सर्जिकल स्ट्राइक पहले भी लेकिन माना पहली बार

1भारतीय सेना ने एलओसी पर गुरुवार को सर्जिकल स्ट्राइक कर चरमपंथी ठिकाने नष्ट करने और उन्हें बड़ा नुकसान पहुंचाने का दावा किया। हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन दावों का खंडन किया है। रक्षा विशेषज्ञ अजय साहनी ने बताया कि क्या होती है सर्जिकल स्ट्राइक और भारत की इस कार्रवाई में नया क्या है।
कोई भी ऐसा सैन्य ऑपरेशन जिसमें खुफिया जानकारी के आधार पर किसी चिन्हित ठिकाने को नष्ट किया जाता है, उसे ही सर्जिकल स्ट्राइक कहते हैं। इसमें सिर्फ ठिकाने को नुकसान पहुंचता है, उसके आस-पास की इमारतों या नागरिकों को कोई नुकसान नहीं होता है। ऐसा नहीं है कि भारत ने पहली बार एलओसी के पार या सीमा पार ऐसा ऑपरेशन किया हो, ऐसा पहले भी होता रहा है लेकिन ये पहली बार है, जब सर्जिकल स्ट्राइक को स्वीकार किया गया है। इससे पहले भी कई बार भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की है। जब भी दूसरी तरफ से कुछ कार्रवाई होती थी, तो सर्जिकल स्ट्राइक उसका रूटीन रेस्पांस होता था।
जब भारतीय सैनिकों को मारा गया था तब भी ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक की गईं थीं। लेकिन ये पहली बार हुआ है जब न सिर्फ सरकार ने इसे अधिकारिक तौर पर माना है बल्कि भारत के डीजीएमओ ने फोन करके पाकिस्तान के डीजीएमओ को जानकारी भी दी है। मुझे लगता है कि जिस तरह से इस ऑपरेशन का प्रचार किया जा रहा है उससे साफ जाहिर होता है कि इसका मकसद जितना उस तरफ नुकसान पहुंचाना था उतना ही भारत में जो राजनीतिक लोग हैं, उन्हें लुभाना या उसका रुख बदलना था। क्योंकि एक तबके में ये ख्याल आ रहा था कि ये सरकार नाकाम हो रही है। पाकिस्तान को लेकर जो वादे किए गए वो पूरे नहीं किए जा रहे हैं और मोदी ने जो स्ट्रांगमैन या सशक्त नेता की छवि पेश की है वो उस पर खरे नहीं उतर रहे हैं, वो भी बाकी सरकारों की तरह नकारा हैं।
भारतीय सेना पहले भी इस तरह जवाब देती रही है लेकिन जिस तरह इस बार प्रचार किया जा रहा है उससे लगता है कि इसका मकसद राजनीतिक है। लेकिन इस ऑपरेशन का सिर्फ यही मकसद नहीं है। इसका असर पाकिस्तान पर भी होगा और अंतरराष्ट्रीय असर भी होगा। पिछले दस दिनों में भारत ने ये साफ संदेश दिया है कि जो पुराना हमारा रेस्पांस देने का ढांचा था हम उससे बाहर निकल आए हैं। हम बात करेंगे या नहीं करेंगे के नकारा चक्र से बाहर निकल चुके हैं और ये साफ कर दिया है कि हम सैन्य और अन्य विकल्प भी देखेंगे। इस ऑपरेशन से ये संकेत बिल्कुल साफ हो गया है कि अब सैन्य विकल्प पर भी चर्चा हो रही है और इसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
एक और खास बात ये है कि भारत ने इसके बारे में बहुत अधिक अधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इतनी ही जानकारी दी गई है जिससे भारत के लोगों को तो पूरा संदेश मिल गया लेकिन बहुत ज्यादा जानकारी न देकर और बहुत बड़े दावे न करके इसका खंडन करने की गुंजाइश भी छोड़ दी। इसका भी रणनीतिक महत्व है। ज़रूरी नहीं है कि पाकिस्तान इसे बढ़ावा दे। पाकिस्तान अपने लोगों को ये बता सकता है कि ये कोई बड़ी बात नहीं है, जो गोलीबारी होती रही है ऐसा ही है। यानि पाकिस्तान को नाक बचाने का अवसर भी दिया गया है। इसके खतरे भी हैं। यदि पाकिस्तान ने मुंहतोड़ जवाब दिया तो भारत को और भी कड़ा जवाब देना होगा और ये बिगड़ते हालात युद्ध तक पहुंच सकते हैं। भारत और पाकिस्तान के युद्ध की जब भी बात आती है तो परमाणु हथियारों की भी बात होती है। लोगों के दिमाग में ये बात रहती है कि एक-नहीं तो दूसरा तो पागल है ही, परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल हो सकता है। ये एक अनदेखा डर है। ये डर भारत की ओर ज्यादा है।
परमाणु हथियारों के युग में भी युद्ध हो सकते हैं। यूक्रेन में संघर्ष चल रहा है। इराक, सीरिया और लीबिया में संघर्ष चल रहा है। परमाणु हथियारों का ये मतलब नहीं है कि हाथ बांध कर बैठ जाएं। इस ऑपरेशन का समय और योजना ऐसी रही है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बहुत अधिक दबाव भारत पर नहीं आएगा। भारत ने पहले इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में बात की। पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और भूटान से भी बात की गई। आज भारत की विश्वसनीयता और स्वीकार्यता पहले से कहीं अधिक ज्यादा है। भारत का प्रतिक्रिया देने का पुराना ढांचा खत्म हो चुका है और अब सरकार नए विकल्पों पर विचार करेगी। भारत की मौजूदा सरकार ये स्पष्ट दिखा रही है कि भले ही हम दो ढाई साल से कुछ न कर पाएं हों लेकिन अब हमारी नीति स्पष्ट है और सभी विकल्प खुले हैं।
साभार-बीबीसी

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