सालों से गायब आईएएस अब बर्खास्त होना शुरू

वीकएंड और 4 पीएम के संपादक संजय शर्मा की पहल लाई रंग

दो साल पहले संजय शर्मा ने हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल करके कहा था देश भर से गायब हैं सैकड़ों आईएएस, इन्हें किया जाए बर्खास्त
संजय शर्मा के पत्र पर केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त ने केन्द्र सरकार और डीओपीटी को दिए थे कार्रवाई के आदेश
सीवीसी की जांच के बाद अब केन्द्र सरकार ने उठाने शुरू किए कड़े कदम
यूपी के पांच आईएएस बर्खास्त, कई बर्खास्तगी के कगार पर

S1 प्रीति सिंह
लखनऊ। अगस्त 2013 में जब वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मांग की थी कि देश भर से 200 से ज्यादा आईएएस सालों से गायब हैं, इनको बर्खास्त किया जाना चाहिए, तब किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि श्री शर्मा की यह शुरुआत कितना बड़ा रूप ले लेगी। हाईकोर्ट ने भले ही यह पीआईएल सर्विस मैटर कहकर खारिज कर दी, मगर श्री शर्मा इससे निराश नहीं हुए। उन्होंने देश के केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त से मिलकर कहा कि इस तरह सैकड़ों आईएएस का बिना बताए गायब होना देश के लिए खतरनाक है। उनकी बात को गंभीरता से लेते हुए सीवीसी ने केंद्र सरकार और डीओपीटी को इस मामले की गंभीरतापूर्वक जांच करने और कार्रवाई के आदेश दिए। इसी का नतीजा है कि जब यह जांच पूरी हुई तो केन्द्र सरकार को समझ आया कि जो अफसर बिना बताए गायब हैं उन्हें नौकरी करने का कोई हक नहीं है। लिहाजा अब ऐसे आईएएस अफसरों को बर्खास्त किया जा रहा है।
इस मामले की शुरुआत तब हुई थी जब नौ साल बाद अचानक एसपी सिंह विदेश से लौटे थे और सरकार ने उन्हें पांच-पांच विभागों का काम सौंप दिया था। इस पर संजय शर्मा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और कहा था कि इतने साल बाद लौटने पर पहले दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए थी। यह मामला देशभर में सुर्खियों में आ गया था क्योंकि श्री शर्मा ने आईएएस सेवा नियमावली में बदलाव की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इसे सर्विस मैटर मानकर पीआईएल खारिज कर दी थी।
इसके बाद सभी दस्तावेजों के साथ श्री शर्मा ने केन्द्रीय सतर्कता आयुक्त से शिकायत की और उन्होंने जांच के आदेश दे दिए। इसी पीआईएल के बाद देश भर में इस पर चर्चा होनी शुरू हो गई थी। सभी लोगों का मानना था कि यह एक सही कदम है और आईएएस अफसरों पर कार्रवाई होनी ही चाहिए।
केन्द्र सरकार ने कल आईएएस अतुल बगाई और संजय भाटिया को निलंबित कर दिया। यह दोनों अफसर प्रदेश के सूचना निदेशक रह चुके हैं। अतुल बगाई की पत्नी तो विदेश में चोरी करने के कारण चर्चा में भी रही थी। इससे पहले शिशिर प्रियदर्शी, रीता सिंह और अरुण आर्या को भी बर्खास्त किया जा चुका है।
यह अफसर विदेश में स्टडी लीव या किसी अन्य कार्यक्रम में कुछ दिन के लिए भाग लेने जाते हैं और फिर लौट कर नहीं आते और विदेश में ही अपना काम शुरू करते हैं या फिर व्यापार शुरू कर देते हैं। सालों बाद यह अचानक लौटते हैं और उन पर कार्रवाई करने की जगह सरकार उनकी सालों की तनख्वाह भी दे देती है।

प्रधानमंत्री भी अब भ्रष्टï आईएएस के पेंच कसने के मूड में
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आईएएस अफसरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाकर भ्रष्टïाचार को रोकने की एक शुरुआत की है। उन्होंने सभी मंत्रालयों को आदेश दिया है कि आईएएस अधिकारियों से जुड़े भ्रष्टïाचार के मामलों की मासिक आधार पर समीक्षा करें ताकि उनके रिटायर होने से पहले ही उन पर कार्रवाई की जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा है कि ऐसा कई बार पाया गया है कि डीओपीटी के पास मंत्रालय से भ्रष्टï आईएएस अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाही शुरू करने का प्रस्ताव उक्त अधिकारियों की सेवा निवृत्ति के समय प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री ने कल युवा आईएएस अफसरों से भी कहा कि भ्रष्टïाचार के वायरस के खिलाफ अपने अंदर प्रतिरोधी क्षमता पैदा करें। उन्होंने कहा कि आम आदमी आईएएस अफसरों से बदलाव की बड़ी आशा रखता है। ऐसे में अगर आईएएस अफसर भ्रष्टïाचार में फंसेगा तो उससे न्याय की आशा रखना बेकार हो जाएगा। पीएम मोदी के इन तेवरों से आईएएस लॉबी में हडक़ंप मचा हुआ है। अफसरों को अब यह चिंता सता रही है कि अगर वह तुरन्त लौट भी आए तब भी उनके खिलाफ कार्रवाही होगी।

हाईकोर्ट में मेरी पीआईएल से पहले विद्धान जजों ने लगभग पचास मिनट उस पीआईएल पर चर्चा की जिसमें मांग की गई थी कि सेना में अफसरों को पांच बोतल और जवान को दो बोतल शराब दी जाती है। दोनों को बराबर दी जानी चाहिए। मेरी पीआईएल पांच मिनट में यह कहकर खारिज कर दी गई कि यह सर्विस मैटर है। मुझे दु:ख जरूर हुआ क्योंकि मैंने अपनी याचिका में लिखा था कि एक साल अनुपस्थित रहने पर मामूली क्लर्क को नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है और जिन पर देश चलाने की जिम्मेदारी है वह सालों तक गायब रहते हैं, मगर उनके खिलाफ कोई कार्रवाही नहीं होती। मगर मैं याचिका खारिज होने पर निराश नहीं हुआ और मुझे खुशी है कि सीवीसी को दिए गए दस्तावेजों के बाद अब केंद्र सरकार ने वह फैसला लिया है जो सालों पहले ले लेना चाहिए था।
संजय शर्मा, संपादकवीकएंड टाइम्स/4पीएम

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