सूखे पर भारी सेल्फी का क्रेज

हमारे जन प्रतिनिधि सामाजिक तौर पर इस तरह से कर्तव्य शून्य कैसे हो सकते हैं। अक्सर इस तरह की खबरें सोशल मीडिया में चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। इस माध्यम के जरिए लोग अपनी सहमति और असहमति जताते रहते हैं। पर सवाल यह है कि आप ऐसे इलाके में जाएं जहां लोग प्यास से मर रहे हों और आप वहां जाकर सेल्फी खिंचाने में ज्यादा उत्साहित दिखें तो सवाल तो उठने ही है।

sanjay sharma editor5लातूर में आम लोग पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं। बूंद-बूंद पानी के लिए इलाका तरस रहा है। सूखाग्रस्त मराठवाड़ा इलाके में दौरे पर गई महाराष्ट्र की ग्रामीण विकास और जल संरक्षण मंत्री व बीजेपी नेता पंकजा मुंडे अपने सेल्फी के कारण विवादों में हैं। किसी जिम्मेदार पद पर काबिज व्यक्ति से जनता एक कर्तव्यनिष्ठा भरा आचरण चाहती है। ऐसे में मंत्री जी के सेल्फी पर सवाल उठना लाजमी है।
बीते रविवार को सूखे से जूझते लातूर में पंकजा मुंडे जिले के साई गांव पहुंचीं। यहां मंजरा नदी पर बड़े पैमाने पर गाद निकालने का काम चल रहा है। मंत्री जी इसी काम का जायजा लेने पहुंची थीं। यह नदी करीब-करीब सूख चुकी है। मंत्री जी ने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता की गवाही देनी शुरू कर दी। अपने ट्वीट के जरिए मंत्री जी ने यह दिखाने की कोशिश की कि वह कितनी सक्रिय हैं। बस उन्होंने सेल्फी का सिलसिला शुरू किया और सोशल मीडिया अकाउंट पर भेज दिया। इसके बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं।
मुंडे के सेल्फी ट्वीट पर लोगों का सवाल उठाना भी जायज है। आज के दौर में जब दिखावे की संस्कृति ज्यादा प्रचलन में हो तो कोई भी इस तरह के ट्वीट करेगा ही। पर सवाल यह है कि मंत्री जी की रुचि इलाके के लोगों और कार्य का निरीक्षण करने से ज्यादा सेल्फी में दिखी। यह समाज और उनके जनप्रतिनिधियों की सहज मानसिकता को दिखाता है।
एक ऐसे इलाके में आप खड़े हो जहां पानी की घोर किल्लत हो और आप सेल्फी लेने में ज्यादा व्यस्त दिखें तो मानवीयता के पहलू तो तार-तार होंगे ही। बेहतर होता मंत्री जी ने सेल्फी से ज्यादा लोगों की बातों को सुनने और समझने का काम किया होता और वह तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की होतीं। इससे पहले भी महाराष्ट्र के एक मंत्री के लिए हेलिपैड बनाने में दस हजार लीटर पानी के इस्तेमाल की बात सामने आई थी। हमारे जन प्रतिनिधि सामाजिक तौर पर इस तरह से कर्तव्य शून्य कैसे हो सकते हैं। अक्सर इस तरह की खबरें सोशल मीडिया में चर्चा का केंद्र बन जाती हैं। इस माध्यम के जरिए लोग अपनी सहमति और असहमति जताते रहते हैं। पर सवाल यह है कि आप ऐसे इलाके में जाएं जहां लोग प्यास से मर रहे हों और आप वहां जाकर सेल्फी खिंचाने में ज्यादा उत्साहित दिखें तो सवाल तो उठने ही है।
कुछ दिनों पहले ही लातूर की जनता को रेलवे के जरिए पानी पहुंचाया गया था। इस राहत कार्य की चारो तरफ प्रशंसा हुई थी। लेकिन बेहाल इलाके में मंत्री जी का सेल्फी लेना लोगों को नागवार गुजर रहा है।

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