सर्जिकल स्ट्राइक सियासत और सबूत

“किसी देश में शायद यह अपनी तरह का पहला मामला है जब उस देश के सियासतदां अपनी ही सेना की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। दरअसल, इसके पीछे कुछ राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। विरोधी दलों की दलील है कि सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक करके मोदी सरकार ने इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की है।”

sanjay sharma editor5पाकिस्तान में घुस कर आतंकियों के खिलाफ भारतीय फौज द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर सियासत गर्म है। विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने न केवल इसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए बल्कि केंद्र सरकार से इसके सबूत भी मांगे। यह दीगर है कि सेना ने इस कार्रवाई का एक वीडियो रक्षा मंत्रालय को सौंप दिया है और इसको सार्वजनिक करने की सरकार से अपील भी की है। सवाल यह है कि आखिर वे कौन सी वजहें हैं जिसके कारण कांग्रेस के संजय निरुपम और आप के अरविंद केजरीवाल भारतीय सेना की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं? क्या वाकई उनको सेना की कार्रवाई पर विश्वास नहीं है या उनके बयान सियासी हैं? क्या इस सियासत से आहत सेना ने तमाम खतरों के बावजूद वीडियो को जारी करने का अनुरोध तो सरकार से नहीं किया है? किसी देश में शायद यह अपनी तरह का पहला मामला है जब उस देश के सियासतदां अपनी ही फौज की कार्रवाई पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। दरअसल, इसके पीछे कुछ राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को प्रमुख वजह माना जा रहा है। विरोधी दलों की दलील है कि सर्जिकल स्ट्राइक को सार्वजनिक करके मोदी सरकार ने इसका राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश की। यह तर्क भी है कि पाक भी भारत के दावे को गलत ठहरा रहा है, लिहाजा केंद्र इसके सबूत अंतरराष्टï्रीय स्तर पर पेश करें। राजनीतिक फायदा उठाने का विपक्षी दलों का तर्क दमदार हो सकता है, लेकिन इसकी आड़ में सेना पर सवाल उठाने को उचित नहीं कहा जा सकता। सियासतदारों को यह भी सोचना चाहिए कि यदि वीडियो सार्वजनिक किया गया तो इससे भारतीय सेना की रणनीति व क्षमता का अनुमान दुश्मन देश लगा सकते हैं। यह देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। यही कारण है कि अमेरिका ने अपनी सेना के कमांडो द्वारा कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन को ऐसे ही एक सर्जिकल स्ट्राइक में मार गिराने का वीडियो आज तक जारी नहीं किया। जहां तक पाक द्वारा सबूत मांगने का प्रश्न है तो इसके पीछे उसकी मंशा कार्रवाई की रिकॉडिंग देखकर प्रतिरोध क्षमता विकसित करने की भी हो सकती है। वैसे भी पाक सबूत मानता कहां है। भारत ने मुंबई व अन्य स्थानों पर हुए पाक समर्थिक आतंकी हमलों के अनगिनत सबूत पाक को दिए लेकिन आज तक वह इन्हें नहीं माना। कुल मिलाकर सियासतदारों को सोच-समझकर सियासत करनी चाहिए वरना उनका कॅरियर खतरे में पड़ सकता है क्योंकि यह पब्लिक है सब जानती है।

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