सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था

जिन बच्चों ने सरकारी स्कूल में एडमिशन लिया है, उनको स्कूल में रोक पाना मुश्किल हो रहा है। स्कूलों में पढऩे वाले बहुत से बच्चे कुछ देर बाद घर भाग जाते हैं। प्रदेश में बहुत से सरकारी स्कूलों में आजकल बरसात की वजह से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। सरकारी स्कूलों में पानी भर गया है, स्कूल जर्जर हैं, उनकी छतें टपकती हैं।

sanjay sharma editor5प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था चरम पर है। नया शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है लेकिन स्कूलों में सरकार की तरफ से मिलने वाली किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। सरकारी स्कूलों में बड़ी मुश्किल से एडमिशन लेने वाले छात्रों को मुफ्त किताबें और ड्रेस दिलवाने का लालच देकर रोकने में जुटे अध्यापक भी नाकाम साबित हो रहे हैं। इतना ही नहीं बरसात के मौसम में बहुत से स्कूलों में पानी भर जाने और छत टपकने की वजह से अध्यापक और बच्चे शरणार्थी बनकर शिक्षा देने और ग्रहण करने का काम कर रहे हैं। जो देश का भविष्य संवारने के नाम पर सरकार की तरफ से सालाना खर्च किए जा रहे करोड़ो रुपये की हकीकत बयां करने के लिए काफी है।
प्राथमिक शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकारी स्तर पर तमाम प्रयास किये जा रहे हैं। दोपहर के भोजन से लेकर नि: शुल्क पाठ्य पुस्तकें और ड्रेस बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही है ताकि अभिवावक अपने बच्चों को स्कूल पढऩे के लिए भेज सकें । सर्व शिक्षा अभियान के तहत लोगों को साक्षर बनाने के सबसे सरल तरीकों को ईजाद किया जा रहा है। सभी सरकारी विभागों को शत प्रतिशत साक्षर बनवाने में सहयोग देने का निर्देश दिया गया है। इन सबके बावजूद प्राइमरी स्कूलों में एडमिशन लेने वाले बच्चों की संख्या बहुत कम है। जिन बच्चों ने सरकारी स्कूल में एडमिशन लिया है, उनको स्कूल में रोक पाना मुश्किल हो रहा है। स्कूलों में पढऩे वाले बहुत से बच्चे कुछ देर बाद घर भाग जाते हैं। प्रदेश में बहुत से सरकारी स्कूलों में आजकल बरसात की वजह से पढ़ाई नहीं हो पा रही है। सरकारी स्कूलों में पानी भर गया है, स्कूल जर्जर हैं, उनकी छतें टपकती हैं। टीचर और स्टूडेंट आस-पास के घरों और सार्वजनिक स्थलों पर शरण लेकर पठन-पाठन कर रहे हैं। सरकार स्वच्छता अभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैे लेकिन बहुत से स्कूलों में अभी भी शौचालय नहीं है। यदि शौचालय बने भी हैं, तो जर्जर हालत में हैं, उनकी सफाई तक नहीं होती। पानी का इंतजाम नहीं है। ऐसी तमाम अव्यवस्थाओं के बीच बच्चे स्कूल में पढऩे पहुंचते हैं। इन बच्चों को स्कूल में रोकने का काम विरले सरकारी अध्यापक ही कर पाते हैं। हर किसी के बस की बात नहीं है।
बच्चे देश का भविष्य हैं। यदि सरकारी योजनाओं का हाल बदहाल रहेगा। स्कूलों में अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहेगा, तो आने वाले समय में प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ टीचर ही नजर आयेंगे, बच्चे नहीं।

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