सरकारी संस्थाओं का बदलता चोला

लेखकों, कवियों और कलाकारों के बीच सत्ता का विरोध आम बात है। तमाम सरकारें कला और साहित्य जगत के प्रति वैचारिक मतभेद के बावजूद सम्मान और आदर का भाव रखतीं हैं। संघ परिवार से जुड़े लोग अब वरिष्ठï नाटककार और फिल्मकार गिरीश कर्नाड के नाटक पर सवाल उठा रहे हैं। यह प्रवृत्ति घातक है। इसके खिलाफ राष्टï्रपति को ज्ञापन सौंपा गया और हस्तक्षेप की मांग की गयी।

 

SANJAY SHARMA - EDITOR

संजय शर्मा – संपादक

मोदी सरकार के गठन के साथ ही इस बात की संभावना जताई जाने लगी थी कि संघ परिवार से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात किया जायेगा। इस बात की आशंका निर्मूल नहीं साबित हुई। अबतक के अनुभव बतातें हैं कि मोदी सरकार गुपचुप तरीके से संघ परिवार का एजेंडा आगे बढ़ा रही है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष पर पर वाई सुदर्शन राव की पिछले साल नियुक्ति की गई थी। उनका नाम बतौर इतिहासकार भले ही अहम न रहा हो लेकिन संघ परिवार से उनके जुड़ाव के बारे में सभी जानते हैं।
इस संगठन में कई ऐसे सदस्य शामिल किये गये हैं जो आरएसएस की संस्था भारतीय इतिहास संकलन योजना के पदाधिकारी रह चुके हैं। आईसीएचआर भले ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय के तहत है पर मार्च 1972 में इसकी स्थापना इतिहास लेखन और अनुसंधान को उच्च स्तरीय दर्जा दिलाने वाली स्वायत्त संस्था के रूप में की गयी थी। मोदी सरकार पहले से चली आ रही तमाम संस्थाओं की स्वायत्ता का गला घोंटती जा रही है। उसके काम काज से क्षुब्ध होकर केंद्रीय फिल्म एवं प्रमाणन बोर्ड की अध्यक्ष लीला सैमसन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मोदी सरकार योजना आयोग को बदल कर नीति आयोग बना रही है।
नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष के पद पर भाजपा के मुख पत्र पांचजन्य के पूर्व संपादक को बैठा दिया गया है। बेजा दखल का ताजा मामला राष्टï्रीय संग्रहालय और ललित कला अकादमी का है। संग्रहालय के माहानिदेशक वेणु वासुदेवन और ललित कला अकादमी के अध्यक्ष कमल कुमार चक्रवर्ती को भी उनके पदों से हटा दिया गया। दोनों संस्थाओं में सरकार के अनुचित हस्तक्षेप का मामला रज्य सभा में भी उठ चुका है और विपक्षी दल इसकी आलोचना कर चुके हैं। ललित कला अकादमी संस्कृति मंत्रालय का अंग है लेकिल कई दशकों से यह स्वतंत्र संस्था के रूप में कार्य कर रहा है। लेखकों कवियों और कलाकारों के बीच सत्ता का विरोध आम बात है। तमाम सरकारें कला और साहित्य जगत के प्रति वैचारिक मतभेद के बावजूद सम्मान और आदर का भाव रखतीं हैं। संघ परिवार से जुड़े लोग अब वरिष्ठï नाटककार और फिल्मकार गिरीश कर्नाड के नाटक पर सवाल उठा रहे हैं। यह प्रवृति घातक है। इस प्रवृति के खिलाफ देश के प्रमुख कलाकारो और संस्कृति कर्मियों ने राष्टï्रपति को ज्ञापन सौंप कर उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की है। यह मामला अदालत में भी पहुंच चुका है। लोकतंत्र में आपका वैचारिक मतभेद के कारण विरोध होगा और आपको इसकी आदत डालनी होगी। यहां मनमर्जी और तानाशाही से काम नहीं चलता।

 

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