सिरदर्द बना प्रदर्शन

प्रदेश की राजधानी लखनऊ का दिल यानी हजरतगंज प्रदर्शनकारियों का अड्डा बनता जा रहा है। यहां चार दिन से लगातार हजारों की संख्या में लोग अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर इकट्ठा हो रहे हैं। इस वजह से यातायात व्यवस्था बुरी तरह ध्वस्त हो गई है। सडक़ों पर कूड़ा-कचरा, सार्वजनिक शौचालयों के अंदर और बाहर गंदगी पसरी हुई है। रोजाना धरना-प्रदर्शन और जाम की खबरों से आजिज आकर लोगों ने हजरतगंज आना बंद कर दिया है।

sanjay sharma editor5हजरतगंज में रोजाना किसी न किसी संगठन, विभाग या समुदाय की तरफ से होने वाला प्रदर्शन आम जनता के लिए सिरदर्द बन गया है। प्रदर्शन में जुटने वाली भीड़ और उसकी वजह से लगने वाले जाम ने लोगों का सुख-चैन छीन लिया है। इस इलाके में धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालना प्रतिबंधित होने के बावजूद हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होने में कामयाब हो रहे हैं। इसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अलावा प्रशासन कुछ और कर पाने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसे में आम जनता को हजरतगंज में होने वाले प्रदर्शनों, उसकी वजह से लगने वाले जाम से मुक्ति दिलवा पाना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
प्रदेश की राजधानी लखनऊ का दिल यानी हजरतगंज प्रदर्शनकारियों का अड्डा बनता जा रहा है। यहां चार दिन से लगातार हजारों की संख्या में लोग अपनी-अपनी समस्याओं को लेकर इकट्ठा हो रहे हैं। इस वजह से यातायात व्यवस्था बुरी तरह ध्वस्त हो गई है। सडक़ों पर कूड़ा-कचरा, सार्वजनिक शौचालयों के अंदर और बाहर गंदगी पसरी हुई है। रोजाना धरना-प्रदर्शन और जाम की खबरों से आजिज आकर लोगों ने हजरतगंज आना बंद कर दिया है। अब केवल नौकरी, पढ़ाई और इलाज की वजह से लोग मजबूरन हजरतगंज क्षेत्र में आते हैं। यदि ऐसे लोग जाम में फंसते हैं, तो खुद को कोसने में गुरेज नहीं करते हैं। वहीं राजधानी के अलग-अलग थानों की पुलिस और प्रशासन के कई महत्वपूर्ण अधिकारियों का सारा दिन धरना-प्रदर्शन करने वालों को संभालने में बीत जाता है। आलम ये है कि प्रदर्शन कारियों की भीड़ से उत्साहित होकर छोटे-छोटे संगठनों और मोहल्ले के लोग भी अपनी समस्याओं को लेकर जीपीओ पहुंचने लगे हैं। ऐसा लग रहा है, मानो प्रदेश के सरकारी विभागों में लोगों की समस्याओं का निस्तारण ही नहीं हो पा रहा है। इस वजह से लोग न्याय की आस में लखनऊ पहुंच रहे हैं। दरअसल हर समस्या का समाधान पाने और सरकार के अपनी मांगे मनवाने के लिए हजरतगंज जीपीओ और विधानसभा के सामने प्रदर्शन करने का चलन खतरनाक है। इससे आम जनमानस बुरी तरह प्रभावित होता है। स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों पर बुरा असर पड़ता है। स्कूली बच्चों को भी समस्या होती है। जो बिल्कुल भी सही नहीं है।
सवाल यह है कि हजरतगंज में धरना-प्रदर्शन और जुलूस प्रतिबंधित होने के बावजूद क्यों हो रहा है। प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी धारा 144 का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा है। यदि भीड़ से गंज क्षेत्र में रोजाना जाम लगता है, तो लोगों को गंज पहुंचने से पहले ही रोकने का प्रबंध क्यों नहीं किया जा रहा । ये तमाम सवाल गंभीर हैं। प्रशासनिक अधिकारियों को हजरतगंज में इकट्टा होने वालों को रोकने का ठोस प्रबंध करना होगा, नहीं तो लखनऊ धरनों की राजधानी बन जायेगा।

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