सिंधु नदी जल समझौता और पाक को सबक

अहम सवाल यह है कि भारत ऐसा करके पाकिस्तान को क्या संदेश देना चाहता है? भारत का यह कदम क्या पुरानी विदेश नीति को छोडक़र आगे बढऩे का संकेत है? क्या भारत सरकार जैसे को तैसा, वाले रास्ते पर चलने की तैयारी कर रही है? क्या इस नीति से पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को संचालित करना छोड़ देगा या वह निराशा में और भी आक्रामक हो जाएगा?

sajnaysharmaआतंकवाद के मुद्दे पर कूटनीतिक रूप से पाकिस्तान को घेरने के बाद अब भारत सिंधु नदी जल समझौते के तहत अपने हिस्से के पानी का पूरा इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए केंद्र सरकार ने उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की पहली बैठक में पंजाब और जम्मू-कश्मीर में सिंधु नदी पर बनने वाले बांध और नहर निर्माण पर विचार-विमर्श किया। माना जा रहा है कि यदि भारत ने ऐसा किया तो पड़ोसी देश में पानी की किल्लत हो जाएगी। अहम सवाल यह है कि भारत ऐसा करके पाकिस्तान को क्या संदेश देना चाहता है? भारत का यह कदम क्या पुरानी विदेश नीति को छोडक़र आगे बढऩे का संकेत है? क्या भारत सरकार जैसे को तैसा, वाले रास्ते पर चलने की तैयारी कर रही है? क्या इस नीति से पाकिस्तान आतंकी गतिविधियों को संचालित करना छोड़ देगा या वह निराशा में और भी आक्रामक हो जाएगा? सवाल यह भी है कि क्या ऐसा कर भारत समझौते को तोडऩा चाहता है? हकीकत यह है कि ऐसा कर भारत एक तीर से कई निशाना साधने की कोशिश कर रहा है। वह एक ओर पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहता है तो दूसरी ओर अपने राष्टï्रीय हितों को पूरा भी करना चाहता है। यही वजह है कि वह सिंधु नदी जल समझौते के दायरे में अपने हिस्से के पानी का पूरा इस्तेमाल करने की योजना बना रहा है, जिससे जम्मू-कश्मीर में पनबिजली परियोजना बनाई जाएगी। सिंधु, झेलम व चेनाब नदी के पानी का संग्रह बड़े जलाशयों में किया जाएगा और सिंचाई के लिए नहरें बनायी जाएंगी। इससे पंजाब, जम्मू कश्मीर और आसपास के राज्यों के किसानों को न केवल सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा बल्कि यहां पेयजल की किल्लत भी खत्म हो जाएगी। जलाशयों में संग्रहित पानी का इस्तेमाल सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी किया जा सकेगा। भारत-पाक ने सिंधु जल समझौते पर 1960 में हस्ताक्षर किए थे। इसके तहत रावी, व्यास व सतलज का पानी भारत और सिंधु, झेलम व चेनाब का 80 फीसदी पानी पाकिस्तान के हिस्से में आया। भारत का तर्क है कि उसने अपने हिस्से के 20 फीसदी पानी का पूरा इस्तेमाल नहीं किया है। यही नहीं समझौते के अनुसार भारत पश्चिमी नदियों के पानी को भी अपने इस्तेमाल के लिए रोक सकता है। यदि इस योजना पर काम होता है तो इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। वहीं भारत को इसका फायदा मिलेगा। यही वजह है कि पाकिस्तान ने हाल में इस मुद्दे पर संयुक्त राष्टï्रसंघ से हस्तक्षेप का अनुरोध किया था। लेकिन वह समझौते के दायरे में भारत को अपने हिस्से के पानी के इस्तेमाल से रोक नहीं पाएगा। पाकिस्तान को समझना होगा कि भारत अब शत्रु देश के लिए अपने हितों का बलिदान नहीं कर सकता है। । कम से कम शत्रुता करने वाले देश के साथ कोई रियायत तो नहीं ही कर सकता है।

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