सीएम साहब, कुछ अच्छे अफसर इंतजार कर रहे हैं IAS बनने का

  • गैर-राज्य सेवाओं के किसी भी अफसर को 2001 से अब तक नहीं बनाया गया आईएएस
  • कई अच्छे अफसर चाहते हैं सीएम दें इस ओर ध्यान और शुरू कराएं कार्रवाई
  • अफसरों को भरोसा कि सीएम जल्दी ही करेंगे इस पर कार्रवाई

A14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अगर किसी अफसर का अच्छा रिकार्ड है और वह गैर-राज्य सेवा में हैं तो मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि वह ऐसे अफसर का चयन आईएएस सेवा के लिए कर सकते हैं, मगर कुछ लोग इसमें लगातार बाधा बने हुए हैं और वह नहीं चाहते कि इन अफसरों का चयन आईएएस सेवा के लिए हो। यही कारण है कि 2001 से अभी तक गैर-राज्य सेवा के किसी भी अफसर का चयन आईएएस सेवा के लिए नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश अधिकारी महापरिषद ने मुख्यमंत्री को एक पत्र सौंपकर अनुरोध किया है कि वह इसमें दखल देकर गैर-राज्य सेवा के अफसरों को आईएएस बनने का मौका दें।
मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में महापरिषद के पदाधिकारियों ने कहा है कि नियमानुसार अन्य राज्य सेवाओं का भी चयन पीसीएस/ एससीएस सेवाओं की भांति आईएएस में पदोन्नति की तरह होना चाहिए, मगर राज्य में 2001 से यह चयन नहीं किया गया। यही कारण है कि वर्तमान में पदोन्नति कोटे के 188 पदों में से गैर एससीएस के लिए निर्धारित सीमा 28 में से कोई भी अधिकारी कार्यरत नहीं रह गया है, जिससे गैर एससीएस अधिकारियों में निराशा की भावना बढ़ती जा रही है। वर्ष 2006 में गैर-राज्य सेवाओं में 11 पदों पर चयन की कार्रवाई प्रारम्भ हुई, मगर यह पूर्ण नहीं हो सकी। महापरिषद ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समय मांगा है, जिससे वह सीएम से मिलकर अपना पक्ष रख सके। महापरिषद ने भरोसा जताया है कि मुख्यमंत्री उनकी बात सुनकर तत्काल इस विषय पर कार्रवाही जरूर करेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि गैर-राज्य सेवा के अफसरों को आईएएस बनने का मौका जरूर मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि यूपी में पहले भी
गैर-राज्य सेवा के लोग आईएएस बनकर यूपी में उल्लेखनीय काम कर चुके हैं। पूर्व सीएम कल्याण सिंह इसी तरह गैर-राज्य सेवा के अधिकारी देवदत्त, संजीव कुमार, रमाकांत आदि को आईएएस बनाया तो मुख्यमंत्री रहते मुलायम सिंह यादव ने भी गैर-राज्य सेवा के गंगादीन यादव, एसके वर्मा और सुधीर श्रीवास्तव समेत कई अफसर को आईएएस बनाया। सत्य प्रकाश दीक्षित, एके वर्मा और रमाकांत शुक्ला भी इसी क्रम में आईएएस बनें। महापरिषद के पदाधिकारियों को भरोसा है कि सीएम अखिलेश यादव भी इसी तरह एक बार फिर अच्छे अफसरों को यह मौका देंग।े

नहीं सुधर रहे बुंदेलखंड के हालात सूखे और कर्जे से किसान बेहाल

  • सूखे से प्रभावित हैं देश के दस राज्य
  • हमीरपुर में कर्ज से परेशान प्रजापति ने लगाई फांसी
  • केन्द्र ने भी माना कि 33 करोड़ लोग हैं सूखे से प्रभावित
  • केन्द्र की आर्थिक सहायता और राज्य सरकार द्वारा की जा रही मदद भी नाकाफी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। उन्नीस दिनों में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद बुंदेलखंड में दो बार दौरा कर चुके हैं। उन्होंने और मुख्य सचिव ने कड़े निर्देश जारी किए हैं कि अगर बुंदेलखंड में किसी भी किसान की कर्ज या भूख के कारण जान गई तो अफसर दोषी होंगे और उन्हें दंडित किया जाएगा। इसके बावजूद अफसर सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं और किसान बेहाल है। बुंदेलखंड में सूखे की मार झेल रहे किसानों की आत्महत्या करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। आज सुबह हमीरपुर जिले में एक और किसान जालिम प्रजापति ने खेत में लगे पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। किसान परिवार पर साहूकारों सहित बैंक का तीन लाख से ज्यादा का कर्र्ज था।
बुंदेलखंड में बीते तीन साल से सूखा है। बीस-बीस बीघे जमीन के बावजूद किसान इस साल एक बिसवा में भी बोआई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। पिछले तीन साल में किसानों का दर्द सुनने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठï नेता पहुंचे लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। आज एक किसान
जालिम ने पेड़ से लटक कर आत्महत्या कर ली।
हालांकि सूबे की अखिलेश सरकार ने पूरे प्रदेश में भुखमरी से कोई ना मरे, इसलिए राहत पैकेट योजना का भी शुभारम्भ कर दिया। साथ ही किसी भी किसान की मौत होने पर जिले के जिलाधिकारी को मौके पर जाने का फरमान जारी किया है, लेकिन किसान को राहत पैकेट मिलना तो दूर किसान के मरने के बाद जिले के हुक्मरानों को जालिम की खबर लेने तक समय नहीं मिला।
तीन सालों में बुंदलेखंड पहुंचे कई दिग्गज
अक्टूबर 2013 में नरेन्द्र मोदी ने झांसी रैली में किसानों-मजदूरों की बेहतरी के अनेक आश्वासन दिए और वादे किए लेकिन अपनी सरकार बनने के बाद बुंदेलखंड को भूल गए। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी लोकसभा चुनाव के दौरान बांदा जिले में गए और उन्होंने भी बदहाली की बात की लेकिन नतीजा सबके सामने है। गृहराज्यमंत्री राजनाथ सिंह भी लोकसभा चुनाव के दौरान बांदा जिले के रायफल क्लब गए थे। सभा में किसानों की बदहाली पर बड़ी-बड़ी बातें की थीं और मदद का आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब बुंदेलखंड के किसानों की पीड़ा किसी को नहीं महसूस हो रही है। इन लोगों के अलावा उत्तर प्रदेश के भी कई दिग्गज वहां गए लेकिन नतीजा सिफर है। इधर के कुछ महीनों में हालांकि बुंदेलखंड में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है लेकिन किसानों की समस्याओं को दूर
करने का कोई खास काम नहीं
हो रहा है।

10 राज्यों के 256 जिलों में 33 करोड़ लोगों पर सूखे की मार-केन्द्र
केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में माना कि दस राज्यों के 256 जिलों में करीब 33 करोड़ लोग सूखे की मार झेल रहे हैं। पहली बार सरकार ने कोर्ट में सूखे के आधिकारिक आंकड़े पेश किए हैं। केंद्र ने बताया कि सूखाग्रस्त राज्यों की स्थिति के मद्देनजर उसने मनरेगा के तहत निर्धारित 38,500 करोड़ रुपये में से करीब 19,545 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। केंद्र ने गुजरात का व्यापक आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं कराया है। किसानों को राहत देने के मुद्दे पर केंद्र ने शीर्ष अदालत को अवगत कराया कि सूखा प्रभावित इलाकों में बैंक किसानों पर नरमी बरतेंगे। सुप्रीम कोर्ट एनजीओ स्वराज अभियान की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।स्स्स्स्स्स्न्यरु॥रूस्न्यरु

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