सांप्रदायिक तनाव से सभी पार्टियां उठाती हैं फायदा

पिछले तीन साल से उत्तर प्रदेश में अनेक सांप्रदायिक दंगे हुए हैं। कुछ दंगे बहुत बड़े पैमाने पर पर हुए तो अनेक दंगे छोटे-छोटे पैमाने पर भी हुए। धार्मिक आधारों पर बने संगठनों ने छोटी-छोटी घटनाओं को बड़े-बड़े सांप्रदायिक दंगों में तब्दील कर दिया। कभी किसी लडक़ी छेडऩे का मामला भयानक दंगा में तब्दील हुआ, तो कभी दो शराबियों की लड़ाई ने सांप्रदायिक दंगों का रूप ले लिया, तो कभी मामूली मोटर साइकिल की दुर्घटना के बाद दो संप्रदाय आमने-सामने आकर खून खराबा करने लग गए। 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले समाजवादी पार्टी और उसके नेता मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव व 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले नरेन्द्र मोदी ने वादा किया था कि बेरोजगारों को रोजगार दिया जाएगा।

प्रदीप कपूर
क्या राजनैतिक पार्टियां लोगों की मूल समस्या से जनता का ध्यान हटाने के लिए सांप्रदायिक दंगे कराती हैं? दादरी दंगों के बाद महंगाई, बढ़ती बेरोजगारी, गन्ना के बकायों के भुगतान न हो पाने के कारण किसानों में पनपा आक्रोश और भूमि अधिग्रहण कानून से मोहभंग जैसे मसले मीडिया से गायब क्यों हो गए हैं?
पिछले तीन साल से उत्तर प्रदेश में अनेक सांप्रदायिक दंगे हुए हैं। कुछ दंगे बहुत बड़े पैमाने पर पर हुए तो अनेक दंगे छोटे-छोटे पैमाने पर भी हुए। धार्मिक आधारों पर बने संगठनों ने छोटी-छोटी घटनाओं को बड़े-बड़े सांप्रदायिक दंगों में तब्दील कर दिया। कभी किसी लडक़ी छेडऩे का मामला भयानक दंगा में तब्दील हुआ, तो कभी दो शराबियों की लड़ाई ने सांप्रदायिक दंगों का रूप ले लिया, तो कभी मामूली मोटर साइकिल की दुर्घटना के बाद दो संप्रदाय आमने-सामने आकर खून खराबा करने लग गए।
2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले समाजवादी पार्टी और उसके नेता मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव व 2014 के लोकसभा चुनाव के पहले नरेन्द्र मोदी ने वादा किया था कि बेरोजगारों को रोजगार दिया जाएगा। लेकिन न तो अखिलेश यादव की उत्तर प्रदेश सरकार ने और न ही केन्द्र की मोदी सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा किए, जिसके कारण बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है।
उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी का क्या आलम है, इसका पता उस तथ्य से लगता है कि प्रदेश सरकार ने चपरासी पद की कुछ सौ रिक्तियों का विज्ञापन छापा था और उसके जवाब में 20 लाख से भी ज्यादा लोगों ने उन पदों के लिए आवेदन कर डाला।
आवेदन करने वाले लोगों में पीएचडी करने वाले युवा भी शामिल थे और एमबीए करने वाले पोस्ट ग्रेजुएट भी। भारतीय किसान यूनियन के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में किसानों के आंदोलन होते रहते हैं। प्रदेश की 80 फीसदी आबादी खेती पर ही निर्भर करती है, लेकिन खेती की दशा बहुत ही खराब है और उसके कारण आत्महत्या करने वाले किसानों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है।
गन्ना मिलों पर किसानों के हजारों करोड़ रुपये के बकाये हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को साफ-साफ आदेश किए हैं कि वह किसानों के बकायों का भुगतान कराए, लेकिन वह वैसा करा पाने में विफल है। इतना ही काफी नहीं था। अब लोग भयंकर महंगाई की मार से जूझ रहे हैं। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। सांप्रदायिक दंगों के लिए उत्तर प्रदेश में लोग एक-दूसरे को दोष देने में लगे हुए हैं। भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी इन दंगों के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहरा रही हैं।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और उनके पुत्र मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुलकर इन दंगों के लिए भारतीय जनता पार्टी पर दोष मढ़ रहे हैं। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी इसके लिए समाजवादी पार्टी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
मुजफ्फरनगर दंगों की जांच के लिए विष्णु सहाय आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी है। उसे विधानसभा के पटल पर रखा जाना बाकी है। अखिलेश सरकार को वह रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए और रिपोर्ट में वर्णित दोषियों को सजा दी जानी चाहिए। गौरतलब है कि उस दंगे मे 60 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे और अनेक महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने कहा है कि उन्हें पता है कि जो लोग मुजफ्फरनगर दंगे में शामिल थे, उनमें से तीन लोग दादरी कांड में भी शामिल थे। मुलायम सिंह को उन तीनों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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