सीएम अखिलेश यादव ने एसपी बाराबंकी से कहा – इकबाल दो दिन में गिरफ्तार नहीं हुआ तो कर दूंगा सस्पेंड

नहीं मिली राहत, अदालत ने खारिज की एफआईआर रद्द करने की अर्जी

  • जेल जाना ही पड़ेगा इकबाल को
  • सीएम नहीं चाहते कि इस तरह के गुंडों को दिया जाय संरक्षण
  • कोर्ट ने तलब की पुलिस से केस डायरी
  • इकबाल का नम्बर नहीं दूंगा: एसपी अब्दुल हमीद

H1जिस इकबाल को लेकर सरकार की खासी किरकिरी हो रही है वह इकबाल अभी भी एसपी बाराबंकी का दुलारा बना हुआ है। जिस इकबाल के फोन को सर्विलांस पर लेने का दावा एसपी बाराबंकी कर रहे हैं वह नम्बर आज भी लोगो को बताना नहीं चाहते। आज एसपी बाराबंकी से पूछा गया कि इकबाल का नम्बर क्या है तो उन्होंने नम्बर बताने से मना कर दिया और कहा कि यह गोपनीय है।

 संजय शर्मा
लखनऊ। एसपी बाराबंकी अब्दुल हमीद ने इकबाल की दोस्ती करके जो फायदा उठाया था अब उससे ज्यादा उन्हें नुकसान होने जा रहा है। इकबाल के कारनामें सामने आने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बेहद खफा हैं। जब उन्हें पता चला कि टोल प्लाजा पर फायरिंग के बाद एसपी हमीद ने अपने घर पर इकबाल की आवभगत की थी तो उनका पारा चढ़ गया। उन्होंने एसपी बाराबंकी को फटकार लगाते हुए कहा कि दो दिन में इकबाल गिरफ्तार नहीं हुआ तो मैं तुम्हें सस्पेंड कर दूंगा। हाईकोर्ट ने आज इकबाल की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। अब पुलिस के पास इकबाल की गिरफ्तारी के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
सीएम के इन तेवरों को देखकर पुलिस महकमे में हडक़ंप मच गया। जो एसपी अपने घर बुलाकर इकबाल से डीलिंग करने में जुटे थे वहीं एसपी अपनी टीम बनाकर उसकी तलाश में जुटे हैं क्योंकि उनको पता था कि अब पानी सर से ऊपर हो चुका है और अगर इकबाल नहीं मिला तो उनकी मुसीबत बढ़ जायेगी। मगर इकबाल कम शातिर नहीं है। जब उसको पता चला कि उसके दोस्त एसपी ही उसकी गिरफ्तारी का ताना-बाना बुन रहे हैं तो वह रातों-रात भाग खड़ा हुआ। इसके बाद एसपी बाराबंकी इकबाल के परिजनों से अनुरोध करते रहे कि किसी तरह इकबाल को बुला दो वरना उनकी नौकरी खतरे में पड़ जायेगी। दबाव ज्यादा बना तो उसके परिजनों ने एसपी को आश्वस्त किया कि वह जल्दी ही उनकी समस्या का निदान कर देंगे।
इस रणनीति के तहत ही आज इकबाल के अधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उसकी जमानत के लिए अर्जी दे दी। परिजनों ने एसपी बाराबंकी को समझा दिया कि अगर इकबाल को जमानत मिल गई तो दोनों का काम चल जायेगा। सीएम को भी बता दिया जायेगा कि अब तो इकबाल जमानत पर है।
एसपी बाराबंकी के इस रूख से पुलिस के आला अफसर भी हैरान है। आईजी अमिताभ ठाकुर का कहना है कि जिस व्यक्ति को पूर्व में राज्यमंत्री का दर्जा मिला हो उस व्यक्ति को पुलिस एक सप्ताह बीतने पर भी न ढूंढ पायी हो, तो यह पुलिस के लिए शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिस तरह एसपी बाराबंकी की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, उसने साफ कर दिया है कि बाराबंकी पुलिस जानबूझ कर इस केस को कमजोर करना चाह रही है।
जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे इकबाल की कारगुजारियां सामने आ रही हैं। इकबाल ने जैसे यूपी की नौकरशाही को पैसे और अय्याशी के दम पर अपने चुंगल में किया था उससे यह सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर नौकरशाही किस तरह एक गुंडे के इशारे पर नाच सकती है। इकबाल की गाडिय़ां चोरी की निकली और उसके साथियों के पास अवैध हथियार भी निकले। जाहिर है इकबाल एक ऐसा संगठित गिरोह चला रहा था जिसके तार कुछ और बड़े लोगों से जुड़े हैं। पूर्वांचल के एक बड़े माफिया और इकबाल के सम्बन्ध भी अब जग जाहिर हो गये हैं।
बाराबंकी पुलिस जान बूझकर इकबाल के फोन की सीडीआर नहीं निकाल रही है क्योंकि इससे खुलासा हो जायेगा कि खुद इकबाल ना सिर्फ बाराबंकी के एसपी से बल्कि कई बड़े पुलिस अफसरों और आईएएस अफसरों के सम्पर्क में था। ये बड़े अफसर नही चाहते कि इकबाल के केस में अभी और परते उधेड़ी जाय।
उधर न्यायालय के आज के फैसले ने एसपी बाराबंकी और इकबाल की सारी रणनीति फेल कर दी। इकबाल ने एफआईआर रद्द करने की याचिका दाखिल की थी। न्यायालय ने ऐसा करने से इंकार कर दिया और केस डायरी भी तलब कर ली। कोर्ट के इस फैसले से हडक़ंप मच गया है। बाराबंकी पुलिस के सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है। या तो उसे इकबाल को गिरफ्तार करना होगा या फिर सीएम के गुस्से का शिकार होना होगा।

H1शाही इमाम के पास पहुंचा इकबाल

इकबाल के बुरे दिन अब शुरू हो गये हैं। लखनऊ के वे अफसर जिन्हें इकबाल उनकी अय्याशी के सब साधन मुहैया कराता था उन्होंने अब इकबाल से किनारा कर लिया है। यही हाल राजनेताओं का है। कोई राजनेता नहीं चाहता कि मेरा नाम इकबाल के साथ जोड़ा जाय। यही कारण है कि इकबाल अब परेशान होकर उन लोगों के पास पहुंच रहा है जो उसकी मदद कर सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इकबाल इस समय गुडग़ांव में रुका हुआ है। उसने शाही इमाम से मदद की गुहार लगाई है। मगर इस समय शाही इमाम के मौजूदा सरकार से रिश्ते अच्छे नहीं चल रहे इसलिए उन्होंने साफ कह दिया कि वह उसकी मदद करने की स्थिति में नहीं है।

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