों में खिलौनों के बजाय मोबाइल फोन, आई पॉड,आईफोन और इंटरनेट की दीवानगी देखने को मिल रही है। खिलौनों के साथ मासूम दिखने वाले बच्चों का बचपना गुम होता जा रहा है। आज बच्चे मोबाइल और इंटरनेट की दुनियां में खोने के साथ ही उम्र से पहले बड़े होते जा रहे हैं। वहीं मां-बाप के पास भी बच्चों के पास बैठने और उनकी निगरानी करने का पर्याप्त समय नहीं बचता है। इस वजह से बच्चों की पूरी साइकोलॉजी ही बदल गई है।

बच्चों के समय से पहले बड़े होने का सबसे बड़ा कारण स्मार्टफोन और आस-पास खुले साइबर कैफे हैं। इनका इस्तेमाल करने वाले बच्चों को बहुत सी ऐसी चीजों की जानकारी हो जाती है, जो वयस्क होने के बाद बच्चों को जाननी चाहिए। इंटरनेट और मोबाइल पर मिले अधकचरे ज्ञान की वजह से बच्चे बड़ों की तरह का व्यवहार करने लगते हैं। स्मार्टफोन और इंटरनेट की वजह से बच्चे पैरेंट्स के साथ बात करने के बजाय अकेले में समय बिताना अधिक पसंद करते हैं। इस वजह से बच्चों और पैरेंट्स के बीच कम्युनिकेशन गैप होने लगता है। बच्चों का व्यवहार और उनकी हरकतें बोल्ड होती चली जाती है। जिसकी वजह से उनके मां बाप भी काफी परेशान दिखते हैं।

टीनएजर्स में अश्लील साहित्य के प्रति बढ़ रहा रुझान
आजकल टीवी पर बहुत से ऐसे कार्यक्रम पेश किए जाते हैं, जिनकी वजह से टीनएजर्स में सेक्सुअल रिलेशनशिप को जानने की एक्साइटमेंट बढ़ जाती है। इसी वजह से बच्चे अकेले में मोबाइल फोन और इंटरनेट का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। यदि घर पर इंटरनेट की सुविधा नहीं है, तो साइबर कैफे में जाकर घंटे या दो घंटे बैठकर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। वहीं अधिकतर टीनएजर्स हाई स्पीड वाले इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते हैं। इन मोबाइल से बच्चे पॉर्न साइट सर्च कर अश्लील फोटो और विडियो देखते हैं और दोस्तों को भी फॉरवर्ड करते हैं। इसी वजह से मासूम दिखने वाले बच्चे टीनएज में ही बेहिचक होकर बातें करते हैं।

पैरेंट्स भी हैं परेशान
कपूरथला में रहने वाली श्वेता के मुताबिक उनकी छह साल की बेटी मोबाइल पर बहुत ही तेजी से अपनी उंगलियां चलाती है। एक दिन वह अपनी बेटी को खिलौनों की दुकान पर ले गई थीं, वहां बेटी ने एक गुडिय़ा लेने की जिद की, तो उन्होंने कहा कि कोई और खिलौना ले लो। तो बेटी ने तपाक से कहा कि प्लीज मम्मा, ले दो ना देखो गुडिय़ा कितनी हॉट और सेक्सी लग रही है। अपनी छह साल की बेटी के मुंह से निकले ऐसे शब्दों को सुनकर श्वेता हैरान रह गईं। वहीं प्राइवेट जॉब करने वाली शिखा सिंह ने बताया कि उनकी आठ साल की भांजी को खिलौनों और कार्टून के बजाय आइटम सांग सुनना और देखना अधिक पसंद है। वह आइटम सांग्स पर डांस करती है। गाने की हर लाइन को बोलने और हर स्टेप को कॉपी करने की कोशिश करती है। वहीं नॉवेल्टी सिनेमा में टिकट बुकिंग करने वाले प्रदीप मौर्या बताते हैं कि बच्चे नकली आईडी प्रूफ के साथ ए सर्टिफाइड फिल्मों को भी देखने आते हैं। कई बार शक होने के बाद भी हम कुछ नहीं कर पाते।

साइबर कैफे के इस्तेमाल में टीनएजर्स आगे
अलीगंज में साइबर कैफे के ओनर साहिर अंसारी बताते हैं कि उसकी शॉप में एक महीने के अंदर 300-350 लोग मोबाइल में मूवी और सॉन्ग डाउनलोड कराने आते हैं। इनमें से 80 प्रतिशत टीनएजर्स या उससे भी कम एज के बच्चे होते हैं। यही नहीं 90 पर्सेंट टीनएजर्स अश्लील मूवी और सॉन्ग डाउनलोड करवाने आते हैं। गूगल पर सर्च के दौरान सबसे ज्यादा हिट पॉर्न साइट्स पर मिलते हैं। इन साइटों को देखने का एक्साइटमेंट टीनएजर्स के साथ-साथ प्रोफेशनल लोगों में भी होता है। इसी तरह हजरतगंज स्थित साइबर कैफे के ओनर रवि त्रिवेदी बताते हैं कि उनके कैफे में हर उम्र के लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करने आते हैं। 10 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से सभी लोग इंटरनेट का बखूबी इस्तेमाल करते हैं। वहीं 10 से 12 साल तक के स्कूली बच्चे पैसे देकर अपनी एज के ग्रुप के साथ कई घंटे कैफे में बिताते हैं। कुछ बच्चों ने फेसबुक पर फेक आईडी भी बना रखी है।

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चाइल्ड सायकोलॉजिस्ट डॉ. पायल सिन्हा कहती है कि टीनएज में बच्चों के अंदर नकारात्मक बदलाव का प्रमुख कारण पैरेंट्स का बच्चों पर ध्यान न देना है। मीडिया और आधुनिक लाइफ स्टाइल उन्हें सिखा रहा है कि सुंदर और सेक्सी दिखने के आगे बाकी चीजों का महत्व नहीं है। बच्चों को सुपरस्टार बनाने की होड़ में कभी-कभी पैरेंट्स भी अनजाने में ही इन चीजों को बढ़ावा दे जाते हैं। इसलिए बेहतर है कि अपने बच्चों के बेहतर भविष्य देने के लिए पैरेंट्स उन्हें पर्याप्त समय दें। उनकी अच्छी परवरिश करे और अच्छे संस्कार दें। यदि ऐसा करेंगे, तभी बच्चे बिगडऩे से बच पायेंगे।

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