सपा में चल रही कलह से मायावती की खिलीं बांछे तो भाजपा भी है मगन

सबसे बड़े सियासी कुनबे में मची रार से मुस्लिम मतदाता बसपा की तरफ कर सकते हैं रुख
भाजपा को प्रदेश की सत्ता में आने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं मुसलमान

captureसुनील शर्मा
लखनऊ। देश के सबसे बड़े सियासी कुनबे यानी सपा में चल रही वर्चस्व की लड़ाई समाप्त न होने से बसपा सुप्रीमो मायावती की बांछें खिली हुई हैं। पिता पुत्र के बीच सुलह होने की धुंधली होती उम्मीद से वह अधिक गदगद नजर आ रही हैं। उन्हें सपा का मजबूत वोट बैंक मुसलमान अपने पाले में आता दिखाई दे रहा है। उनकी ये खुशी बसपा प्रत्याशियों की घोषित की जा रही सूची में साफ दिखाई दे रही है। पार्टी के मुताबिक प्रदेश में करीब 19 फीसदी आबादी वाले मुस्लिम समाज को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए 97 मुसलमान प्रत्याशी घोषित किए गए हैं। वहीं मुसलमानों में होने वाले इस बिखराव की वजह से भाजपा भी मगन दिखाई दे रही है।
चुनावी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में करीब 19 फीसदी मुसलमानों की आबादी है, जोकि भाजपा को सत्ता में आने से रोकने के लिए एकमुश्त वोट करने के लिए जानी जाती है। इन्हें समाजवादी पार्टी का मजबूत वोट बैंक माना जाता है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से कुछ माह पूर्व से मची कलह के चलते दो धड़ों में बंटी सपा ने मुसलमानों को असमंजस की स्थिति में ला दिया हैं। करीब हफ्ते भर से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव व उनके पुत्र अखिलेश यादव के बीच चल रहा घमासान बढ़ गया है। मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। दोनों के बीच सुलह होने की उम्मीद खत्म होती जा रही है। इस रार ने मुस्लिमों को व्यथित करने के साथ ही उन्हें अपने लिए नए ठिकाने की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है। मुसलमानों की ये पीड़ा मुलायम व अखिलेश के आवास के पास रोजाना विभिन्न जिलों से आ रहे मुस्लिम नेताओं के चेहरे पर दिखाई दे जाती है। यहां तक कि कई मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने खून से पत्र लिखकर भी मुलायम व अखिलेश से एक होने की अपील की है। वे ये भी सवाल कर रहे हैं कि मुसलमान अब किधर जाएं? इसका जवाब तलाश रहे मुसलमानों का झुकाव अब धीरे-धीरे बसपा की तरफ होने लगा है। इसे भांपकर मायावती अपने सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले से इन्हें अपनी तरफ लुभाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही हैं। जिन मुस्लिम वोटों को सिर्फ सपा का माना जाता था उसपर बसपा ने अपना अधिकार जताना शुरू कर दिया है। मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण के लिए बसपा पहले ही आठ पेज की एक बुकलेट मुसलमानों के बीच बंटवा चुकी है, जिसमें बसपा शासनकाल में मुसलमानों के लिए किए गए कार्यों के अलावा कई प्रकरणों का उल्लेख कर इसके जरिए सपा भाजपा के बीच भीतरी साठगांठ होने की बात कही गई है। वहीं बसपा मुखिया द्वारा 403 विधानसभा में 97 सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी उतारने की घोषणा भी की गई थी। जोकि 24 प्रतिशत से ऊपर है। वहीं मायावती ने मुसलमानों से कहा है कि यूपी में अगली सरकार बसपा की बनेगी इसलिए मुस्लिम मतदाता सपा को वोट देकर अपना बहुमूल्य वोट खराब न करें। बसपा को वोट देकर बहुमत दिलाएं।

कांग्रेस भी मुसलमानों को लुभाने का करेगी प्रयास
कांग्रेस अपने पुराने परंपरागत वोट बैंक रहे मुसलमानों को वापस अपने पाले में लाने की फिराक में है। पार्टी ने भी प्रत्याशियों के चयन में इस समाज को तरजीह देने की रणनीति तैयार की है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक जिस विधानसभा में मुसलमानों की आबादी एक लाख से ऊपर है वहां कांग्रेस स्थानीय और जमीनी स्तर वाले मुस्लिम नेता को अपना प्रत्याशी बनाएगी। ऐसे में मुसलमानों के काफी हद तक बिखरने का अंदेशा लग रहा है। मुसलमानों का वोट सपा, बसपा के अलावा कांग्रेस को भी मिलने के कयास लगाए जा रहे हैं। इसका फायदा भाजपा को मिलता दिख रहा है। इसके चलते भाजपा रणनीतिकारों की निगाहें सपा में चल रही कलह पर लगी हुई है। साथ ही मुसलमानों को अपने पाले में लाने के लिए बसपा व कांग्रेस द्वारा तैयार की जा रही रणनीति को भी ध्यान में रखा जा रहा है।

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