सीएम पर नहीं चला नेताजी का धोबीपाट लुभावनी बातों में नहीं फंसा पाए बेटे को

डेढ़ घंटे तक चली पिता-पुत्र की मुलाकात में राष्टï्रीय अध्यक्ष के पद से लेकर सीएम पद तक को लेकर हुई चर्चा
नेताजी ने सीएम से  कहा कि वह ले लें चुनाव आयोग से अपना  प्रत्यावेदन वापस
नेताजी ने अपने बेटे से कहा तुम ही होगे सीएम और टिकट बंटवारे में ली जाएगी तुमसे राय
सीएम समर्थकों ने कल ही बता दिया था कि अमर की रणनीति थी कि नेताजी फंसा लें अपनी बातों में सीएम को
सीएम ने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से कहा अपने क्षेत्रों में जाएं जल्द ही सभाओं का कार्यक्रम कर रहा हूं जारी

a1संजय शर्मा
लखनऊ। समाजवादी पार्टी का घमासान अब चरम पर पहुंच गया है। तमाम कोशिशों के बावजूद समझौते की कोई राह निकलती नजर नहीं आ रही है। मुलायम सिंह राष्टï्रीय अध्यक्ष का पद छोडऩे को तैयार नहीं हैं। सीएम जानते हैं कि अगर नेताजी राष्टï्रीय अध्यक्ष बने रहे तो अमर सिंह और शिवपाल सिंह यादव जिसको चाहेंगे उसको नेताजी से टिकट दिलवा देंगे। आज डेढ़ घंटे की मुलाकात में बेहद भावुक होकर अखिलेश ने नेताजी से कहा आप मेरे पिता हैं। मैं आपके लिए कुछ भी कर सकता हूं। सिर्फ तीन महीने के लिए मुझे मौका दे दें। मैं इसके बाद सभी पद छोड़ दूंगा, मगर नेताजी तैयार नहीं हुए। सीएम समझ गए कि वार्ताओं के दौर में अब उन्हें नुकसान हो सकता है, लिहाजा उन्होंने अपने प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं से कहा कि वह क्षेत्र में जाएं जल्द ही मैं अपनी सभाओं का कार्यक्रम जारी कर दूंगा।
कल दोपहर में नेताजी ने कहा था कि अखिलेश मेरा बेटा है और अगला सीएम वही होगा। नेताजी की इस बात से अर्थ निकाला गया कि शायद नेताजी अब सीएम की बात मान लेंगे, मगर उसके कुछ घंटे बाद ही नेताजी ने चुनाव आयोग में जाकर साइकिल पर अपना दावा ठोंक दिया। शाम को नेताजी रामगोपाल पर तो सख्त रहे, मगर अपने बेटे के लिए नरम रहे। शाम को ही तय हो गया कि आज वह अपने बेटे से मुलाकात करेंगे। तब तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि अब यह विवाद खत्म होने जा रहा है।
मगर देर रात सीएम को पता चल गया कि नेताजी के इस तरह मुलायम होने के पीछे क्या रणनीति है। दरअसल, अमर सिंह ने नेताजी को समझाया कि मौजूदा हालात अखिलेश के पक्ष में हैं। संभव है कि चुनाव आयोग साइकिल का चुनाव चिन्ह अखिलेश को दे दे या फिर दोनों लोगों को नया चुनाव चिन्ह देकर साइकिल को फ्रीज कर दे। इस स्थिति में अखिलेश को फायदा मिलेगा और जो थोड़े बहुत प्रत्याशी साइकिल चुनाव चिन्ह के चक्कर में नेताजी के खेमे में नजर आ रहे हैं वह भी अखिलेश के साथ चले जाएंगे।
इसके बाद तय हुआ कि नेताजी किसी तरह अखिलेश यादव को इमोशनल करें और कहें कि सीएम वहीं होंगे बस राष्टï्रीय अध्यक्ष पद पर वह अपना दावा वापस ले लें। अगर अखिलेश ने ऐसा कर दिया तो फिर टिकट बांटने का अधिकार नेताजी के पास आ जाएगा और वे जिसको चाहेंगे उसको टिकट देंगे।
अमर सिंह की यह रणनीति अखिलेश को पता चल गई, लिहाजा आज उन्होंने इस रणनीति को भी फेल कर दिया। अब अखिलेश खुद सीधे मैदान में जाने का मन बना रहे हैं।

क्या अमर के पीछे है भाजपा का कोई गेम प्लान
हर किसी के जेहन में यह सवाल है कि आखिर अमर सिंह के चक्कर में नेताजी अपने बेटे का साथ क्यों छोड़ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा के मुताबिक अमर सिंह के इस प्लान के पीछे भाजपा के कुछ नेताओं का हाथ है। अमर सिंह को जेड प्लस सिक्योरिटी देना इसी रणनीति का हिस्सा है। बताया जाता है कि अमर सिंह ने नेताजी से कहा कि अगर वह मोदी के प्रति थोड़ा नरम रहेंगे तो पीएम मोदी उन्हें राष्टï्रपति पद का उम्मीदवार भी बनवा सकते हैं।

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