समीकरण बिठाने  की कोशिश में बीजेपी

“उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सारी राजनीतिक पार्टियां जुट गई हैं। सत्ताधारी पार्टी की तरफ से सीएम का चेहरा बिल्कुल साफ है। सपा को बहुमत मिला तो अखिलेश यादव ही सीएम बनेंगे। बसपा में मायावती के अलावा किसी और नाम की कल्पना करना भी मुश्किल है।”
sanjay sharma editor5भारतीय जनता पार्टी यूपी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर अपने समीकरण बिठाने में जुट गई है। लोकसभा चुनाव में सर्वाधिक 73 सांसद देने वाले यूपी से कुल 15 मंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को अच्छी तरह मालूम है कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह से लेकर अनुप्रिया पटेल तक को कब और कहां सामने लाकर वोटों का समीकरण बिठाना है। पार्टी कार्यकर्ताओं की तरफ से चाहे जितनी कोशिश कर ली जाए, यूपी में सीएम पद का उम्मीदवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की हरी झंडी मिलने और जातीय समीकरणों के फर्मे में फिट बैठने वाला ही होगा। इसलिए तय माना जा रहा है कि बीजेपी सारे समीकरण फिट होते ही सीएम उम्मीदवार का नाम घोषित करेगी। भाजपा की तरफ से पेश सीएम उम्मीदवार का चेहरा, आने वाले विधान सभा चुनाव की रोचकता का फैसला करेगा।
उत्तर प्रदेश में 2017 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सारी राजनीतिक पार्टियां जुट गई हैं। सत्ताधारी पार्टी की तरफ से सीएम का चेहरा बिल्कुल साफ है। सपा को बहुमत मिला तो अखिलेश यादव ही सीएम बनेंगे। बसपा में मायावती के अलावा किसी और नाम की कल्पना करना भी मुश्किल है। कांग्रेस लंबे समय से सीएम उम्मीदवार की तलाश में जुटी है। प्रियंका को सीएम उम्मीदवार और विधानसभा चुनाव में स्टार प्रचारक की भूमिका में उतारने की कोशिशें चल रही हैं। प्रियंका ने यूपी में स्टार प्रचारक की भूमिका में आने का मन तो बना लिया है, लेकिन सीएम उम्मीदवार से नाम पर राजी नहीं हो रही हैं। ये अलग बात है कि कांग्रेस की डूबती नैया पार करने की कोशिश में जुटे प्रशांत किशोर उन्हें मनाने के काफी करीब पहुंच गये हैं। इसका अंदाजा पार्टी नेताओं के चेहरों को देखकर लगाया जा सकता है। जबकि बीजेपी सीएम कैंडीडेट के रूप में किसी ऐसे चेहरे को प्रजेंट करने की कोशिश में है, जो हिन्दुत्व का चेहरा होने के साथ ही जातिगत समीकरणों और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के फर्मे में भी फिट बैठता हो। बीजेपी को मालूम है कि यूपी में हमेशा जातीय समीकरणों और धार्मिक वोटों की बदौलत ही सरकारें बनती रही हैं। आने वाले चुनाव में भी जातीय और धार्मिक समीकरण ही हाबी रहेंगे। इसलिए यूपी को लगातार तरजीह देने की कोशिश में जुटी भाजपा बहुत जल्द सीएम उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर देगी।
फिलहाल आने वाले चुनाव में भाजपा की सीधी टक्कर सपा से रहेगी। वर्तमान हालात में बसपा तीसरे पायदान पर खिसकने लगी है। यदि प्रशांत किशोर कोई करिश्मा करते हैं, तो कांग्रेस चुनाव में अप्रत्याशित सीटें हासिल करेगी। यदि काग्रेस सरकार में भागीदारी चाहती है,तो किसी न किसी दल को समर्थन देना ही होगा। लेकिन इतना तो यह है कि आने वाला चुनाव काफी रोचक होगा।

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