सेना पर आतंकी हमला, हमने खोए 17 जवान

26 साल में पहली बार किसी आर्मी बेस पर बड़ा हमला

आज तक हमने किसी आतंकी हमले में नहीं खोए 17 जवान

बीस सालों में कश्मीर के इतने बुरे हालात नहीं हुए कभी सेना ने चार आतंकी मारे

18-sep-page114पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पाकिस्तान में अचानक अपना जहाज उतारकर वहां के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को उनके जन्म दिन की बधाई देने गए और उसके कुछ दिन बाद ही पठानकोट एयरबेस पर आतंकियों ने हमला किया, जिनमें सात जवान शहीद हो गए थे। कल पीएम मोदी का जन्मदिन था और आज सुबह आतंकियों ने कश्मीर के आर्मी ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर हमला किया, जिसमें 17 जवान शहीद हो गए। कश्मीर के हालात बिगड़ते जा रहे हैं। भाजपा के सहयोग से बनी महबूबा मुफ्ती की सरकार हर मोर्चे पर फेल हो रही है। दो महीने से अधिक समय से कश्मीर में कफ्र्यू लगा हुआ है और लगभग सौ लोग वहां अपनी जान गवां चुके हैं। पिछले बीस सालों में कश्मीर के हालात इतने खराब कभी नहीं रहे। आज सुबह 17 जवानों के शहीद होने की खबर ने देश भर को दहला दिया।
सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चार आतंकियों को मार गिराया। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने अपना विदेशी दौरा रद्द करके आपातकालीन बैठक बुलाई है। रक्षामंत्री भी इस बैठक में भाग लेंगे। देश में सेना पर हो रहे आतंकी हमलों ने दहशत का माहौल बना दिया है। आईबी ने यूपी और उत्तराखंड के कुछ स्थानों पर हमले का एलर्ट जारी किया है, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
आज सुबह लगभग चार से पांच बजे के बीच आतंकी पाकिस्तान सीमा से सटे उरी में आर्मी के ब्रिगेड हेडक्वार्टर में तार काटकर अंदर घुसे और एडमिनिस्ट्रेटिव बैरिक में आग लगा दी और सेना के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में सेना ने भी फायरिंग की, जिसमें चार आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।
आतंकी हमले का मुकाबला करने के लिए पैरा कमांडो की टीम को एयरड्राप किया गया। हमले की सूचना मिलते ही देश भर में हडक़ंप मच गया। स्थितियों की समीक्षा के लिए आपातकालीन बैठक बुलाई गई। कश्मीर के हालातों पर उच्चस्तरीय बैठक जारी है।

सच में सेल्फ गोल नहीं करते अखिलेश

सपा में घमासान

पूरे विवाद से साफ हो गया अपनी पर आ गए तो किसी की नहीं सुनेंगे अखिलेश
नेताजी ने भी अपने संदेशों से साफ कर दिया कि अखिलेश अपने दम पर करेंगे राजनीति

संजय शर्मा
लखनऊ। सपा में चले घमासान के बाद हर शख्स की जबान पर यह चर्चा जरूर है कि आखिर सीएम अखिलेश यादव ने क्या खोया और क्या पाया। यह सवाल भी है कि क्या शिवपाल मजबूत हुए या अखिलेश। साथ ही जहन में यह बात भी कि नेता जी ने अखिलेश को इतना क्यों धमकाया। जो लोग सपा मुखिया मुलायम सिंह को बहुत करीब से जानते हैं वही इस बात को समझ पायेंगे कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद निकले संकेतों में नेताजी ने बड़ी सफाई से साबित कर दिया कि अब अखिलेश बदल गए हैं और वो राजनीति में किसी की नहीं सुनने वाले हैं। सामान्य आदमी भी प्रदेश में यही चर्चा करता था कि अखिलेश तो बहुत बढिय़ा हैं मगर उनकी चलती नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि अगर अखिलेश अपनी पर आ गए तो फिर सिर्फ उनकी ही चलेगी।
आइए कुछ उदाहरणों से यादव परिवार की इस राजनीति को समझने की कोशिश करते हैं और देश की राजनीति के सबसे मझे हुए खिलाड़ी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की राजनीति को भी समझने का प्रयास करते हैं।
इस पूरे विवाद के बाद नेताजी ने खुलकर शिवपाल यादव का पक्ष लिया और कहा कि पार्टी खड़ी करने में उन्होंने अपनी जान की बाजी भी लगा दी। उन्होंने अखिलेश को लोकसभा चुनाव के बाद सीएम बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिस कारण सीएम उनसे नाराज रहते हैं। उन्होंने लगे हाथ अमर सिंह की तारीफ भी कर दी। साथ ही गायत्री को दोबारा पद दिलाने के लिए भी कह दिया। रणनीति यह थी कि भाई शिवपाल को एहसास हो कि नेताजी उनके पाले में ही खड़े हैं, मगर नेताजी को जानने वाले कुछ वरिष्ठï समाजवादी लोगों की राय इससे इतर है। इन लोगों का कहना है कि नेताजी के इशारे पर बड़ी सफाई से यह साबित हो गया कि अगर अखिलेश यादव अपनी जिद पर आ गए तो उन्हें अपने चाचा शिवपाल यादव के विभाग छीनने में कुछ मिनट ही लगेंगे। यह भी संदेश दे दिया कि सीएम गुस्से में अपने पिता के प्रिय गायत्री प्रजापति को भी बर्खास्त करने में जरा भी चूक नहीं करेंगे। यही नहीं जो अमर सिंह खुलेआम कहते हैं कि वह मुलायमवादी हैं। उन अमर सिंह को अखिलेश खुलेआम कह सकते हैं कि इस बाहरी आदमी को अब मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। यही नहीं अखिलेश की टीम खुद सपा मुखिया के

खिलाफ भी नारेबाजी करने की हिम्मत जुटा सकती है। भले ही इन आरोपों में सच्चाई हो या न हो मगर इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से निगाह डालेंगे तो महसूस करेंगे कि ऐसे सारे कदम उठाकर सीएम ने साबित कर दिया कि अगर उनकी छवि पर दाग लगेगा तो वह एक मिनट में भी अपने सारे रिश्ते-नातों को भूलकर सिर्फ सीएम बन जायेंगे। हकीकत यही है कि मौजूदा दौर में सबसे जरूरी संदेश यही था कि सीएम सबको यह बता सके कि यूपी के सीएम सिर्फ और सिर्फ वहीं हैं। लोग खुश है कि नेताजी ने गायत्री को फिर मंत्री बनवाने की बात कहकर और और शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनवाकर अखिलेश का पक्ष कमजोर कर दिया। हकीकत यह है कि एक बार गायत्री को बर्खास्त करके सीएम ने यह संदेश तो दे ही दिया कि गायत्री के गड़बड़झाले में वह शामिल नहीं है साथ ही संसदीय बोर्ड कमेटी के चेयरमैन के पद पर अखिलेश की ताजपोशी साबित करती है कि संगठन में वह शिवपाल से कमजोर नहीं हुए क्योंकि टिकट बांटने का अधिकार इसी कमेटी को है और हकीकत यह है कि इस समय अखिलेश और शिवपाल के बीच रस्साकशी इसी बात को लेकर थी कि टिकट बांटने का अधिकार किसको मिलेगा और सबसे आखिर में शिवपाल को दो और विभाग देकर संदेश दिया गया कि इनके विभाग बढ़ा दिए गए हैं, मगर इसमें भी अखिलेश ने शिवपाल का सबसे पसंदीदा विभाग पीडब्ल्यूडी अपने पास रखकर साफ कर दिया कि असली ताकत अभी भी उनके पास ही है।

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