सोशल मीडिया बना राजनीतिक दलों के लिए प्रचार का सस्ता व बेहतरीन हथियार

राजनीतिक दलों के लिए आम आदमी से जुडऩे व अपनी उपलब्धियां उन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम

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सुनील शर्मा
लखनऊ। यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने सक्रियता बढ़ा दी है। आम आदमी तक अपनी पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है। राजनीतिक दलों के लिए जनता की इच्छा जानने और उन तक अपनी बात पहुंचाने का सोशल मीडिया सबसे सशक्त और सस्ता माध्यम बन गया है। इसके जरिए कम खर्च और कम समय में हजारों-लाखों लोगों तक अपना संदेश भेजा जा सकता है। इसलिए राजनीतिक दल लोगों से जुडऩे के साथ ही पार्टी की रीतियों और नीतियों के बारे में भी लोगों को जानकारी दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश की छोटी-बड़ी सभी राजनीतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया में सक्रियता बढ़ाई है। जिन नेताओं ने कभी टच स्क्रीन मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया था, वह भी आगामी चुनाव में पार्टी की तरफ से मिले निर्देशों की वजह से सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गये हैं। इन नेताओं ने व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने के साथ ही फेसबुक और ट्विटर पर भी अपना अकाउंट बना लिया है। यहां राजनीतिक दलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता हर त्यौहार पर लोगों को बधाई देने और हर घटनाक्रम पर अपनी राय व्यक्त करने में काफी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस समय सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वाले राजनीतिक दलों में भारतीय जनता पार्टी सबसे आगे है। पार्टी ने तो सोशल मीडिया पर सक्रियता के आधार पर ही नेताओं की जिम्मेदारी तय करने की रणनीति अपना रखी है। इस बात की भी चर्चा है कि सोशल मीडिया पर सक्रियता को विधानसभा चुनाव में टिकट देने का आधार बनाया जा सकता है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो अपने सांसदों को सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने के खास निर्देश दिए हैं। इसलिए बीजेपी का एक-एक कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

हर पार्टी के पास हैण्डलर टीम
देश और प्रदेश की लगभग सभी राजनीतिक पार्टियों ने सोशल मीडिया हैण्डल करने के लिए अलग से अपनी टीम तैयार कर रखी है। इसमें बीजेपी सबसे आगे है। इस समय बीजेपी के पास बहुत बड़ी टीम सोशल मीडिया का काम देख रही है, जिसमें हर बूथ से एक सदस्य और पार्टी की हर रैली को पापुलर करने के लिए कोर कमेटी के 250 सदस्य शामिल हैं। भाजपा ने सपा सरकार की नीतियों के खिलाफ फेसबुक पर उत्तर देगा उत्तर प्रदेश फेसबुक पेज बनाया है, जिसमें यूपी के हालात से जुड़े तमाम सवाल उठाये गये हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक सोशल मीडिया पर पार्टी व केंद्र सरकार की उपलब्धियों की जानकारी सोशल मीडिया तक पहुंचाने के लिए करीब पांच हजार वालंटियर्स तैयार किए हैं। ये लोग भाजपा से जुड़े सोशल मीडिया पेज व गु्रप को वायरल करते हैं। भाजपा की देखा देखी कांग्रेस ने भी सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव मोड में अपनी बात जनता तक पहुंचाने में सक्रियता दिखानी शुरू कर दी है। कांग्रेस ने भी बाकायदा आईटी सेल का गठन कर रखा है जोकि ब्लाग, फेसबुक, ट्विटर, वाट्सएप आदि पर पार्टी के संदेश को भेजने का काम कर रहे हैं। सपा सरकार के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो पार्टी से संबंधित कई एप भी जारी किए हैं। बसपा का भी इस तरफ रुझान बढ़ा है। पार्टी प्रचार के परंपरागत तरीकों के अलावा सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों तक पहुंच रही है। रालोद के युवा नेता जयंत चौधरी की देखरेख में उनकी पार्टी की भी सक्रियता सोशल मीडिया पर बढ़ी है। इसलिए माना जा रहा है कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी सोशल मीडिया की भूमिका अहम रहेगी। वह वोटरों को पक्ष में करने और विपक्षियों को मात दिलाने में अहम रोल अदा करेगा।

सक्रियता से बने कीर्तिमान
आजकल सोशल मीडिया का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है। विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक संगठनों, सरकारों, नेताओं आदि ने अपने व्यक्तिगत खातों, पेज या ग्रुप के आधार पर सोशल मीडिया में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रखी है। राजनीतिक दल सोशल मीडिया को जनमत तैयार करने का एक माध्यम भी मान रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो 2009 तक कांग्रेस के शशि थरुर ही एकमात्र नेता थे, जो इंटरनेट पर सक्रिय थे। आज शायद ही कोई नेता ऐसा हो, जिसका फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर अकाउंट न हो, क्योंकि 2014 के लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग हुआ था। भाजपा ने अपने प्रचार माध्यम में इसे प्रमुखता से शामिल किया था। उस वक्त मोदी की रैलियों में आईटी सेल के कार्यकर्ता उनके संदेश को सोशल मीडिया के जरिए लोगों को तेजी से भेजते रहते थे। उस वक्त भाजपा को भारी बहुमत से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला सोशल मीडिया अन्य पार्टियों व राजनेताओं का पसंदीदा प्रचार माध्यम बनकर उभरा। उसके बाद फरवरी 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया की वजह से जीत के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। इन नतीजों ने राजनीति में सोशल मीडिया की मौजूदगी को मजबूती प्रदान की थी। चुनाव का अधिकांश युद्ध फेसबुक और ट्विटर पर चला। सोशल मीडिया की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 15 अप्रैल 2014 को आम आदमी पार्टी के संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट किया कि राहुल और मोदी से लडऩे के लिए ईमानदारी का पैसा चाहिए। उनकी इस अपील पर दो दिन में एक करोड़ रुपए जमा हो गए थे। इसलिए उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भी सभी राजनीतिक दल इसका सहारा ले रहे हैं।

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