स्कूल जाने के लिए तरस रहे बच्चे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। शिक्षा के अधिकार आरटीई के अन्तर्गत सुप्रीम कोर्ट तथा राज्य सरकार के आदेश के बावजूद कई नामी गिरामी प्राइवेट स्कूलों ने सरकार के आदेशों को ताख पर रखकर अपनी मनमानी जारी रखी है। 24 मार्च 2015 की स्टेट ऑफ द नेशन रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत देश के प्राइवेट विद्यालयों में 21 लाख सीटें कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए हैं। इनमें से 6 लाख सिर्फ उत्तर प्रदेश में हैं। इन 6 लाख सीटों में सिर्फ 54 दाखिले किये गए हैं। ऐसे ही शहर के जाने माने स्कूल सिटी माँटेसरी के जिम्मेदार प्रबंध तंत्र के लोग जो हर कार्यक्रम में यह कहना नहीं भूलते कि गरीब बच्चों को भी पढऩे का अधिकार है और हम सब ऐसे बच्चों को शिक्षित करने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन जब आरटीई के तहत 31 बच्चों का प्रवेश सीएमएस इन्दिरा नगर में होना निर्धारित किया गया था। सम्पूर्ण प्रक्रिया के बाद जब 15 अप्रैल को अभिभावक विद्यालय पहुंचे तो विद्यालय प्रशासन ने किसी भी प्रकार की बात करने से मना कर दिया और इन बच्चों को प्रवेश नहीं दिया। जिसकी वजह से इन बच्चों का साल बर्बाद हाने की कगार पर है।
सात अप्रैल को जिलाधिकारी लखनऊ ने शिक्षा के अधिकार के तहत प्रवेश के लिए योग्य 36 बच्चों की पहली सूची जारी की। इन 36 बच्चों में से 31 का प्रवेश सीएमएस इन्दिरा नगर में होना निर्धारित किया गया था। इसके लिए अंतिम तिथि 15 अप्रैल तय की गई थी। जब इन बच्चों के अभिभावक 8 अप्रैल को सीएमएस गये तो उनको 15 अप्रैल को प्रवेश के बारे में पता करने को कहा गया। जब अभिभावक निर्धारित तिथि पर स्कूल गये तो उन्हें यह पता चला की उनके बच्चों को प्रवेश नहीं दिया गया है और किसी भी प्रकार के सवाल पर कोई जवाब नहीं मिला। अभिभावकों ने 16 अप्रैल को सीएमएस के ऐसे व्यवहार के खिलाफ गेट पर धरना दिया। विद्यालय प्रशासन के ऐसे रवैये से उनके बच्चों का भविष्य अधर में लटका है। सीएमएस में प्रवेश के भरोसे ही उन्होंने किसी और स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन ही नहीं किया था।
वहीं सीएमएस प्रशासन ने दस अप्रैल को बेसिक शिक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर वो छह कारण बताये जिसकी वजह से वह बच्चों को अपने विद्यालय में प्रवेश नहीं दे सकते। 13 अप्रैल को उनके पत्र का विस्तृत जवाब बीएसए ने स्कूल प्रशासन को भेज दिया। इसके बावजूद विद्यालय बच्चों को प्रवेश न देकर अलग अलग बहाने बना रहा है। सभी बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल के रवैये से तंग आकर न्यायालय में याचिका दायर कर दी है। वहीं सीएमएस स्कूल ने भी न्यायालय में याचिका दायर की है। सोचने का विषय यह है कि कहीं इस कानूनी लड़ाई में बच्चों का भविष्य अधर में न चला जाये।

 

Pin It