सीबीसीआईडी को दागी करने वाला बना एसपी

  • अम्बेडकर नगर के एसपी पंकज सिंह पर अशुद्ध अभिलेख तैयार करने के साथ कई धाराओं में दर्ज है मुकदमा
  • सीबीसीआईडी के अधिकारी के ऊपर पहली बार दर्ज हुआ मुकदमा

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। प्रदेश में जहां काबिल अफसर डीजीपी कार्यालयों से अचैट हैं वहीं अपनी रसूख के कारण कई आईपीएस अधिकारियों को जिले का कप्तान बना दिया गया है। ताजा मामला अम्बेडकर नगर जनपद का है।

अम्बेडकर नगर जनपद के पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात पंकज सिंह के कारण जहां सीबीसीआईडी पर दाग लगा वहीं इनके ऊपर भी कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। इससे पहले सीबीसीआईडी में रहते हुए किसी अधिकारी के ऊपर कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ था। फिलहाल सीबी-सीआईडी पर दाग लगने के बाद पंकज कुमार को अम्बेडकर नगर जिले का कप्तान बना दिया गया है।

यह है मामला, दारोगा ने दर्ज कराया मुकदमा
बागपत जनपद के चांदीनगर थाने में वर्ष 2013 में भैंस चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमा अपराध संख्या 19/13 है। इस मुकदमे की विवेचना थाने में तैनात रहे एसआई ईश्वर सिंह को दी गई थी। विवेचना के दौरान पुलिस ने भैंस बरामद की लेकिन इस दौरान पुलिस का आरोप था कि बरामदगी के समय अपराधियों ने फायरिंग की। मौके पर एक आरोपी फारूख पुत्र रहमुद्दीन निवासी थाना चंदीनगर को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके तीन साथी फरार हो गए। फरार होने वालों में पुलिस के मुताबिक फरमान पुत्र रफीक निवासी आलियाना थाना चांदीनगर, तारिक पुत्र फारूख निवासी आलियाना थाना चांदीनगर और शाहिद पुत्र यासीन निवासी आलियाना शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में धाराओं में वृद्धि करते हुए 380 के साथ ही 307 और 25 आम्र्स एक्ट का मुकदमा दर्ज किया था। इसकी जानकारी होने पर शाहिद के पिता यासीन ने मानवाधिकार को प्रार्थना-पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। मानवाधिकार ने इस मामले में तत्कालीन एसपी बागपत से जवाब-तलब किया। जहां मामले की जांच एसआईएस (जघन्य अपराध इकाई) को सौंपी गई। तत्कालीन एसआईएस प्रभारी उमेश कौशिक ने इस मामले की विवेचना की, जिसमें पुलिस की कार्यवाही को सही पाया लेकिन आरोपी के पिता ने इस मामले पर आपत्ति जताई, तब इसकी जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। तत्कालीन सीबीसीआईडी अपर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार ने इस मामले को गलत पाया। सीबीसीआईडी के मुताबिक चारों आरोपी निर्दोष हैं। पुलिस ने इनको फंसाया है। इतना ही नहीं सीबीसीआईडी ने एसआईएस के प्रभारी उमेश कौशिक पर मुकदमा दर्ज कराया। अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की जानकारी मिलते ही प्रभारी उमेश कौशिक ने कोर्ट का सहारा लिया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बागपत ने इस मामले में उमेश की जांच को सही पाते हुए सीबीसीआईडी में तैनात अपर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी रफीक अहमद, मुख्य आरक्षी रामदत्त सहित सीबीसीआईडी में तैनात इंस्पेक्टर गजे सिंह पर चांदीनगर थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। इसकी जानकारी होने पर सीबीसीआईडी में तैनात अधिकारी और कर्मचारी रिवीजन में चले गए, जहां कोर्ट ने रिवीजन भी खारिज कर दिया। कोर्ट के आदेश पर चांदीनगर थाने में चार नवम्बर 2014 को सभी लोगों के खिलाफ धारा 166, 166क, 218, 219, 477 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। सीबी-सीआईडी के लिये यह पहला मामला था जहां उनके अधिकारियों और कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।

न्याय के लिये अम्बेडकर नगर जनपद की युवती चढ़ी थी पानी की टंकी पर
विगत दो माह से गैंगरेप की शिकार दलित किशोरी अम्बेडकर नगर जनपद की निवासी हैं। न्याय के लिए वह एसपी साहब के दरवाजे पर भी दस्तक दे चुकी है लेकिन एसपी साहब ने भी उसकी कोई सुनवाई नहीं की, जिसके कारण वह राजधानी में धरना देने लगी। बेहोश होने पर उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया। होश आने पर वह पानी की टंकी पर चढ़ गई और अपने लिये मौत मांगने लगी। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने समझा-बुझाकर नीचे उतारा।

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