सरकार के लिये आफत बन गये हैं गायत्री प्रजापति

हाईकोर्ट ने कहा राज्य निर्वाचन आयोग मंत्री की मर्जी का गुलाम नहीं
गायत्री ने कोर्ट में प्रदेश सरकार की करायी फजीहत

 Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अपनी करतूतों की वजह से प्रदेश सरकार के लिये हमेशा से परेशानियां खड़े करने वाले बदनाम खनन मंत्री एक बार फिर से प्रदेश सरकार के फजीहत का कारण बने हैं। इस बार हाईकोर्ट ने उनके प्रति कड़ा रुख दिखाते हुये सरकार और निर्वाचन आयोग को फटकार लगाई है।
गौरतलब है कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 21 जनवरी को जारी अधिसूचना में फैजाबाद, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर के क्षेत्र पंचायत प्रमुख का चुनाव सात फरवरी को कराने पर रोक लगा दी गई थी। जिसके खिलाफ फैजाबाद निवासी राजेंद्र कुमार रावत व अन्य की ओर से हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई के दौरान यह बात सामने आयी कि खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के ही कहने पर तीन जिलों के ब्लाक प्रमुख चुनाव को टालने का निर्णय किया गया था। इस बात पर कोर्ट ने प्रदेश सरकार के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग को भी जमकर फटकार लगाई। इसके साथ ही कोर्ट ने तीनों जिलों में ब्लाक प्रमुख चुनाव सात फरवरी को ही कराने का
आदेश देते हुए कहा कि संविधान निर्वाचन आयोग को किसी मंत्री के औचित्यहीन इच्छा के अधीन होने की अनुमति नहीं देता।
बता दें कि 18 जनवरी को कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रजापति ने मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए एक पत्र राज्य सरकार को भेजा जिसमें सात फरवरी को होने वाले ब्लाक प्रमुख चुनाव को उन जिलों में टालने का अनुरोध किया गया था जहां विधानसभा उपचुनाव होने हैं। इसी के बाद क्षेत्र पंचायत प्रमुख के चुनाव पर रोक लगा दी गई थी।
एक बार जब चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाती है तो इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। ऐसा करना लोकतांत्रिक शासन की स्थापना में बाधा डालने जैसा है। राज्य सरकार ने महज मंत्री की इच्छा पर निर्णय किया। निर्वाचन आयोग राज्य सरकार के अधीन नहीं है।
-हाई कोर्ट, इलाहाबाद।

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