सपा मुखिया के फैसले पर टिकी हैं सबकी निगाहें

टिकट बंटवारे को लेकर सपा में फिर ठनी रार
टिकट बंटवारे को लेकर फिर आमने-सामने आए अखिलेश-शिवपाल

captureलखनऊ। समाजवादी पार्टी में टिकट बंटवारे को लेकर एक बार फिर रार शुरू हो गई है। सीएम अखिलेश यादव द्वारा अपने उम्मीदवारों की लिस्ट देने के बाद सूबे में सपा कार्यकर्ता से लेकर आम आदमी तक असमंजस में है कि आखिर किसके उम्मीदवार को प्राथमिकता मिलेगी। हालांकि अभी शिवपाल व अखिलेश में किसी की सूची बाहर नहीं आयी है, पर जिस तरह सीएम के नजदीकी लोग दावा कर रहे है कि अतीक और मुख्तार जैसे माफिया के नाम सीएम की सूची में नहीं हैं उसने अखिलेश की लोकप्रियता और बढ़ा दी है। लेकिन वहीं समर्थकों का कहना है कि चुनाव से पहले बार- बार इस तरह परिवार का झगड़ा सडक़ पर आने से पार्टी को नुकसान होगा। फिलहाल आज सपा मुखिया मुलायम सिंह के प्रेस कांफ्रेंस पर सबकी निगाहें टिकी है कि वह इस मसले को कैसे सुलझाते हैं।
समाजवादी पार्टी में एक बार फिर महासंग्राम छिडऩे के आसार नजर आ रहे हैं। सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव और सीएम अखिलेश यादव एक बार फिर टिकट बंटवारे को लेकर आमने-सामने हैं। पिछली बार भी सपा में जो संग्राम छिड़ा था उस दौरान भी सीएम अखिलेश यादव ने खुलकर सार्वजनिक मंच से कहा था कि उन्हें टिकट बांटने का हक मिले। उस समय तो सपा मुखिया मुलायम सिंह ने जैसे-तैसे सब मैनेज कर लिया लेकिन अब जब चुनाव बहुत करीब है, ऐसे में यदि पिछले दिनों जैसे हालात पैदा होते हैं तो निश्चित ही पार्टी के लिए अच्छा नहीं होगा। पिछले दिनों सीएम अखिलेश ने 403 उम्मीदवारों की लिस्ट सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल को सौंपी तो शिवपाल यादव ने ट्विटर पर अनुशासन की बात कही थी। सीएम अखिलेश यादव लगातार अपराधी छवि वालों को पार्टी से दूर करने के प्रयास में लगे हुए हैं और शिवपाल यादव ऐसे लोगों को पार्टी से जोडऩे में। एक बार फिर सीएम सीतापुर के विधायक रामपाल के पार्टी में वापस लेने से खफा हैं। उनका कहना है आपराधिक छवि के लोगों को पार्टी में लेने से सिर्फ पार्टी का नुकसान ही होगा। शिवपाल-अखिलेश यादव के बीच बढ़ती दूरी के बाद एक बार फिर सबकी निगाहें आज सपा मुखिया मुलायम सिंह की प्रेस कांफ्रेंस पर टिकी हैं कि नेताजी किसके उम्मीदवारों की सूची को प्राथमिकता देंगे। जाहिर है अब सपा और खासतौर से अखिलेश के भविष्य का फैसला सपा की सूची तय कर देगी। अगर लिस्ट में चर्चित अपराधियों के नाम होते हैं तो यह अखिलेश के कैरियर के लिये बहुत नुकसानदायक होगा, क्योंकि अखिलेश सत्ता संभालने के बाद से लगातार सार्वजनिक मंच से अपराधी छवि के लोगों को टिकट न देने की वकालत करते रहे हैं।

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