सारे फर्जी डिग्री वाले मंत्री जायें जेल

मोदी सरकार बनने के बाद सबसे पहला विवाद स्मृति ईरानी को लेकर ही हुआ। उन्होंने दो अलग-अलग शपथपत्रों में अपनी शैक्षिक योग्यता अलग-अलग भरी। लोग समझ ही नहीं पाये कि इसमें कौन सा शपथपत्र सही है।

sanjay sharma editor5दिल्ली पुलिस ने बहुत ठीक काम किया। उन्होंने कानून मंत्री को फर्जी डिग्री रखने के आरोप में जेल भेज दिया। यह सही फैसला इसलिये ठीक नहीं था कि जब संविधान बनाने वाले लोग ही फर्जी काम करेंगे तो फिर न्याय की आशा किससे की जा सकती है। मगर साथ ही सवाल यह भी है कि क्या सारी ज्यादती एक ही व्यक्ति पर की जायेगी या फिर न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुये सभी ऐसे लोगों को जेल भेजा जायेगा जो इस तरह की फर्जी डिग्री का इस्तेमाल करते हैं। मैं समझ नहीं पा रहा कि एक साल होने को आ गया मगर अपने देश की मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी की डिग्री कोई चेक नहीं कर सका। आखिर उन्हें यह विशेषाधिकार की छूट कब और किसने दी। अगर स्मृति ईरानी की डिग्री चेक नहीं हो सकती तो किसी को अधिकार नहीं है कि वह किसी दूसरे मंत्री को इसी आरोप में जेल भेज दे।
मोदी सरकार बनने के बाद सबसे पहला विवाद स्मृति ईरानी को लेकर ही हुआ। उन्होंने दो अलग-अलग शपथपत्रों में अपनी शैक्षिक योग्यता अलग-अलग भरी। लोग समझ ही नहीं पाये कि इसमें कौन सा शपथपत्र सही है। उनका मामला भी पुलिस तक पहुंचा मगर स्मृति ईरानी के रसूख के आगे मानो सारे तर्क कुतर्क में बदल गये और किसी की हिम्मत नहीं हुई कि वह स्मृति ईरानी पर हाथ डाल सके। यह न्याय के खिलाफ है और यह साबित करता है कि ताकतवर लोगों के आगे सब कुछ छोटा हो जाता है।
जिस तरह से मोदी सरकार केजरीवाल पर लगातार हमले कर रही है उससे सबको पता चल गया है कि केंद्र की सरकार दिल्ली सरकार पर किस हद तक खफा है। इसमे कोई दोराय नहीं कि अगर कानून मंत्री ने गलती की है तो उन्हें जेल जाना ही चाहिये। मगर जब स्मृति ईरानी को बचाकर आम आदमी पार्टी के नेताओं को जेल भेजा जायेगा तो यह सवाल किसी के भी जेहन में उठेगा कि यह एकतरफ कार्रवाई क्यों और किसके कहने पर हो रही है।
अच्छा हो स्मृति ईरानी की डिग्रियों की भी लगे हाथ जांच करा ली जाये और अगर उनकी डिग्रियां भी फर्जी निकलें तो उनके साथ भी वही हश्र होना चाहिये जो ‘आप’ के कानून मंत्री का हुआ।

Pin It