सीबीआई की प्रासंगिकता…

यह अजीब विडंबना है कि जब केन्द्र में यूपीए सरकार थी तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्हें डराने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है और अब यही आरोप उन पर लग रहे हैं।

sanjay sharma editor5वर्तमान में जिस तरह सीबीआई का दुरुपयोग हो रहा है वह कहीं से ठीक नहीं है। देश में यही एक संस्था है जिससे हर उस व्यक्ति को खौफ होती है जो कुछ न कुछ गलत करता है लेकिन अब सीबीआई की प्रासंगिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आलम यह है कि सीबीआई को केन्द्र सरकार की कठपुतली करार दिया जा रहा है। इतना ही नहीं यह तक कहा जा रहा है कि सीबीआई कहने के लिए स्वतंत्र संस्था है। इस पर पूर्ण रूप से केन्द्र सरकार का नियंत्रण है। कल दिल्ली सचिवालय में सीबीआई ने छापा मारा था, उसके बाद राजनैतिक दलों की प्रतिक्रियाओं में यही बात निकल कर सामने आयी कि केन्द्र सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है।
यह अजीब विडंबना है कि जब केन्द्र में यूपीए सरकार थी तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया था कि उन्हें डराने के लिए सीबीआई का दुरुपयोग किया जा रहा है और अब यही आरोप उन पर लग रहे हैं। जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप किया जा रहा है उससे यही लग रहा है कि अब केन्द्र में सत्तासीन पार्टियां अपने फायदे के लिए सीबीआई का दुरुपयोग कर रही है। एक दौर था जब बहुत ही जटिल मामलों की सीबीआई जांच की मांग की जाती थी लेकिन अब छोटी-छोटी घटनाओं में सीबीआई जांच की मांग की जाने लगी है। इसका नतीजा यह है कि एक तो सीबीआई के पास मामलों की सूची में इजाफा होता जा रहा है और दूसरे ज्यादा से ज्यादा लोग सीबीआई की गिरफ्त में आ रहे हैं।
कुछ दिनों पहले एनआरएचएम मामले में मायावती से जब सीबीआई ने पूछताछ की तो मायावती ने भी यही आरोप लगाया था कि सरकार जानबूझकर उन्हें परेशान करने के लिए ऐसा कर रही है। उस समय बिहार में चुनाव होना था। इस लिहाज से सीबीआई की पूछताछ को बिहार चुनाव से भी जोड़ कर देखा गया था। ऐसा ही कुछ मामला मुलायम सिंह के मामले में भी देखने को मिला था, जब मानसून सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही बाधित की जा रही थी और उसमें मुलायम सिंह भी शामिल थे। उसी दौरान यादव सिंह मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश होने से मुलायम सिंह दबाव में आ गए थे। इसका नतीजा बिहार चुनाव में दिखा था। ऐसे अनेक मामले हैं जिसमें सीबीआई जांच बिठाने पर आवाज उठी है और उसे बदले की भावना करार दिया गया है। जिस तरह से सीबीआई पर लगातार आरोप लग रहे हैं उससे इस संस्था की प्रतिष्ठïा धूमिल हो रही है, जो कहीं से उचित नहीं है।

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