सांसदों का धरना

सरकार के खिलाफ भाजपा का बड़ा प्रदर्शन

चार दर्जन से अधिक सांसदों और विधायकों ने खोला प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा
O12017 की तैयारियों में जुटी भाजपा कहा अपने बूते पर बनायेंगे सरकार

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। लम्बे समय के बाद अब भाजपा पूरी तरह से विपक्ष की भूमिका में नजर आने लगी है। आज विधान सभा के सामने दर्जनों सांसदों और विधायकों ने 24 घंटे का धरना शुरू कर दिया है। सांसदों का कहना है कि प्रदेश सरकार लगातार आम आदमी के हितों से खिलवाड़ कर रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी के नेतृत्व में आज बड़ी संख्या में सांसदों ने 11 बजे से विधानसभा के सामने धरना देना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे धरना स्थल पर सांसदों की संख्या बढ़ती चली गयी। ये धरना 24 घंटे के लिए दिया जा रहा है।
सांसद प्रदेश की खराब विद्युत व्यवस्था, विद्युत मूल्य वृद्धि सांसदों एवं जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के विरोध में धरना दे रहे हैं। धरना स्थल पर बैठे सांसदों का कहना है कि सरकार जानबूझ कर भाजपा के सांसदों और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर रही है। जिसे किसी कीमत पर बर्दाशत नहीं किया जा सकता।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। शहरों में और गांव में बिजली नहीं आ रही है। और बिजली विभाग ने बिजली दरों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी कर दी गई है। उन्होंने कहा कि नौकरशाही बेकाबू हो गयी है और जनप्रतिनिधियों का लगातार अपमान किया जा रहा है। अब ये सरकार को खुली चेतावनी है। या तो सरकार सुधर जाये वरना गंभीर परिणाम भुगताने को तैयार रहे।
सांसद ब्रजभूषण सिंह ने कहा कि सरकार ने उसके मंत्रियों ने मर्यादा की हदें लांघ दी हैं। कोई मंत्री पत्रकार को जला देता है तो कोई मंत्री खुले आम नौजवानों को गालियां बकता
है। लगता ही नहीं है कि प्रदेश में कानून का राज है।
सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि प्रदेश की जनता अब इस सरकार से उब गयी है। और भाजपा की तरफ आशा भरी निगाह से देख रही है। भाजपा सांसदों ने कहा कि अब आम आदमी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा।

आखिर भ्रष्टï प्रदीप शुक्ला पर क्यों मेहरबान है सरकार

हजारों करोड़ों का ये घोटालेबाज आईएएस अफसर बना हुआ है नेताओं का दुलारा

सालों गुजारे जेल में और जमानत पर निकलते ही मेहरबान हो गई सरकार

लखनऊ। पता नहीं वह कौन लोग हैं जो सरकार की फजीहत कराने पर तुले हैं। ऐसे समय में जब देश भर में बेइमानों के खिलाफ अभियान चलाने की बात की जा रही है उस समय में हजारों करोड़ों के घोटालेबाज आईएएस प्रदीप शुक्ला पर सरकार मेहरबान हो गई है। सालों जेल में गुजारने के बाद जब इस महाभ्रष्टï आईएएस की जमानत हुई और ये बाहर आया तो रातों रात इसे बहाल करके इसकी तैनाती भी कर दी गई। मीडिया से पूरी जानकारी छुपायी रखी गयी।
प्रदीप शुक्ला ने मायावती सरकार में स्वास्थ्य विभाग और खासतौर से एनआरएचएम में पांच हजार करोड़ से अधिक का घोटाला किया था। इस घोटाले में तीन सीएमओ को अपनी जान भी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद इस मामले में सीबीआई जांच हुई थी। और तत्कालीन मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा समेत प्रदीप शुक्ल और कई अन्य लोगों को भी जेल भेज दिया गया था। जेल जाते ही सरकार फिर मेहरबान हो गई थी और सरकार के ताकतवर मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने
जेल में जाकर प्रदीप शुक्ला से मुलाकात की थी जिसके बाद काफी हंगामा मचा था। इस भ्रष्टï अफसर को इस तरह बहाल करने पर आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने सवाल उठाए हैं उन्होंने मुख्य सचिव से पूछा है कि ऐसे कौन से हालात बन गये जिसके चलते इस भ्रष्टï अफसर को रातों रात बहाल करना पड़ा।

टेंडर प्रक्रिया लागू होगी तभी तो होंगे घोटाले

राजकीय निर्माण निगम के एमडी गोयल के राज में चार हजार करोड़ का हुआ खेल

लखनऊ। एक जमाना था जब राजकीय निर्माण निगम स्वयं सरकारी भवनों का जहां अपने अधिकारियों और कर्मचारियों की देख रेख में निर्माण कराता था वहीं उन भवनों की क्वालिटी भी सामने दिखाई देती थी। लेकिन वर्तमान में एमडी रवीन्द्र कुमार गोयल द्वारा इस विभाग में टेंडर प्रक्रिया प्रारम्भ होने से यह विभाग भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है। हालत यह है कि रवीन्द्र कुमार गोयल के कारण इस विभाग की पारदर्शिता और विश्वास की परम्परा जहां समाप्त हो रही है वहीं दलालों और भ्रष्टाचारियों का बोलबाला है। सूत्रों की मानें तो टेंडर प्रक्रिया होगी तभी तो कमीशनबाजी और घोटाले में वृद्धि होगी।
बता दें कि लोक निर्माण विभाग के बाद सरकार ने राजकीय निर्माण निगम की स्थापना किया। इसका सबसे ज्यादा अहम कारण यह था कि लोक निर्माण विभाग टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से ठेकेदारों द्वारा सरकारी कार्य को कराता था। टेंडर होने से कार्य का अधिकांश धन कमीशनबाजी में चला जाता था। लिहाजा सरकारी कार्य कागजों में ही होने लगे। कभी-कभार सरकारी कार्य होते भी थे तो न ही उनकी क्वालिटी आती थी और न ही कार्य समय से पूरे होते थे। लगातार लोक निर्माण विभाग की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने वर्ष 1975 में राजकीय निर्माण निगम की स्थापना की। इस विभाग का कार्य सरकारी कार्य को तय समय में क्वालिटी के साथ पूरा कराना है। प्रारम्भ के समय में विभाग ने अपना कार्य समय से किया। तय समय में कार्य करने पर जहां विभागीय अधिकारियों के कार्यों की हौसला औफजाई हुई वहीं कार्यों में क्वालिटी भी दिखाई दी। क्योंकि विभाग में टेंडर की प्रक्रिया नहीं थी। जिसके कारण न ही सरकारी धनराशि कमीशनबाजी की भेंट चढ़ती थी और न ही ठेकेदार अपनी मनमानी करते थे। विभाग के अधिकारी स्वयं मौके पर खड़े होकर अपने ही कर्मचारियों से कार्य कराते थे। लेकिन वर्तमान में इस विभाग को भी टेंडर की लत लग चुकी है। एमडी रवीन्द्र कुमार गोयल के समय में टेंडर प्रक्रिया का विस्तार ऐसे हुआ जैसे जंगल में लगी आग पूरी तरह से फैल चुकी हो। श्री गोयल के कार्यकाल में लगभग तीन से चार हजार करोड़ रुपये का टेंडर कर दिया गया। इस टेंडर में जमकर जहां कमीशनबाजी की गई है वहीं भ्रष्टाचार भी हुआ।

गोयल साहब जुटे बेइमानों को बचाने में

इस संदर्भ में श्री गोयल ने कहा कि टेंडर की प्रक्रिया होने से कार्य का रेट सही मिल जाता है। कार्य खराब होता है तो ठेकेदार के ऊपर कार्रवाई की जाती है। इतना ही नहीं ठेकेदार की जमा धनराशि से कटौती भी होती है। टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होती है। टेंडर में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं आती है। उन्होंने बताया कि लगभग तीन से चार हजार करोड़ रुपये का टेंडर किया गया है। सवाल उठता है कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है तो सरकार को एक ही कार्य के लिये दो-दो विभाग क्यों बनाने पड़े।

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