सदर तहसील वापसी का मुद्दा फिर गरमाया

अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट चौराहे पर सडक़ जाम कर किया प्रदर्शन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सदर तहसील को दोबारा पुरानी जगह शुरू करवाने की मांग को अधिवक्ता एक बार फिर गरमाने लगे हैं। इस मुद्दे पर बुधवार को सैकड़ों अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट चौराहे पर जाम लगा दिया और प्रदेश सरकार का पुतला फूंक कर जल्द से जल्द तहसील वापसी कराने की मांग की है।
जिला प्रशासन ने 8 मार्च 2015 को सदर तहसील को देवा रोड स्थित लेखपाल ट्रेनिंग सेंटर में शिफ्ट करवा दिया था। इस बात का जिला बार एसोसिएशन और रॉयल बार एसोसिएशन समेत अन्य कई अधिवक्ता संगठनों ने जमकर विरोध किया। तहसील को वापस लाने के मुद्दे पर अधिवक्ता संगठनों के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी और राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से मिलकर तथा ज्ञापन देकर तहसील वापस लाने की मांग की गई। इसके बावजूद शासन और प्रशासन से अधिवक्ता संगठनों को कोई राहत नहीं मिली। इसके पीछे प्रशासन और शासन स्तर से सदर तहसील को शिफ्ट करने की ठोस तकनीकी वजहें रहीं हैं, जिसमें सदर तहसील की बिल्डिंग का कंडम घोषित होना, तहसील में राजस्व कर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच बार-बार विवाद होना, अधिवक्ताओं और राजस्व कर्मियों का एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाना प्रमुख रहा है। इसके बावजूद अधिवक्ता संगठन समय-समय पर सदर तहसील को वापस पुरानी जगह शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं। अधिवक्ता संगठनों का तर्क है कि सदर तहसील लेखपाल ट्रेनिंग सेंटर में शिफ्ट होने की वजह से तहसील आने जाने में समय और पैसा दोनों ही अधिक लगता है। इस वजह से आम आदमी को तहसील से जुड़े छोटे-छोटे कामों को करवाने के लिए बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ता है। इसलिए अधिवक्ता तहसील को पुरानी जगह शुरू करवाने की मांग को लेकर बुधवार को करीब एक बजे जिला बार एसोसिएशन के बैनर तले हाईकोर्ट चौराहे पर इकट्ठा हो गये। इन अधिवक्ताओं ने राघवेन्द्र के नेतृत्व में कई वकील हाई कोर्ट चौराहे पर नारेबाजी करते हुए सडक़ पर जाम लगा दिया। अधिवक्ताओं ने प्रदेश सरकार का पुतला भी फूंका। अधिवक्ता सदर तहसील को वापस लाओ के नारे लगा रहे थे। हालांकि हाईकोर्ट चौराहा जाम करने और अधिवक्ताओं के प्रदर्शन की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने अधिवक्ताओं के साथ बातचीत कर प्रदर्शन समाप्त करवा दिया लेकिन अधिवक्ता संगठनों को सदर तहसील का लेखपाल ट्रेनिंग सेंटर में शिफ्ट होना बिल्कुल भी रास नहीं आ रहा है। इसलिए बार-बार तहसील वापसी के मुद्दे को गरमाने की कोशिशें की जा रही हैं।

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