सरकारी अस्पतालों में इलाज के नाम पर डॉक्टर और कर्मचारी मरीजों से कर रहे हैं धन उगाही

  • प्रसव कराने और साफ-सफाई के लिए भी मांगे जाते हैं पैसे
  • पीडि़त ने पत्नी के पायल बेच कर प्रसव के लिए दिए रुपये

 वीरेंद्र पाण्डेय
captureलखनऊ। तमाम कवायदों के बाद भी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधरती नहीं दिख रही है। यहां के कई चिकित्सक और कर्मचारी गरीब मरीजों से धन उगाही कर रहे हैं। धन उगाही का यह खेल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर राजधानी के बड़े-बड़े सरकारी अस्पतालों में जारी है।
प्रदेश सरकार जहां एक ओर सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं, वहीं अस्पतालों में काम करने वाले चिकित्सक तथा अन्य कर्मचारी मरीजों से धन उगाही का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विभाग के मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव तक इसको जानते हैं, बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लिहाजा इसका खामियाजा गरीब मरीजों को उठाना पड़ रहा है। ताजा मामला मलिहाबाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का है। यहां बीते एक तारीख को प्रसव कराने आई एक महिला के पति से वहां मौजूद स्टाफ ने पैसे की मांग की। पैसे की मांग न पूरी न होने पर उसे अपशब्द कहा गया। आखिरकार गरीब को पत्नी की पायल बेचकर सीएचसी में मौजूद महिला डॉक्टर व स्टाफ की मांग पूरी करनी पड़ी। ग्राम पंचायत बदौरा के मजरे शहजादपुर निवासी हसमत ने सीएचसी पर तैनात महिला डॉक्टरों पर आरोप लगाया है कि बीते 29 नवंबर की रात्रि लगभग 11 बजे उसकी पत्नी सबिया को प्रसव पीड़ा हुई। इस पर हसमत ने उसे 108 एंबुलेंस के जरिए सीएचसी मलिहाबाद पहुंचाया और भर्ती कराया। 30 तारीख को सुबह 5 बजे सबिया ने एक पुत्र को जन्म दिया। जिसके बाद डयूटी पर मौजूद महिला डॉक्टरों ने सबिया की सास से 600 रुपये की मांग की। डॉक्टरों ने कहा कि 100 रुपये सफ ाई और 500 रुपये बच्चे को जन्म दिलाने के दो। हसमत ने कहा कि हम गरीब आदमी हैं और जरदोजी का काम करके किसी तरह गुजर बसर कर रहे हैं। हमारे पास आपको देने के पैसे नहीं हैं। वैसे सरकारी अस्पताल में इलाज मुफ्त होता है। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो हसमत की बात सुनकर महिला स्टाफ ने उसे काफ ी अपशब्द कहे। इस पर पीडि़त हसमत ने कहा कि मैं बाद में पैसे का इंतजाम करके दूंगा। एक दिसम्बर को हसमत ने कहीं से पैसे का जुगाड़ न होता देख घर में रखी अपनी पत्नी की पायल बेंचकर 600 रुपये अस्पताल में महिला डॉक्टर को दिए। हसमत ने यह भी बताया कि 20 रुपये 1400 रुपये मिलने का फार्म भरने वाले ने लिये। इस मामले पर अस्पताल प्रशाासन का कहना है कि इस तरह की कोई शिकायत नहीं आयी है। शिकायत आने पर कार्रवाई की जायेगी। गरीबों से इलाज के नाम पर पैसे लेने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इस तरह के मामले आये दिन सामने आते रहते हैं। अक्टूबर माह में बीकेटी स्थित राम सागर मिश्रा अस्पताल में भी इलाज कराने के नाम पर महिला चिकित्सक ने मरीज से 3000 रुपये वसूले थे। उसके बाद महिला मरीज की मौत हो गयी थी। परिजनों का आरोप था कि डॉक्टर ने अच्छे इलाज का दावा करते हुए 3000 रुपये लिये थे।

मंत्री शिवाकांत ओझा ने भी मानी मरीजों से चिकित्सक करते हैं कमाई

प्रदेश सरकार के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री शिवाकांत ओझा ने भी गरीब मरीजों से कुछ चिकित्सकों द्वारा कमाई करने की बात को स्वीकार किया है और इसके लिए उन्होंने चिकित्सकों को फटकार भी लगाई है। मंत्री ने यह बात प्रान्तीय चिकित्सा सेवा संघ के कार्यक्रम के दौरान कही थी। इसके अलावा स्वास्थ्य महकमे में काम करने वाले बाबुओं द्वारा हर काम में पैसे की मांग करने पर तंज कसते हुए कहा था कि अबकी बार उनकी सरकार आयी तो भ्रष्टïाचारी बाबुओं को जो सालों से एक ही जगह पर तैनात हैं उनको दूसरी कमिश्नरी में ट्रांसफर कर दूंगा।

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