सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा

कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों की अलग-अलग भाषा है। अलग-अलग पहनावे हैं मगर सबके दिल में एक बात सामान्य रूsanjay sharma editor5प से धडक़ती है वो ये है कि ये देश उनका है और वो इसके लिये जान भी दे सकते हैं। कारगिल युद्ध इसका उदाहरण है। जब एक शहीद का शव किसी भी शहर में आया तो मानो पूरा शहर उसको सम्मान देने के लिये उमड़ पड़ा।

आजादी की साल गिरह की पूर्व संध्या पर आप सभी को ढेर सारी बधाई। हम गौरवान्वित हैं कि हम ऐसे देश में पैदा हुये हैं जो देश पूरी दुनिया में प्यार और भाईचारे की ऐसी दास्तां लिख चुका है जिसकी दूसरी मिशाल दुनिया में कहीं नहीं देखी जा सकती। भारत ही दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जो इतनी विविधिता लिये हुये है और अपने आंचल में दुनिया का सारा प्यार समेटे हुये है।
मेरे एक मित्र हैं। लगातार पाश्चात्य देशों की तारीफ करते रहते हैं। उनका रोना है कि हमारे यहां गरीबी बहुत है। हमारे यहां सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता और मूलभूत समस्यायें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मैंने पिछले दिनों अपने दफ्तर के बाहर कच्ची ईंटें रख कर अस्थाई तौर पर बने एक शेड को अपने मित्र को दिखाया। इस शेड में पेड़ की छांव में काम कर रहा नौजवान धोबी अपनी पत्नी और बेटी के साथ रोज दोपहर को खाना खाता और फिर काम पर जुटता नजर आता है। इस परिवार के बीच प्यार की जो डोर सबको दिखती है वह बेमिसाल है।
मैंने अपने मित्र को इस टूटी हुई झोपड़ी से भी खराब हालत की तस्वीर दिखाई और कहा कि आपसी प्यार के ये धागे ही हमारे देश में रिश्तों को और समाज को जोड़े रहते हैं। इतनी भीषण गर्मी में एक छोटी सी छांव के नीचे बैठे ये पति-पत्नी और उनकी नन्हीं सी बेटी रिश्तों की ऐसी डोर बांधती नजर आती हैं जिसकी दूसरी मिसाल नहीं मिलती।
मैंने उनसे कहा कि पश्चिम के देशों में किसी भी रिश्ते में विश्वास नहीं है। पति पत्नी से मानसिक रूप से अलग है तो बच्चे परिवार से। हमारा देश ऐसा देश है जहां हम न सिर्फ अपने परिवार की बल्कि अपने पड़ोसियों की भी चिंता करते हैं। जो हम पर उपकार करता है उसे हम देवता मानकर पूजते हैं। चाहे वो पशु-पक्षी हों या फिर पेड़। हमको अमृत पिलाती मां गंगा हमारी आत्मा का हिस्सा है।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोगों की अलग-अलग भाषा है। अलग-अलग पहनावे हैं मगर सबके दिल में एक बात सामान्य रूप से धडक़ती है वो ये है कि ये देश उनका है और वो इसके लिये जान भी दे सकते हैं। कारगिल युद्ध इसका उदाहरण है। जब एक शहीद का शव किसी भी शहर में आया तो मानो पूरा शहर उसको सम्मान देने के लिये उमड़ पड़ा। यह परम्परा है इस देश की। इस देश के सम्मान की और इस देश के स्वाभिमान की।
आजादी की इस सालगिरह को आइये खुशी और उल्लास से मनायें। संकल्प लें कि सभी लोगों को अपने परिवार का सदस्य समझेंगे। तभी यह देश और महान होगा।

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