सेहत पर भारी पड़ रहा मधुमेह

हार्ट अटैक से होने वाली मौतों का प्रमुख कारण बन रहा मधुमेह

मधुमेह पर नियंत्रण के लिए जागरूकता जरूरी
बच्चों को मधुमेह की चपेट में आने से बचाने की जरूरत

4Captureपीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। मधुमेह विश्व की सबसे घातक बीमारी बनती जा रही है। दुर्भाग्यवश भारत में मधुमेह के रोगी सबसे अधिक हैं। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में असंतुलित खान-पान की वजह से मधुमेह के रोगियों में तेजी से इजाफा हो रहा है। इसमें से कम उम्र के लोगों और खासकर बच्चों में मधुमेह की बीमारी का मिलना चिन्ता का विषय है। इसलिए चिकित्सकों ने स्कूली स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर बच्चों को मधुमेह की चपेट में आने से बचाने की सलाह दी है।
विश्व में मधुमेह के रोगियों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2008 में दुनिया में मधुमेह के रोगियों की अनुमानित संख्या 347 मिलियन थी। इसमें गरीब और मध्यम आय वाले देशों में मधुमेह के रोगी सबसे अधिक थे। वर्ष 2012 में डायबिटीज की वजह से कुल 15 लाख लोगों की मृत्यु हुई थी। यह आंकड़ा किसी भी बीमारी से होने वाली मौतों का 80 प्रतिशत माना गया। यदि मधुमेह को नियंत्रित नहीं किया गया तो 2030 तक मौत के सात प्रमुख कारणों में से एक मधुमेह बन जायेगा।
मधुमेह का प्रमुख कारण
मधुमेह किसी भी इंसान के शरीर में मौजूद हॉर्मोन्स के असंतुलन, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली का मिलाजुला नतीजा है। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कौसर उस्मान के मुताबिक मधुमेह दो प्रकार का होता है। इसे टाइप वन और टाइप टू नाम दिया गया है। फास्ट फूड और अनियमित जीवन शैली की वजह से राजधानी में टाइप वन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें बचपन या किशोरावस्था में अचानक ही शरीर में इंसुलिन का उत्पादन कम होने लगता है। यदि समय रहते बीमारी का पता न चले तो दो से तीन साल में इंसुलिन का उत्पादन पूरी तरह बंद हो जाता है। ऐसा तब होता है, जब किसी एंटीबॉंडी की वजह से बीटा सेल्स पूरी तरह काम करना बन्द कर देती है। इसलिए शरीर में गलूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को नियंत्रित करने कल लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत पड़ती है। इस बीमारी में बार-बार पेशाब लगती है, अत्यधिक प्यास लगती है, भूख खूब लगती है, कमजोरी महसूस होती है और वजन घटने लगता है। इसके अलावा आंखों की रोशनी भी प्रभावित हो जाती है। ऐसे में स्कूली स्तर पर ही बच्चों को मधुमेह की भयावहता और उसके लक्षण एवं बचाव के बारे में जानकारी देकर जागरूक करने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि टाइप टू मधुमेह की बीमारी 30 साल की उम्र के बाद होती है। मधुमेह ज्यादातर वजन बढऩे, पेट निकलने और मोटापे की समस्या की वजह से होता है। यह कई बार अनुवंशिक होता है। इसमें मरीज के शरीर में इंसुलिन कम मात्रा में बनता है। इस वजह से पैन्क्रियाज सही से काम नहीं कर पाता। यदि मरीज अच्छी तरह से एक्सरसाइज करे, संतुलित आहार ले, योगा और दवाइयां लेकर मधुमेह को नियंत्रित कर सकता है।

मधुमेह से होने वाली मौतों का आंकड़ा खतरनाक
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2012 में 15 लाख लोगों की मृत्यु सीधे मधुमेह के कारण हुई। मधुमेह की बीमारी शरीर का वजन बढऩे और तंबाकू के इस्तेमाल से भी खतरनाक हो जाती है। मधुमेह की बीमारी हृदय रक्त वाहिकाओं, आंखों, गुर्दों और तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। इस बीमारी में हृदय रोग और स्ट्रोक की वजह से मरीज की मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। आंकड़ों के मुताबिक हृदय रोज की वजह से मरने वालों में 50 प्रतिशत लोग मधुमेह से पीडि़त थे। मधुमेह की वजह से शरीर में कम रक्त प्रवाह के साथ संयुक्त, न्यूरोपैथी (तंत्रिका क्षति), अल्सर के संक्रमण और अंगों के काम नहीं करने की आशंका बढ़ जाती है। मधुमेह की बीमारी अंधेपन का भी प्रमुख कारण है।

निदान और उपचार
मधुमेह की बीमारी का प्रारंभिक स्तर पर पता चलने पर इलाज और संयमित जीवन शैली अपनाकर जड़ से समाप्त किया जा सकता है। डॉ. कौसर उस्मान के मुताबिक जिले में बहुत से ऐसे मरीज हैं, जो संयमित जीवन शैली और दवाओं का तीन से पांच साल तक सेवन करने के बाद खतरे से बाहर हैं। इनके शरीर में मधुमेह का लेवल नियंत्रित है। इंसान योगा और प्राणायाम के माध्यम से भी मधुमेह को नियंत्रित कर सकता है। इसमें योगासन और प्राणायाम से ब्लड में ग्लूकोज का लेवल और रक्त का दबाव कम करने में सहायता मिलती है। इसके शारीरिक और मानसिक तनाव भी कम होता है।

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