सिर्फ मैगी पर मच-मच क्यों?

sanjay sharma editor5इसी तरह 2013 में बड़ोदा के एमएस विश्वविद्यालय द्वारा की गई स्टडी में अनाज, दही, और फलों में कैडमियम खतरे के स्तर से अधिक पाया गया। ये दोनों धातुएं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। बात अगर उत्तर प्रदेश की करें तो यहंा मुह की बीमारी यानी कि मुह का कैंसर त्राही-त्राही मचाए हुए है। गुटखा से हर तीसरा व्यक्ति ग्रास्ति है।

सिर्फ दो मिनट में तैयार हो जाने वाली मैगी नूडल्स को भारत के कई राज्यों में बैन कर दिया गया। मैगी पर बैन इसलिए लगाया गया है कि उसमें खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं नहीं मिली। मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि सिर्फ मैगी सुरक्षा मानकों पर खरी नहीं उतरी और बाकी के सभी प्रोडक्ट सुरक्षा मानकों को पूरा कर रहे हैं। मुंबई में बिकने वाला 64 फीसदी खुला तेल मिलावटी होता है। यह बात पिछले साल भारतीय उपभोक्ता मार्गदर्शक सोसाइटी की एक स्टडी में सामने आई थी।
स्टडी के दौरान तेलों के 291 सैंपल टेस्ट किए गए थे, जिनमें तिल का तेल, नारियल का तेल, सोयाबीन का तेल, मूंगफली का तेल, सरसों का तेल, सूरजमुखी का तेल, बिनौला तेल भी शामिल हैं। इसके अलावा अनाज, दालों, सब्जियों, मूलों, कंदों में आर्सेनिक खतरनाक स्तर से अधिक पाया गया। इसी तरह 2013 में बड़ोदा के एमएस विश्वविद्यालय द्वारा की गई स्टडी में अनाज, दही और फलों में कैडमियम खतरे के स्तर से अधिक पाया गया। ये दोनों धातुएं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। बात अगर उत्तर प्रदेश की करें तो यहंा मुह की बीमारी यानी कि मुह का कैंसर त्राही-2 मचाए हुए है। गुटखा से हर तीसरा व्यक्ति ग्रसित है। पीने का पानी में आर्सेनिक प्रचुर मात्रा में हैं जिससे पेट की बीमरियां तेजी से फैल रही है। आखिर इस तरफ सरकार का ध्यान क्यों नहीं आ रहा । यही नहीं अंडा भी खतरनाक है इस पर बैन क्यों नहीं लगाया जा रहा । भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान द्वारा 2013 में की गई स्टडी के मुताबिक, यूपी के बरेली के अलावा देहरादून, इज्जतनगर कस्बों में 28 फीसदी अंडे ईकोलाई से दूषित थे और पांच फीसदी मल्टी-ड्रग प्रतिरोधी साल्मोनेला बैक्टीरिया से ग्रस्त मिले। सवाल ये है कि अगर इन सारे प्रोडक्ट में भी खतरनाक रसायन मौजूद हैं और वह जानलेवा हो सकते हैं तो फिर मैगी ही सुर्खियों में क्यों हैं? दरअसल, इसकी लोकप्रियता के कारण मैगी का मामला तेजी से जरूरत से ज्यादा उछला है, क्योंकि कई सारे राज्यों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया है और इसके चलते नेस्ले इंडिया अपने इस उत्पाद को भारतीय बाजारों से वापस ले रही है। इसलिये सोचना यह होगा कि क्या सिर्फ मैगी पर बैन लगा देना काफी है या फिर इस दिशा में जनजाग्रता अभियान छेडऩा।

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