साथी की लाश पर मनाते जश्न की खबर से बौखलाए मुख्य सचिव के स्टाफ अफसरकहा नहीं बंटने दूंगा एनेक्सी में पेपर

पत्रकारों और नेताओं ने की तीखी आलोचना कहा, लोकतंत्र पर हमला है इस तरह की कार्यवाही
हिन्दी खबर और लाइव टुडे ने विस्तार से दिखाया कैसे गुंडागर्दी करने पर उतारू है चीफ सेके्रटरी का स्टाफ अफसर

a14पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अब उत्तर प्रदेश के चीफ सेके्रटरी के स्टाफ अधिकारी मीडिया के खिलाफ गुंडागर्दी पर उतारू हो गए हंै। चीफ सेक्रेटरी के स्टाफ के एक प्रोन्नत आईएएस अधिकारी एसएन श्रीवास्तव पिछले दिनों 4 पीएम में छपी एक खबर से इतने नाराज हो गए कि उन्होंने अखबार के हॉकर को न केवल एनेक्सी में अखबार बांटने से मना किया बल्कि उसे बंधक बना लिया। इस दौरान अधिकारी ने हॉकर को गालियां भी दीं। अधिकारी की तानाशाही को हिंदी खबर और लाइव टुडे चैनल पर विस्तार से दिखाया गया। वहीं तमाम राजनीतिक दलों ने न केवल इस घटना की निंदा की है बल्कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश सरकार से संबंधित अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी की है।
न पर भ्रष्टïाचार के तमाम आरोप लग चुके हैं।
दरअसल, पिछले दिनों उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक आईएएस अधिकारी संजीव दुबे ने आत्महत्या कर ली थी। घटना की सूचना पर पूरे देश के आईएएस अधिकारी स्तब्ध रह गए थे। तमाम आईएएस अधिकारी दुबे के आवास पर पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार आलोक रंजन, राजस्व परिषद के अध्यक्ष प्रवीर कुमार और खुद चीफ सेक्रेटरी राहुल भटनागर भी वहां मौजूद थे। लेकिन कुछ देर बाद जो हुआ उसने नौकरशाही को शर्मसार कर दिया था। तमाम अधिकारी नए साल पर चीफ सेके्रटरी की ओर से दी गई दावत में अपनी बड़ी-बड़ी गाडिय़ों से पहुंचे। खुद चीफ सेक्रेटरी ने उनका स्वागत किया। पार्टी को शानदार बनाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गई थी। खाने-पीने का इंतजाम किया गया। तमाम अधिकारियों ने अपने साथी की मौत को भूला कर जमकर जाम छलकाए और संगीत पर थिरके। हालांकि आलोक रंजन से लेकर दीपक सिंघल और प्रवीर कुमार तक कई अफसरों ने इस पार्टी में शिरकत नहीं की। इसकी भनक मिलते ही 4पीएम ने खबर के जरिए अधिकारियों की संवेदनहीनता का पर्दाफाश किया। इस खुलासे से कुछ अधिकारी नाराज हो गए थे।
लिहाजा रोज की तरह शुक्रवार को जब 4पीएम के हॉकर विनय सचिवालय में अखबार बांटने पहुंचे तो एसएन श्रीवास्तव ने उन्हें रोक लिया। उससे कहा कि वह दोबारा अखबार यहां बांटेगा तो उसको जेल भेज दिया जाएगा। एसएन श्रीवास्तव ने हॉकर को करीब डेढ़ घंटे तक बंधक भी बनाए रखा और भद्ïदी-भद्ïदी गालियां भी दीं। इस मामले में जब एसएन श्रीवास्तव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आरोप निराधार हैं। हॉकर को किसी ने पेपर बांटने से नहीं रोका है और न ही उन्हें गाली दी गई है। उन्होंने कहा कि हॉकर को बंधक भी नहीं बनाया गया। मैंने केवल उससे सचिवालय में प्रवेश पत्र मांगा था। इसके बाद उन्होंने फोन काट दिया। बार-बार कोशिश के बाद भी उनका नंबर नहीं उठा।

यह पूरी तरह अनुचित है। अधिकारी को पता होना चाहिए कि उसे किस तरह का व्यवहार करना है। एक अधिकारी के तौर पर यदि वे एक मीडिया के सम्मानित कर्मी के प्रति दुव्र्यवहार कर रहे हैं तो आम आदमी के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। -वैभव माहेश्वरी, आप प्रवक्ता

्एसएन श्रीवास्तव भ्रष्टï अफसर हैं। सात जगहों पर इनके मकान हैं। ऐसे भ्रष्टï अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन हुकूमत ने ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बिठा रखा है। मीडिया के साथ ऐसा व्यवहार किसी प्रकार उचित नहीं है। 4 पीएम की खबर पर इस तरह का व्यवहार लोकतंत्र पर हमला है।
-आईपी सिंह, भाजपा नेता

एसएन श्रीवास्तव प्रमोटेड आईएएस हैं। वे रिटायर हो चुके थे। चीफ सेक्रेटरी को पूरे प्रदेश का लॉ एंड ऑर्डर देखना होता है। ऐसे में इस तरह के अधिकारियों को प्रशासन में रखना सवाल खड़े करता है। आखिर सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है कि तेज तर्रार अधिकारियों की जगह रिटायर कर्मियों को अधिकारी बनाया गया है। सूत्रों ने बताया है कि अधिसूचना जारी होने के बाद डीपीसी के लिए दो से पांच लाख तक की वसूली की गई है।
-संजय शर्मा, संपादक

यह निहायत ही शर्मनाक घटना है। इसको हल्के में बिल्कुल भी नहीं लिया जाना चाहिए। यह सीधे-सीधे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। प्रदेश की राजधानी में बैठा बड़ा अधिकारी यदि ऐसी हरकत करता है, तो छोटे शहरों में अधिकारियों का मीडिया के प्रति क्या रवैया होगा, इसका अंदाजा लगाया जा
सकता है।
-अनूप कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार
यदि किसी भी व्यक्ति को मीडिया से शिकायत है, तो उसे उचित फोरम पर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए। किसी भी सीनियर आईएएस अधिकारी की ऐसी हरकत मीडिया का गला घोंटने जैसी है। इसका पूरी मीडिया को मिलकर विरोध करना चाहिए।
कमाल खान, वरिष्ठ टीवी जर्नलिस्ट

यह घटना बताती है कि यूपी में नेताओं के साथ-साथ नौकरशाह भी बुरी तरह से फ्रस्टेट हैं। उन्हें अपनी पोल खुलने का डर है। इसी वजह से उनकी खामियों और कमजोरियों को उजागर करने वाली मीडिया के साथ अभद्र व्यवहार किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेकर शासन और सरकार को तत्काल ऐसे अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
-ज्ञानेन्द्र शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार

Pin It