स्कूल जाने की उम्र में काम की मजबूरी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क

लखनऊ। आज हम जहां सर्व शिक्षा अभियान की बात करते हंै तो क्या इस अभियान के तहत वह बच्चे नहीं आते जो चाय की दुकानों, होटलों और फुटपाथ पर मेहनत कर अपना जीवन बिताने के लिए श्रम करते है। जहां एक ओर बाल मजदूरी कानूनी जुर्म है वहीं किसी सामान बेचने वाले बच्चे से पुलिस इसे रोकने के बजाय बिना पैसे दिये सामान लेती हुई आगे निकल जाती है।
आज शहर के हर चौराहो फुटपाथों व होटलों में ऐसे बच्चे मिल जायेगें जो अपना पेट पालने के लिए मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। इन्हें नही पता कि बचपन किसे कहते है और शिक्षा क्या होती है। ये नही जानते कि दुलार क्या होता है। सुबह से लेकर रात तक इन्हें अगर अपने काम के बदले कुछ मिलता है, तो वह गालियां हंै। कभी होटलो मे आए कस्टमर की तो कभी यहां-वहां बैठ कर काम करने पर पुलिस प्रशासन की डांट खाते हैं। आज सरकार से लेकर कई संस्थाए ऐसे बच्चों को पढ़ाने और उनकी देखभाल का दावा करती हैं लेकिन इन दावों का वास्तविकता से कोई सरोकार नही है। जबकि सरकार ने बाल मजदूरी की इस स्थिति में सुधार के लिए 1986 में चाइल्ड लेबर एक्ट बनाया था जिसके तहत बाल मजदूरी को अपराध माना गया था। इसके तहत रोजगार पाने की न्यूनतम आयु 14 वर्ष कर दी गयी थी। हर साल कई ऐसी योजनाए तैयार की जाती हंै जिसमें यह बताया जाता है कि अब बाल मजदूरी को जड़ से खत्म कर दिया जाएगा लेकिन सरकार इस बात से क्यों अनजान बनी रहती है कि इसका सबसे बड़ा कारण गरीबी है।
7 साल की असमा ने बताया कि हम बिहार के रहने वाले है। उसने बताया कि हम भी स्कूल जाना चाहते है लेकिन अगर हम स्कूल चले गये तो घर खाना नहीं बनेगा। हम भी बाकी बच्चों की तरह जीना चाहते है। रेशमा से ने बताया कि हम भी स्कूल जाना चाहते है लेकिन अगर हम कूड़ा नही उठाएगे तो हम जहां रहते है वहां से निकाल दिये जायेंगे। वहां हमे रहने के पैसे देने पड़ते है। मेरा भी मन करता है स्कूल जाने का। सरकार को अगर इसे खत्म करना है तो इसे जड़ से खत्म करना होगा। कानून के रखवालो को जो इन्हें नजरंदाज कर इनसे पैसा वसूलते है उन पर रोक लगानी होगी।
जुगल किशोर के इस्तीफे का स्वागत
लखनऊ। दलित सेना ने सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष रहे जुगल किशोर बाल्मीकि के इस्तीफे का स्वागत किया है। दलित सेना के प्रदेश अध्यक्ष महेश कुमार बाल्मीकि ने उनके इस फैसले की सराहना करते हुये कहा है कि सफाई कर्मचारियों के हित में उनकी रक्षा, सुरक्षा व समाज हित के लिये जुगल किशोर बाल्मीकि ने एक सराहनीय कार्य किया है।
जुगल किशोर के इस्तीफे को रामपुर में आजम खान और बाल्मीकि समाज के बीच संघर्ष के रूप में भी देखा जा रहा है। रामपुर के बाल्मीकि समाज ने लम्बे समय तक अपना घर उजाड़े जाने के विरोध में आन्दोलन किया था।
उक्त निर्णय का स्वागत करने वालों में डॉं सुधाकर बाल्मीकि, अनूप बाल्मीकि, रंजीत धानुक, जटा शंकर बाल्मीकि, राजेश बाल्मीकि, अंकित धानुक, ज्योति बाल्मीकि आदि शामिल थे।

मिले दोस्त तो चेहरे पर आई खुशी

राज्यपाल रामनाइक सरकार पर भले ही कितने हमले करते हों मगर जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव उनके सामने आते है तो उनके चेहरे पर वैसी ही खुशी आ जाती है जैसे अपने किसी पुराने दोस्त को देखकर आ जाती है। सपा मुखिया अपने इस पुराने दोस्त से मिलने जब राजभवन पहुंचे तो दोनों के चेहरे की भाव भंगिमा देखकर समझा जा सकता है कि एक दूसरे को देखकर दोनों कितने खुश हैं। राज्यपाल ने कुछ समय पूर्व ही एक शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में सपा मुखिया की तारीफ करते हुए उनकी तुलना हनुमान से कर डाली थी। कुछ ही समय बाद विधान परिषद के लिए कुछ नामो का चयन होना है। संभवत: सपा मुखिया उसी की जमीन तैयार करने के लिए राज्यपाल से मिलने पहुंचे थे।

 

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