सिर्फ दस दिन का इंतजार दशहरी आम आप के पास

फलों की तुड़ाई व प्रबन्धन में जुटने लगे बागवान
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
Captureलखनऊ। फलों के राजा आम की प्रमुख प्रजाति दशहरी 10 दिन बाद देश की प्रमुख मण्डी आजादनगर दिल्ली मे अपनी छटा बिखेरते हुए बिक्री के लिए पहुंचेगी। बागवान दशहरी की टूट शुरू करने के लिए तैयारियां करने में जुट गये हैं। किसानों के मुताबिक इस वर्ष आगामी पांच जून के बाद डाल की पकी हुई दशहरी मण्डी में आने की संभावना है।
आगामी एक जून से आम के कारोबारी बिक्री के लिए दशहरी आम दिल्ली मण्डी भेजना शुरू करेंगे। आम की मुख्य अगेती प्रजाति दशहरी अपने रंग, रूप, सुगन्ध व लाजवाब स्वाद के लिए काफी प्रसिद्ध है। इस वर्ष मौसम की मार झेलने के कारण आम का उत्पादन केवल 40 प्रतिशत ही है। ऐसे में माना जा रहा है कि दशहरी 30 से 35 रुपये किलो के बीच बिकेगी। दशहरी के शौकीन बाजार में इसके आने की प्रतिक्षा कर रहे हैं। दिल्ली की मण्डी में आम भेजने के लिए यहां के फ्रूट कमीशन एजेंट व ट्रांसपोर्टर अपनी दुकानें सजा चुके हैं। इनके माध्यम से व्यापारी या आम उत्पादक दशहरी को लकड़ी व गत्ते की पेटियों मे पैक कर ट्रकों के माध्यम से मण्डी पहुंचाते हैं। जहां आम के आढ़ती आम की बिक्री कर उसका बीजक व बचत की धनराशि क्षेत्र के एजेन्ट के माध्यम से बागवान को पहुंचा देते हैं। सबसे पहले शुरू होने वाली इस मण्डी में ही बागों की पहली टूट का आम बिक्री के लिए पहुंचता है।
दिल्ली की इस मण्डी की शुरूआत के 10 दिन बाद क्षेत्र की मण्डियों के साथ प्रदेश की विभिन्न मण्डियां खुल जाती हैं। इनके खुलते ही आम उत्पादक व व्यवसायी यहां से लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, सहारनपुर, इटावा, सण्डीला, झांसी व गाजियाबाद सहित अनेक जिलों की मण्डियों व विभिन्न प्रान्तों की मण्डियों में बिक्री के लिए आम का निर्यात करते हैं। विदेशों में आम का निर्यात बढ़ाने के लिए मण्डी परिषद ने भी इस बार अपने हाथ आगे बढ़ाये हैं। आम उत्पादक पिन्नू यादव, नंदू विश्वकर्मा, फहीम उल्ला खां, सतीश यादव का कहना हैं कि आम के निर्यात की दिशा में सरकारी स्तर से कोई प्रयास नहीं किये गये। अगर आम उत्पादकों को आम के विपणन, तुडाई, प्रबन्धन व पैकेजिंग पर सरकारी अनुदान या अन्य सुविधाएं बागवानों व व्यापारियों को मिले तो आम का यह कारोबार अधिक लाभकारी हो सकता है। सरकारी उपेक्षा का दंश झेल रहे बागवान प्रति वर्ष निराशा की ओर ही अग्रसर हो रहे हैं। क्योंकि कुदरत की मार के साथ बिक्री के लिए मण्डियों तक आम को पहुंचाने में बागवान को भारी खर्च उठाने पड़ते हैं।
रेलवे स्टेशन पर नहीं है आम भेजने की व्यवस्था
पद्मश्री हाजी कलीम उल्ला खां खां का कहना है कि इस प्रसिद्ध मलिहाबाद आम फलपट्टी क्षेत्र के रेलवे स्टेशन से विभिन्न स्थानों पर आम को भेजने की कोई व्यवस्था नही है। दिल्ली सहित देश के प्रमुख नगरों में जाने वाली ट्रेनों में एक डिब्बा माल वाहक का जोडक़र क्षेत्र से आम के विपणन की सुविधा की जानी चाहिए।

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