सीएम ने कहा नहीं करूंगा गुंडों और माफियाओं का प्रचार, पार्टी में हडक़ंप

  • सीएम के तेवरों से खारिज हो सकता है कौमी एकता दल का सपा में विलय
  • अपनी विकास की छवि को किसी भी कीमत पर बर्बाद करना नहीं चाहते अखिलेश
  • माफिया मुख्तार की पैरवी करने वाले एक मंत्री की छुट्टïी, कई पर गाज गिरना तय
  • 27 जून को होगा अखिलेश मंत्रिमंडल का विस्तार, नए चेहरों को मिलेगी जगह
  • अखिलेश को मनाने में जुटे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव

22 JUNE PAGE11

संजय शर्मा
लखनऊ। पिछले कुछ महीनों से सीएम अखिलेश यादव दिन-रात मेहनत करके यह संदेश देने में कामयाब होते नजर आ रहे हैं कि वह विकास कार्यों को सबसे ज्यादा महत्व देते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में डीपी यादव को पार्टी में न लाने के फैसले ने पूरी राजनीति की दिशा बदल दी थी, मगर इस बार यूपी चुनाव के कुछ महीने पहले ही माफिया मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का विलय समाजवादी पार्टी में होने से सीएम अखिलेश यादव के सारे सपनों और उनकी विकास वाली छवि पर खासा नुकसान होता नजर आ रहा है। कल आनन-फानन में जिस तरह मुख्तार अंसारी के भाइयों को पार्टी में शामिल किया गया, उससे सीएम अखिलेश यादव बेहद नाराज हैं। उन्होंने साफ-साफ कह दिया है कि चाहे नफा हो या नुकसान, वह किसी भी कीमत पर गुंडों और माफियाओं का प्रचार नहीं करेंगे। कुछ महीने पहले ही मंच पर अतीक अहमद को किनारे करने के उनके फैसले की युवा वर्ग और सोशल मीडिया पर खासी सराहना हुई थी। सीएम जानते हैं कि इस तरह माफियाओं को साथ लाने से पूर्वांचल की कुछ सीटें तो जीती जा सकती हैं, मगर पूरे देश में उनकी जो छवि बनी है उस पर खासा डेंट पड़ जाएगा। इस घमासान को देखते हुए यादव परिवार में आज बैठक हो रही है। संभव है कि कौमी एकता दल का विलय खटाई में पड़ जाए।
कौमी एकता दल का विलय कल सुबह 10 बजे पार्टी दफ्तर में होना था। सीएम अखिलेश यादव के कड़े तेवर देखते हुए इसे टाला गया और सीएम जैसी ही जौनपुर गए आनन-फानन में प्रेस काफ्रेंस करके कौमी एकता दल का पार्टी में विलय करा दिया गया। जैसे ही सीएम लौटे उन्होंने इस विलय के कर्ता-धर्ता माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम सिंह यादव को बर्खास्त कर दिया। सीएम ने कहा कि माफियाओं को साथ लाने से फायदा कम नुकसान ज्यादा होता है। इस चुनाव में सबसे ज्यादा युवा वोटर हैं और वह माफियाओं को नहीं विकास को पसंद करते हैं। सीएम के इन तेवरों के बाद सपा मुखिया के निर्देश पर आज शिवपाल यादव और सीएम अखिलेश यादव के बीच एक बार फिर बैठक हुई मगर कोई नतीजा नहीं निकल सका और शिवपाल यादव सीएम निवास से बिना मीडिया से बात किए निकल गए।

27 को होगा मंत्रिमंडल विस्तार, भूमिहार को लेने की मांग
माध्यमिक शिक्षा मंत्री बलराम सिंह यादव की बर्खास्तगी के बाद मंत्रिमंडल के कई उन मंत्रियों के चेहरे उतरे हुए हैं जिन पर भ्रस्टाचार की शिकायतें हैं। सीएम अपने मंत्रिमंडल में कुछ युवा चेहरों को शामिल करके नई ऊर्जा का संदेश देना चाहते हैं। पूर्वांचल की कई सीटों पर भूमिहार बड़ी संख्या में हैं और वह जीत हार का फैसला कर सकते हैं। पहले नारद राय भूमिहार बिरादरी का प्रतिनिधित्व करते थे। मंत्रिमंडल से बाहर होने के बाद भी वह जनेश्वर मिश्र और जय प्रकाश नारायण की स्मृति में कई बड़े कार्यक्रम भी करवा चुके हैं। इस बार उन्हें मंत्रिमंडल में लेने की मांग की जा रही है, जिससे भूमिहारों में अच्छा संदेश जा सके। सीएम सुनील साजन और आनन्द भदौरिया को भी मंत्रिमंडल में लेने का मन बना रहे हैं। मंत्रिमंडल में एक मुस्लिम को भी लिए जाने की संभावना बताई जा रही है। सब मंत्रियों के दिलों की धडक़न बढ़ी हुई है और वह अपने-अपने स्तर से इस विस्तार की जानकारी लेने में जुट गए हैं।

आखिर पंचायती राज से क्यों नहीं हट रहे भ्रष्टï प्रमुख सचिव चंचल तिवारी

  • विवादित शासनादेश में डीएम और सीडीओ को भी कर दिया किनारे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। यूपी के विवादित और बदनाम प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी ने पांच करोड़ रुपेय लेकर चौदहवें वित्त आयोग के हजारों करोड़ के पैसे की बंदर बांट के लिए सब नियम और कायदे ताक पर रख दिये। ऊपर से देखने में भले ही पंचायत राज और ग्राम्य विकास की लड़ाई शांत दिख रही हो मगर अंदर-अंदर दोनों संगठन एक बार फिर आर-पार की लड़ाई की तैयारियों में जुटे हैं। कुछ ही दिनों में एक बार फिर यह विवाद सामने आ सकता है। अब प्रमुख सचिव का यह विवादित शासनादेश प्रमुख सचिव पंचायती राज के भ्रष्टïाचार के कारनामों के साथ मुख्यमंत्री को भेजा गया है। इस पत्र में विस्तार से लिखा गया है पैसों के लालच में किस तरह प्रमुख सचिव पंचायती राज ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के अधिकारों में कटौती कर दी है।

वो भ्रस्टाचार को रोक न सके!
सीएम को लिखे खत में चंचल तिवारी के शासनादेश का हवाला देते हुए विस्तार से इसकी व्याख्या की गई है। प्रमुख सचिव ने अपने विवादित शासनादेश में लिखा है कि ग्राम पंचायतें 14वें वित्त आयोग के मार्ग निर्देशों के क्रम में कार्ययोजना बनायेंगी और सहायक विकास अधिकारी पंचायत स्तर पर इसे संचालित करके जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी से अनुमोदन प्राप्त कर लेंगे।
ग्राम्य विकास के लोगों ने सीएम को पत्र लिखकर कहा कि ब्लाक में खंड विकास अधिकारी ही राजपत्रित अधिकारी होता है और क्षेत्र पंचायत का मुख्य कार्यपाल अधिकारी होता है और सभी विभागों पर उसका नियंत्रण होता है।

…उसको अलग करके कार्ययोजना बनाने से स्थिति ठीक नहीं हो सकती। कार्ययोजना का परीक्षण खंड विकास अधिकारी की अध्यक्षता में गठित खंड स्तरीय समिति द्वारा कर लिये जाने के उपरांत ही कार्य योजना जिला स्तर पर प्रेषित होना चाहिए।
प्रमुख सचिव श्री तिवारी ने अपने शासनादेश में लिखा है कि पंचायत के सहायक विकास अधिकारी के नियंत्रण में एक एकाउंटेंट, एक कंप्यूटर ऑपरेटर तथा दो अवर अभियंता सिविल सेवा प्रदाता संस्था के माध्यम से मानदेय पर की जायेगी।
ग्राम्य विकास विभाग के अफसरों ने सीएम को लिखा कि भारत सरकार के पत्र संख्या 13(32) में स्पष्टï लिखा है कि दस प्रतिशत तकनीकी तथा प्रशासनिक मद से धनराशि खर्च की जा सकती है मगर केवल संबंधित ग्राम पंचायत और स्थानीय निकाय द्वारा ही यह राशि खर्च की जा सकती है। मगर इस विवादित शासनादेश ने प्रशासनिक मद के व्यय में प्रोफेशनल हेतु एकीकृत व्यवस्था की गई है जो गलत है। सहायक विकास अधिकारी जो शासकीय कर्मचारी हैं उसे चार हजार रुपये देने का प्राविधान किया गया है जो गाईड लाइन के विपरीत है। उन्होंने सुझाव दिया है कि ग्राम पंचायतों में उपलब्ध ग्राम रोजगार सेवक तथा तकनीकी सहायकों को मैन पॉवर के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इसी विवादित शासनादेश में श्री तिवारी ने भ्रष्टïाचार को बढ़ावा देने के लिए आदेश कर दिया कि सहायक विकास अधिकारी पंचायत के नाम से तकनीकी एवं प्रशासनिक मद से बैंक खाता खोला जायेगा। ग्राम्य विकास के लोगों का कहना है कि सहायक विकास अधिकारी खंड विकास अधिकारी के सापेक्ष कनिष्ठï अधिकारी होता है। उसके एकल नियंत्रण में वित्तीय रख-रखाव उचित नहीं है। इन स्थितियों में खाते का संचालन खंड विकास अधिकारी तथा सहायक विकास अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से होना चाहिए।
इस विवादित जीओ में लिखा गया है कि चौदहवें वित्त आयोग की अवधि का पहला वर्ष है इसीलिए कंप्यूटर, फर्नीचर आदि केंद्रीयकृत किया जायेगा। स्वाभाविक है कि सेंटर परचेज होने से करोड़ों का गोलमाल आसानी से होना चाहिए।
यही नहीं शासनादेश में जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के महत्व को भी लगभग खत्म कर दिया गया है। जनपद में सभी क्लास 2 अफसरों की वार्षिक चरित्र पंजिका जिलाधिकारी ही लिखते हैं। इस शासनदेश में जिलाधिकारियों से यह अधिकार वापस लेकर मंडल मुख्यालय पर तैनात डिप्टी डायरेक्टर पंचायती राज को दे दिया गया। मुख्य विकास अधिकारी की भूमिका भी विकल्प के रूप में रखी गई है।
यही नहीं पंचायत विभाग के कर्मचारी आराम से भ्रष्टïाचार कर सकें, इसके लिए खंड विकास अधिकारी को क्षेत्र पंचायत के ऑडिट से बाहर कर दिया गया जबकि विकास खंड का मुख्य कार्यपालक अधिकारी खंड विकास अधिकारी ही होता है तािा वही कागजों का रख रखाव करता है।
सबको इस बात की बेहद हैरानी है कि जब चंचल तिवारी के भ्रष्टïचार के इतने कारनामें सामने आ गये तब भी यह आखिर उन्हें पंचायती राज से क्यों नहीं हटाया जा रहा है। चंचल तिवारी के इस शासनादेश और इससे पहले की गई भर्तियों की शिकायत लोकायुक्त से करने और इस भ्रष्टïाचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग को लेकर कुछ लोग हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो चंचल तिवारी को अपने कारनामों का गंभीर परिणाम झेलना पड़ सकता है।

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