समर कैंप के नाम पर पडऩे लगा जेबों पर डाका

  • संस्थाएं हैं बेलगाम, नहीं होती इन पर कार्रवाई
  • बच्चों के भविष्य के लिए अभिभावक सहन करते हैं मनमानी

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही अभिभावक बच्चों को खास तरह के प्रशिक्षण दिलाने की कोशिशें शुरू कर देते हैं। अभिभावकों की इसी इच्छा का लाभ उठाने के लिए गर्मियों की छुटिटयां शुरू होते ही समर कैंप का बाजार सजने लगता हैं। शहर में जगह-जगह होर्डिंग व पोस्टर लगाकर अभिभावकों को आकर्षित करने और फ्री ऑफ कास्ट एक्टीविटी का प्रशिक्षण दिलाने का लालच दिया जाता है। जब समर कैंप में अभिभावक बच्चों का पंजीकरण करवा लेते हैं, तो उनकी जेबों पर डाका डालने का सिलसिला शुरू हो जाता है। ऐसे में अपने बच्चों की बेहतरी के लिए अभिभावक मजबूरन समर कैंप लगाने वालों की सारी बात मजबूरन मान लेता है।
राजधानी में नामचीन स्कूलों के अलावा तमाम ऐसी संस्थाएं हैं, जिन्हें गर्मियों की छुट्टी का बेसब्री से इंतजार होता है। ऐसे संस्थान समर कैंप की तैयारियों में पहले से ही जुट जाते हैं। लूट की इस दौड़ में जबरदस्त कॉम्पटीशन होता है। ऐसी संस्थाएं अभिभावकों को लुभाने के लिए अनेकों प्रकार के जतन करती हैं। वह समर कैंप में एडमिशन की फीस विज्ञापन में बहुत कम दिखाती हैं लेकिन एडमिशन लेने के बाद प्रशिक्षण से जुड़े सामानों की बाकायदा लिस्ट जारी करते हैं। इस लिस्ट में डांस, एक्टिंग, पेंटिंग, स्वीमिंग, कराटे, म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट के अलावा अलग-अलग तरह के प्रशिक्षण का विवरण दिया जाता है। इस दौड़ में नामचीन स्कूल भी पीछे नहीं है। जिले के दर्जनों स्कूल तो अपने स्कूल की छुट्टियां होने से पहले ही बच्चों से समर कैंप का फार्म भरवा लेते हैं। अधिकतर स्कूलों में छात्रों के लिए समर कैंप में हिस्सा लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
कैंप में उपयोगी वस्तुओं की होती है काला बजारी
जिले में बहुत ही संस्थाएं समर कैंप में बच्चों को फ्री ट्रेनिग देन की बात करती हैं लेकिन ट्रेनिंग में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं को बाजार की जगह अपने यहां से खरीदने का दबाव डालते हैं। जो लोग कैंप लगाने वाली संस्था से सामान खरीदते हैं, उनसे उपकरणों की दोगुना कीमत वसूली जाती है। फ्लोरेंस नाईटिंगेल स्कूल में समर कैंप के दौरान तय फीस से अधिक वूसले जाने का अभिभावकों ने विरोध किया और अपने बच्चों को कैंप करवाने से इंकार कर दिया था। इसी तरह के विवाद शहर के अन्य स्कूलों और संस्थानों में समर कैंप के आयोजन को लेकर सामने आए हैं।
वेस्ट मेटेरियल के नाम पर खरीदवाते हैं महंगी वस्तुएं
समर कैंप में बच्चों को भेज चुके अभिभावकों की मानें तो पहले समर कैंप में वेस्ट मेटेरियल का प्रयोग नई वस्तुओं को बनाने में किया जाता था। इसका उद्देश्य कम पैसे में खुबसूरत वस्तुएं तैयार करना और बेकार सामानों को प्रयोग में लाना था लेकिन अब संस्थाएं ऐसी वस्तुओं के निर्माण के लिए नई वस्तुएं खरीदने को कहती हैं, जिसमें उनका कमीशन निर्धारित होता है। इसलिए अभिभावकों को सामान खरीदने वाली दुकानों का पता बताकर वहीं से सामान खरीदने की हिदायत दी जाती है।
पूरी रेट लिस्ट है तैयार
समर कैम्प के दौरान बच्चों को फ्रेंच सिखाने की फीस 2000 रुपये, पेंटिंग के लिए 2000 रुपये, डांस के लिए 7000 रुपये, कराटे व स्विमिंग के लिए 5000 रुपये, एक्टिंग के लिए 9000 रुपये फीस ली जाती है। इसी तरह म्यूजिक व अन्य वाद्ययंत्रों का प्रशिक्षण देने के नाम पर अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जाती है।
बेहतर भविष्य के लिए सहते हैं संस्थाओं की मनमानी
आजकल हर क्षेत्र में प्रतियोगिता चल रही है। इस वजह से अभिभावक अपने बच्चों को खास बनाने के लिए तरह-तरह के प्रशिक्षण दिलाने की कोशिश करते रहते हैं। इसके लिए उन्हें स्कूलों और समर कैंप लगाने वाली संस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां तक की स्कूलों व अन्य संस्थाओं की मनमानी सहन करनी पड़ती है। अभिभावकों का कहना है कि हम लोगों का इनके खिलाफ शिकायत करने का कोई फायदा नहीं होता है। ऐसी संस्थाओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।

क्या कहते हैं लोग

समर कैंप के नाम पर स्कूल छुट्टी होने से पहले ही फार्म भरवा लेते हैं। इसलिए मजबूरन बच्चों को क्लास के लिए भेजना पड़ता है। पिछली बार समर कैंप के नाम पर अधिक पैसे वसूलने को लेकर स्कूल वालों से मेरी बहस हो गई थी। इस बात की शिकायत भी की गई लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। आखिरकार बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर स्कूल की मनमानी पर आंखे बंद कर ली।
अमित, महानगर

समर कैंप को लेकर मेरा बच्चा बहुत उत्साहित था, उसने गर्मी की छुट्टियों में डांस सीखने का मूड बनाया था। इसलिए हम लोगों ने भी बच्चे का एडमिशन कराने के लिए पास में ही एक संस्था में एडमिशन कराने का मन बनाया। तब वहां फीस बहुत अधिक थी। फीस में छूट करने देने को वह तैयार नहीं हुए। बच्चे की खुशी के लिए हमने वहां की फीस भरी। इससे हमारे बजट पर असर भी पड़ा।
गीता, गोखले मार्ग

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