सीएम फेस के साथ भाजपा में अब प्रत्याशियों की घोषणा पर भी उहापोह

अन्य दलों से आए नेताओं के साथ-साथ अपनों को संतुष्टï करना भाजपा के लिए होगा मुश्किल
केंद्रीय व प्रदेश नेतृत्व को सता रहा पार्टी में गुटबाजी बढऩे व विरोध की आवाज बुलंद होने का डर

captureसुनील शर्मा

लखनऊ। भाजपा ने जिस डर से उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री चेहरे का नाम घोषित नहीं किया, वह अब प्रत्याशियों के नाम की घोषणा करने पर भी हावी हो गया है। शीर्ष नेतृत्व को गैर दलों से आए कद्दावर नेताओं व उनके समर्थकों के साथ-साथ अपनों को भी संतुष्टï करने की चिंता सता रही है। पार्टी को डर है कि चुनाव के नजदीक प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करते ही कहीं गुटबाजी न बढ़ जाए, भगदड़ न मच जाए। विरोध के स्वर भी बुलंद हो सकते हैं। वहीं चुनाव की तेज होती आहट ने चुनाव लडऩे की इच्छा रखने वालों को सक्रिय कर दिया है। जिन्होंने अपने आकाओं के अलावा पार्टी के लंबरदारों के यहां भी बैठकी शुरू कर दी है।
2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा समेत अन्य दलों ने जी जान लगा दिया है। भाजपा को छोडक़र अन्य प्रमुख दल यूपी के संभावित मुख्यमंत्री का नाम घोषित कर उसके नेतृत्व में चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं। कांगे्रस ने दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, सपा से वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव व बसपा ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को सीएम फेस के रूप में आगे किया है। इसके अलावा सभी दलों ने अधिकांश विधानसभा प्रत्याशियों के नामों की भी घोषणा कर दी है। जो विधानसभाएं बचीं हैं वहां के लिए शीघ्र प्रत्याशी घोषित करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं भाजपा में मुख्यमंत्री पद के लिए गोरखपुर सांसद योगी आदित्यनाथ, सुलतानपुर सांसद वरुण गांधी, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, राजनाथ सिंह, राज्यपाल कल्याण सिंह के अलावा कई नाम तेजी से उभरे थे। महीनों तक इसे लेकर राजनीतिक हलकों में बाजार गर्म रहा। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी मुख्यमंत्री फेस की घोषणा करने की बात कहता रहा। मुख्यमंत्री बनने की चाह रखने वाले नेताओं व उनके समर्थकों के उतावलेपन से गुटबाजी का खतरा मंडराने लगा। जिसने केंद्रीय नेतृत्व के कान खड़े कर दिए। इसी के चलते भाजपा आज तक मुख्यमंत्री के लिए नाम नहीं घोषित कर सकी है। ऐसा ही कुछ हाल विधानसभाओं के लिए प्रत्याशियों की घोषणा करने को लेकर है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक गैर दलों से आए स्वामी प्रकाश मौर्य, रीता बहुगुणा जोशी, ब्रजेश पाठक, जुगुल किशोर समेत अन्य नेता स्वयं के अलावा अपने समर्थकों के लिए भी इच्छानुसार सीटों पर टिकट मांग रहें हैं। जिसने भाजपा नेतृत्व की चिंता को बढ़ा दिया है। वहीं लंबे समय से भाजपा में अपने अच्छे दिन की बाट जोह रहे नेता किसी भी सूरत में अबकी बार नहीं चूकना चाह रहे हैं। ऐसे में सभी को संतुष्टï करना भाजपा के लिए चुनौती से कम नहीं है। इसलिए भाजपा प्रत्याशी घोषित करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है। उसे डर है कि प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कहीं विद्रोह की आवाज न बुलंद हो जाए। गुटबाजी बढऩे के साथ ही पार्टी में भगदड़ मचने का भी खतरा भी सता रहा है।

संघ, विहिप व अन्य की भी माननी है बात
भाजपा के सामने राष्टï्रीय स्वयं संघ व उसके आनुषांगिक संगठनों की सिफरिशों को भी मानने की विवशता है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी के टिकट वितरण में संघ का पूरा हस्तक्षेप रहता है। कई सीटों पर संघ अपने लोगों को ही टिकट देने की सिफारिश करता है। जिन्हें प्रत्याशी बनाना भाजपा की मजबूरी होती है। इसके अलावा विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, गायत्री परिवार समर्थित प्रत्याशियों को संतुष्टï करना होता है। वहीं पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व में शामिल कई नेता भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए आए दिन घुडक़ी देते रहते हैं। कभी-कभी तो ऐसे नेता बकायदा जिद्द पर उतर आते हैं। पार्टी कुछ गुटबाजी फैलने, विद्रोह होने के डर से तो बाकी संघ आदि के बीच संतुलन बैठाने के चक्कर में प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं कर पाती है। यही वजह है कि 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं कर पा रही है।

Pin It