सीएमएस के बाहर गुण्डों का आतंक, स्कूल प्रबंधन को नहीं है चिंता

आम होती जा रही हैं स्कूली बच्चों के साथ छिनैती और बदसलूकी की घटनायें

Capture 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। राजधानी में शोहदों का आतंक बढ़ता जा रहा है। स्कूली छात्र-छात्राएं शोहदों के निशाने पर हैं। सीएमएस गोमती नगर की छुट्टी होने के बाद स्कूली बच्चों के साथ छिनैती और बदसलूकी आम बात होती जा रही है। इस मामले में स्कूली बच्चों और उनके परिजनों की तरफ से स्कूल प्रशासन और क्षेत्रीय थाने में भी शिकायत की जा चुकी है लेकिन शोहदों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इस कारण स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिजनों की चिन्ताएं बढ़ गई हैं।
सीएमएस गोमती नगर में पढऩे वाले दो बच्चों के साथ हाल के दिनों में दो बड़ी घटनाएं हुईं, जिसने स्कूल प्रशासन की मुस्तैदी और राजधानी पुलिस का बदमाशों में खौफ होने की पोल खोल कर रख दी है। इससे सीएमएस में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले परिजनों के सामने अपने बच्चों के सुरक्षा की चिन्ता सताने लगी है। विकास खण्ड सेक्टर चार निवासी अखिलेश श्रीवास्तव के मुताबिक सीएमएस में बच्चों को पढ़ाना और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी परिजनों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सीएमएस गोमतीनगर के बाहर सारा दिन क्षेत्रीय शोहदों का आतंक फैला रहता है। छह से आठ की संख्या में स्कूल के आस-पास रास्ते में खड़े होकर स्कूल की लड़कियों पर कमेंट करने और छात्रों से जबरन छीना झपटी और मारपीट करने वाले शोहदों से हर कोई त्रस्त है। हाल ही में सीएमएस की दसवीं कक्षा में पढऩे वाला उनका बेटा निलय भी शोहदों का शिकार हो गया था। उसने छात्राओं के साथ छेडख़ानी करने वाले लडक़ों का विरोध किया था। बस इसी बात को लेकर शोहदे निलय पर टूट पड़े और उसको बुरी तरह पीटा। इसमें उनका बेटा बुरी तरह घायल हो गया। इसकी शिकायत गोमतीनगर थाने में की गई लेकिन पुलिस ने शोहदों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इससे शोहदों का मनोबल और बढ़ गया। इसी प्रकार 21 सितंबर को सीएमएस में पढऩे वाली एक छात्रा का अपहरण कर लिया गया। इसके बाद उसके साथ रेप करने का प्रयास किया गया लेकिन लडक़ी ने किसी प्रकार खुद को बचा लिया और अपने घर पहुंची। इस मामले में भी गोमतीनगर थाने में शिकायत की गई लेकिन पुलिस ने दोषियों को तलाशने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की कोशिश नहीं की है।
दरअसल इन शोहदों के बारे में स्कूल प्रशासन और क्षेत्रीय पुलिस को पूरी जानकारी है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। इतना ही नहीं स्कूल प्रशासन को स्कूली बच्चों की सुरक्षा की नहीं बल्कि अपने नाम की चिन्ता सता रही है। इस कारण स्कूली बच्चों पर अपने साथ होने वाली छिनैती, छींटाकशी और मारपीट की घटनाओं में पुलिस में शिकायत नहीं करने का दबाव बनाया जाता है। यदि कोई छात्र-छात्रा अपने साथ होने वाली घटना के बारे में थाने में शिकायत दर्ज करवाता है, तो उसको तमाम तरह के तर्क देकर केस वापस लेने के लिए कहा जाता है। दरअसल सीएमएस के बाहर शोहदों का आतंक को एक नमूना मात्र है। इसी तरह शहर के अनेकों स्कूलों, संस्थाओं के बाहर सडक़ों और चौराहों पर भी शोहदों का आतंक है। इनके बारे में माडर्न कंट्रोल रूम में बैठी पुलिस को अच्छी खासी जानकारी रहती है, जिसका सबसे अच्छा माध्यम शहर भर में लगे सीसीटीवी कैमरे हैं। इसके बावजूद बदमाशों और शोहदों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। पुलिस वालों की सक्रियता थाने में रिपोर्ट दर्ज होने या कंट्रोल रूम में शिकायत पहुंचने के बाद ही दिखती है। वह भी अगर समय से कार्रवाई हो जाये, तो बहुत बड़ी बात है। पुलिस वाले चौराहों पर, स्कूलों के बाहर और अन्य संस्थानों के बाहर खड़े शोहदों पर निगाह रखने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाते हैं। इनकी पेट्रोलिंग चौराहों, बाजारों और गलियों में न होकर खास दुकानों और प्रतिष्ठानों के बाहर होती है। इसी वजह से शोहदों और बदमाशों में पुलिस का रसूख खत्म होता जा रहा है। शोहदों को अच्छी तरह मालूम होता है कि घटना को अंजाम देने के बाद कोई कंट्रोल रूम में फोन भी करेगा, तो पुलिस वाले समय पर नहीं पहुंचेगे। इसलिए वह बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम देते हैं। इसके बाद आसानी से बचकर निकल भी जाते हैं। इन दिनों राजधानी में मार्निंग वाक और इवनिंग वाक करना भी खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में अपने बच्चों और अपनी जान को लेकर राजधानी के लोगों का फिक्रमंद होना जायज है।

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