सिर्फ तोंद कम करने के लिये न करें योग…

क्या योग को तमाम परंपराओं से अलग किया जा रहा है? मेरा मुस्लिम समाज के लोगों से भी यही कहना है कि योग पर बेवजह उंगलिया उठाना बंद करें। ऐसे बहुत से मुस्लिम देश हैं जहां सूर्य नमस्कार भी होता है और अनुलोम विलोम भी।

sanjay sharma editor5जिस प्रकार से योग पर बहस छिड़ी है और इसे एक मुद्ïदा बना दिया गया है उसे देखकर यही लगता है कि आने वाले दिनों में लोगों के जीवन से जुड़ी दूसरी चीजों को भी मुद्ïदा बनाया जाएगा। कोई सूर्य नमस्कार को धर्म के खिलाफ देख रहा है तो किसी की नजर में इसे न करने वालों को समुंदर में फेंक देने की वकालत की जा रही है। आज चैनलों पर हिन्दू बनाम मुस्लिम के दायरे में योग को लेकर बहस हो रही है क्योंकि इससे राजनीति सधती है। योग आपको किसी दल के अधीन नहीं करता है। योग के नाम पर किसी धार्मिक राजनीतिक विचारधारा का प्रोपेगैंडा नहीं किया जाना चाहिए।
योग की उत्पत्ति धर्म की आधुनिक समझ पर छपी किताबों के किसी भी पन्ने से नहीं होती है। आज योग को भारतीयता की पहचान बताते हुए हिन्दुत्व से जोडऩे की कोशिश की जा रही है। पहले हिन्दुत्व और भारतीयता को एक कहा गया अब योग के बहाने भारतीयता की बात हो रही है। जबकि योग का कभी दावा नहीं रहा कि वो किसी की सत्ता को बनाए या बचाए रखने के लिए साधन बनेगा। हमें पूछना चाहिए कि क्या हम योग के स्वरूप को जानते हैं।

ट्विटर पर हैशटैग चला देने या हठयोग के एक दो आसनों का प्रदर्शन कर सबको चैंका देना योग नहीं है। योग को लेकर कितनी सार्थक दार्शनिक बहस हो सकती थी लेकिन इसे आसनों के पैकेज में बदल दिया गया है। योगी वही चमत्कार करता हुआ दिख रहा है जिसकी चेतावनी योग पर विचार करने वाले महात्माओं ने समय-समय पर जारी की है।
क्या योग को तमाम परंपराओं से अलग किया जा रहा है? मेरा मुस्लिम समाज के लोगों से भी यही कहना है कि योग पर बेवजह उंगलिया उठाना बंद करें। ऐसे बहुत से मुस्लिम देश हैं जहां सूर्य नमस्कार भी होता है और अनुलोम विलोम भी। योग खुद को स्वस्थ रखने का जरिया है इससे आगे-पीछे, दायें-बायें कुछ नहीं। जिसको जिस प्रकार से इसे परिभाषित करना है वह करे इससे योग के ऊपर कोई फर्क नहीं पडऩे वाला है। यह योग की ही ताकत है कि आज पूरी दुनिया योग की दीवानी है और तेजी से इसकी ओर आकर्षित हो रही है। किसी एक व्यक्ति विशेष से इस योग का लेना देना नहीं है। इसलिए योग की व्यापकता को आप किसी दल या किसी धर्म की पहचान से मत जोडिय़े। योग कीजिए मगर सिर्फ तोंद पिचकाने के लिए नहीं बल्कि आत्मा और परमात्मा को जानने के लिए भी।

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