सरहद पार फेसबुक का प्यार

ajay kumarप्यार अंधा होता है। उसे कुछ दिखाई-सुनाई नहीं देता है। न वह मजहब के दायरे में कैद होता है न किसी तरह की सीमाएं उसे बांध सकती हैं। न कोई प्यार पर पहरा बैठा सकता है, न ही इसे जुल्मों-सितम से दबाया जा सकता है। यह बात सदियों से प्रेम करने वालों के लिये कही जाती रही हैं। चाहें भगवान कृष्ण की दीवानी राधा हो या फिर मीरा। लैला हो या मजनू, शीरी-फरहाद, हीर-रांझा, सलीम-अनारकली चंद ऐसे नाम हैं जिनकी बेपनाह मोहब्बत ने प्यार को नई ऊंचाइयां दी। आजकल भी एक ‘मीरा’ का प्यार चर्चा में है। यह मीरा लखनऊ की है और उसका ‘कृष्ण’ पाकिस्तान में रहता है। अलग-अलग मुल्कों में रहने वाले इस आशिक जोड़े का प्यार उस समय परवान चढ़ रहा था जब दोनों मुल्कों के बीच तलवारें खिंची हुई थीं। बात पाकिस्तान के एक युवक की हिन्दुस्तान के दूसरे युवक से प्रेम प्रसंग की हो रही है। दोनों युवक थे और एक-दूसरे को प्यार करते थे, लेकिन यह प्रेम समलैंगिक नहीं था। इस बात से काफी लोग अंजान थे तो जिनको कुछ भनक थी, वह इस लिये परेशान थे क्योंकि प्रेम कहानी के दोनों किरदार परस्पर दुश्मन मुल्कों के थे।
भारत और पाकिस्तान के तल्ख रिश्तों की कहानी किसी से छुपी नहीं है, लेकिन इसके उलट इन दोनों मुल्कों में रहने वालों लोगों की सोच और एक-दूसरे के प्रति प्यार का नजरिया हमेशा से ही सियासी सरहदों से ऊपर रहा है। ऐसे ही प्यार की एक बुनियाद पिछले कुछ वर्षों Captureसे राजधानी लखनऊ मे अंगड़ाई ले रही थी, जहां कथक डांसर गौरव (जो अपनी डांस कला के चलते ‘मीरा’ के रूप में भी पहचाना जाता था) अपने पाकिस्तानी प्रेमी रिजवान के लिए सेक्स चेंज ऑपरेशन कर गौरव से खूबसूरत युवती आशना बन गया था।
तकरीबन पांच साल पहले पाकिस्तानी युवक रिजवान से फेसबुक पर हुई फ्रेंडशिप के बाद लखनऊ का कथक डांसर गौरव से आशना बन गया। आशना बनने के लिये उसने मुंबई के डॉक्टरों से अपना लिंग परिवर्तन कराया था। पाकिस्तान के रिजवान से अपनी प्रेम कहानी को सही बताते हुए गौरव इस रिश्ते को रुहानी करार देते हुए कहता है, ‘पांच वर्ष पूर्व फेसबुक पर रिजवान की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। रिजवान पाकिस्तान के सिंध के एक सूफी परिवार से ताल्लुक रखता है। मैंने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। धीरे-धीरे हमारी बातचीत होने लगी। अक्सर सूफिज्म पर बात होती। यह सिलसिला बढ़ा तो पता ही नहीं चला कि कब उसे मुझसे और मुझे उससे मोहब्बत हो गई। दोनों को एक-दूसरे से मोहब्बत हो गई थी, लेकिन हम लोग कभी मिले नहीं थे, स्काइप चैट पर जरूर हम दोनों ने एक-दूसरे को दो बार पहले देखा था।
अतीत के झरोखे में झांकते हुए गौरव ने बताया, ‘5 मार्च 2012 को उसने फोन किया। कहा-‘गौरव, मैं तुमसे निकाह करना चाहता हूं। मुझे भी उससे इश्क हो गया था, अंजाम की फिक्र किए बिना मैंने तुंरत बोल दिया- कुबूल है।’
गौरव बताते हैं, ‘मैं हमेशा से ऐसा नहीं था। मेरी परवरिश एक लडक़े की तरह हुई थी। यहां तक कि एक लडक़े की तरह ही मैं लड़कियों के साथ अफेयर्स भी करता था। मेरी पीएचडी चल रही थी। पीएचडी के सिलसिले में मैं सोशल नेटवर्किंग साइट के जरिए पाकिस्तान के रिजवान से मिला। उनका भी टॉपिक सूफीज्म से संबंधित था। इस दौरान दोनों एक दूसरे की काफी मदद करने लगे।स मय बीतने के साथ ही रिजवान और मेरे बीच वर्चुअल दोस्ती लंबी चैट से बढ़ती गई। कुछ वीडियो कॉल के साथ हम लोग एक दूसरे के काफी करीब आ गए। इस दौरान हम दोनों को ऐसा फील होने लगा कि हम लोग दो शरीर एक आत्मा बन चुके थे।
गौरव अपने प्यार को पाकीजा करार देते हुए कहता है कि हमारा रिश्ता जिस्मानी नहीं, रुहानी था, जिसे ज्यादातर लोग नहीं समझ पाते। वे हमें ‘गे’ ‘समलैंगिक कहेंगे। ‘रिश्ते की शक्ल’ पर हमारी रिजवान से अक्सर बात होती। इन सब बातों से मेरा परिवार अंजान था। मैं जानता था कि घर में बताने का मतलब अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना। इस बीच, मां ने मेरी शादी के लिए लडक़ी तलाशनी शुरू कर दी। मैं परेशान रहने लगा। तब मैने रिजवान से ही इसका हल पूछा तो वो बोला,‘हममें से किसी एक को अपना वजूद छोडक़र लडक़ी बनना होगा। पहले तो अजीब लगा, काफी सोचा-विचारा। बाद में इंटरनेट पर सेक्स चेंज से संबंधित जानकारियां ढूंढने लगा। शुरुआती जानकारियों से मैं घबराया तो रिजवान ने कहा तुम परेशान न हो मैं अपना सेक्स चेंज करवा लूंगा। तब मैंने सोचा कि रिजवान क्यों, मैं क्यों नहीं ऑपरेशन करवा सकता हूं? लिंग परिवर्तन कराने के लिए घरवालों को मनाना जरूरी था। इसलिए मैंने अपनी बहन अदिति शर्मा (बदला हुआ नाम) से बात की। वह भी कथक की बेहतरीन डांसर थी। उसने पहले तो मुझे समझाया, लेकिन मेरी जिद्द के आगे उसकी एक नहीं चली। मेरी दशा देखकर बाद में वह मेरे से सहमत हो गई और मेरा हौसला भी बढ़ाया। मां को मनाने की जिम्मेदारी भी उसी ने ले ली। किसी तरह उन्हें मनाया गया। गौरव कहता है जब एक बार फैसला हो गया तो फिर उसके बाद मैं इंटरनेट पर डॉक्टर की तलाश में जुट गया। मुंबई के दो डॉक्टरों से सम्पर्क हुआ। डॉ. मिथिलेश मित्रा जो कि सर्जन थे और दूसरे डॉक्टर अम्या जोशी जो कि हार्मोन ट्रीटमेंट के एक्सपर्ट। उनसे मैंने इस बारे में बात की। बाद में डॉ. मिथिलेश से मैंने अपना आपरेशन कराया।
गौरव के शब्दों में, ‘पूरे ऑपरेशन के प्रोसेस में तकरीबन डेढ़ साल का वक्त और करीब आठ लाख रुपये का खर्च आया। सबसे पहले काउंसलिंग सेशन हुआ। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद सर्जन ने अपना काम शुरू किया। पहली ही काउंसलिंग में डॉक्टर ने इजाजत दे दी, तो ट्रीटमेंट शुरू हो गया। लिंग बदलवाने के लिये नौ महीने में मेरे तीन मेजर ऑपरेशन हुए। तीसरा और फाइनल ऑपरेशन नवंबर या दिसंबर 2015 में होना था पर मेरे रिजल्ट अच्छे थे, इसलिए 10 अक्टूबर 2015 को ही अंतिम ऑपरेशन हो गया। गौरव कहता है, ‘यह इत्तेफाक है कि उनका जन्मदिन 10 अक्टूबर को पड़ता है। आशना भी उसी दिन बनी।
गौरव को आशना बनाने वाले मुंबई के सर्जन डॉ. मिथिलेश मित्रा ऑपरेशन की बात स्वीकार करते हुए कहते हैं कि लिंग परिवर्तन के प्रोसेस को मेडिकल साइंस में ‘जेंडर रिअसाइनमेंट सर्जरी’ कहा जाता है। ऐसे ऑपरेशन आसान नहीं होते, क्योंकि इंसान जिस रूप में पैदा होता है, उसमें संतुष्ट होता है। कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो अपने शरीर से खुश नहीं होते। मेडिकल साइंस इतनी एडवांस हो चुकी है कि ऐसे लोगों का ऑपरेशन कर सेक्स चेंज किया जा सकता है। हालांकि ऐसे केस बहुत रेयर हैं। मैंने भी अपने कॅरिअर में ऐसे चार-पांच ऑपरेशन ही किए हैं। जहां तक गौरव की बात है, तो जब वह मेरे पास आए तो मानसिक रूप से लडक़ी बनने के लिए पूरी तरह से तैयार था। यही वजह है कि उनका रिजल्ट सबसे कम समय में सबसे अच्छा रहा। वह काफी अवेयर था। वह डॉक्टरों की हर बात सुनता और उस पर फॉलो भी करता था।
खैर, बात दोनों के बीचं समानताओं की कि जाये तो गौरव और रिजवान की सोच और शौक लगभग एक जैसे हैं। सेक्स चेंज कराने के बाद गोपाल से आशना बनी अपनी प्रेमिका से मिलने के लिये रिजवान के मार्च के महीने में पाकिस्तान से हिन्दुस्तान आने की संभावना है। गौरव और रिजवान ने फैसला ले लिया है लेकिन गौरव से आशना बनने वाले इस कथक डांसर को लेकर हर कोई काफी चिंतित है। उसके साथी परेशान हैं। आखिर रिजवान और उसके बीच ये रिश्ता कैसा होगा? रिजवान कब तक आशना का साथ देगा? ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका उत्तर हर कोई तलाश रहा है।
भले ही गौरव के भविष्य को लेकर उसके घर वाले और यार-दोस्त चिंतित नजर आ रहे हों लेकिन गौरव निश्चिंत है। वह कहता है, ‘रूह तो कब की मिल चुकी है, बस अब तो प्यार को जिस्मानी और सामाजिक मान्यता मिलना बाकी रह गया है। वह साथ ही जोड़ देता है कि मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा काजी।
उम्मीद की जानी चाहिए कि गौरव आशना बनकर भी खुश रहेगा, लेकिन गौरव के आशना बनने से लखनऊ को बढ़ा नुकसान हुआ हैं। गौरव न केवल कथक का बेहतरीन डांसर है, बल्कि वह इस पर कई किताबें भी लिख चुका है। प्यार होने से पहले तक गौरव लखनऊ के कथक घराने पर रिसर्च की तैयारी में था। जिंदगी में आए इस नए मोड़ ने उसकी इस योजना को फिलहाल विराम दे दिया है। आशना बने गौरव का प्रेमी रिजवान जो वजीर आबरू कराची सखर सिंध में रहता है का कहना था, ‘इंशा अल्लाह मैं मार्च में हिंदुस्तान आऊंगा, पूरी कोशिश करूंगा लखनऊ की उस पाक जमीन को चूम सकूं जहां मेरा महबूब पैदा और बड़ा हुआ।

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