सपा का सबसे बड़ा दांव, 17 पिछड़ी जातियां दलित समुदाय में शामिल

चुनाव से ठीक पहले पिछड़ी जातियों को अपने पाले में लाने के लिए खेला मास्टर स्ट्रोक
ये जातियां हो गईं संगठित तो कई विधानसभाओं में बदल सकती है तस्वीर
गेंद अब जाएगी केन्द्र के पाले में और फिर होगा इन जातियों पर फैसला

captureलखनऊ। चुनाव से ठीक पहले समाजवादी पार्टी ने एक बड़ा दांव खेला है। आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बताया कि कैबिनेट ने 17 पिछड़ी जातियों को दलित समुदाय में शामिल करने के लिए प्रस्ताव पास कर दिया गया है। चुनाव में इन जातियों को अपने पाले में करने के लिए सपा के इस दांव का पलटवार करने की भाजपा और बसपा तैयारी में जुटी हैं। जाति का यह दांव खतरनाक है और विपक्ष भी जानता है कि अगर इसमें कोई चूक हुई तो लेने के देने पड़ सकते हैं।
आज हुए फैसले में निषाद, मल्लाह, भर, बाथम, तुरहा, कहार कश्यप, केवट, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, धीमर, बिंद, माझी, गौड़, राजभर और मछुवा शामिल हुई हैं। इस प्रस्ताव को केन्द्र को भेजने के बाद फैसला केन्द्र ही करेगा। इन जातियों का मिलाजुला वोट हासिल करने के लिए सभी पार्टियां कड़ी मेहनत करती हैं और वह जानती हैं कि इन सत्रह पिछड़ी जातियों के एक जुट होने से कई विधानसभाओं में तस्वीर बदल सकती है। पिछली विधानसभा में कई सीटें ऐसी थी जिन पर कुछ हजार वोटों से हार-जीत का फैसला हो गया था। सपा जानती है कि अगर ये पिछड़ी जातियां उसके समर्थन में आ गईं तो उसे खासा फायदा हो जायेगा।
जातियों के दबाव का ही नतीजा है कि गायत्री प्रजापति के भ्रष्टïाचार को लेकर सीएम ने उन्हें बर्खास्त किया था, मगर प्रजापति वोटों की संख्या को देखते हुए मुलायम सिंह ने उन्हें दोबारा काबीना मंत्री बना दिया और कहा प्रजापति पिछड़ी जाति से आते हैं। जाहिर है यह प्रजापति समाज को संदेश देने की कोशिश थी।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने इस कैबिनेट के फैसले को धोखा बताते हुए कहा कि चुनाव से पहले इस तरह के फैसले केवल इन जातियों को गुमराह करने के लिए किए जा रहे हैं। भाजपा के प्रदेश महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने भी कहा है कि चुनाव से पहले सपा मुखिया और सीएम इस तरह के फैसले लेकर इन जातियों को भ्रम में लाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर वह इन जातियों का भला चाहते तो नौकरियों में इन जातियों को पर्याप्त अवसर देते जो नहीं दिए गए।

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