सपा को घेरने की कोशिश

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शिवपाल यादव की अनुपस्थिति को अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच अनबन के रूप में देखा जाने लगा था। इसलिए भाजपा, कांग्रेस और बसपा तीनों पार्टियों को सपा को घेरने का मौका मिल गया। इसमें कौमी एकता दल भी पीछे नहीं रहा, उसके नेता अफजाल अंसारी ने मीडिया के सामने खुलासा किया कि उन्हें सपा में शामिल करने का न्यौता सपा नेता अंबिका चौधरी और बलराम यादव ने दिया था।

sanjay sharma editor5उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं। राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने का कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस, बसपा और सपा के नेता प्रदेश और देश की बदहाली के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराने में जुटे हैं। इसमें छोटी पार्टियों के नेता भी पीछे नहीं है। जिस तरह कौमी एकता दल के नेता अफजाल अंसारी ने समाजवादी पार्टी पर राज्यसभा चुनाव में वोट हासिल करने के लिए पार्टी में विलय कराने का सपना दिखाने और उसके बाद पार्टी में शामिल न करने की घोषणा को धोखा देने वाला कृत्य बताया है। उनका ऐसा कहना सपा में शामिल न हो पाने की खीझ के रूप में भी देखा जा रहा है। इतना ही नहीं मायावती का बार-बार मीडिया के सामने आना और सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ बयानबाजी को भी वोटरों को लुभाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में सत्ताधारी सपा को मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने और अन्य राजनीतिक दलों के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाने से पहले काफी मनन की करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दो दिन पूर्व अपने मंत्रिमंडल में पांच नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने का निर्णय लिया। इसमें बलराम यादव, नारद राय, रविदास मेहरोत्रा और शारदा प्रसाद शुक्ला को शपथ दिलाई जा चुकी है। पांचवें मंत्री के रूप में जियाउद्दीन रिजवी 10 जुलाई को शपथ लेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि जिस तरह कौमी एकता दल के सपा में विलय पर नाराजगी व्यक्त करते हुए बलराम यादव को बर्खास्त किया गया और बाद में मुख्तार अंसारी और उनकी पार्टी को विलय न करने की बात कही, उससे अखिलेश यादव की लोकप्रियता में और अधिक बढ़ोत्तरी हुई। लेकिन बलराम को बर्खास्त करने के मुद्दे पर मुलायम सिंह और शिवपाल समेत तमाम नेताओं की नाराजगी ने दोबारा अखिलेश को मजबूर किया और बलराम यादव को न सिर्फ पार्टी में शामिल किया बल्कि उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान शिवपाल यादव की अनुपस्थिति को अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच अनबन के रूप में देखा जाने लगा था। इसलिए भाजपा, कांग्रेस और बसपा तीनों पार्टियों को सपा को घेरने का मौका मिल गया। इसमें कौमी एकता दल भी पीछे नहीं रहा, उसके नेता अफजाल अंसारी ने मीडिया के सामने खुलासा किया कि उन्हें सपा में शामिल करने का न्यौता सपा नेता अंबिका चौधरी और बलराम यादव ने दिया था। इतना ही नहीं सपा मुखिया मुलायम सिंह ने पुराने साथी होने का हवाला देकर दोबारा एक होने का भरोसा दिलाया था। बाद में विलय न होने पर अफजाल ने सपा को खूब खरी-खोटी सुनाई। ऐसे में समाजवादी पार्टी को आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण फैसले करने होंगे। तभी अखिलेश यादव का प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने का सपना पूरा हो सकेगा।

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