सदर तहसील को अशांत करने की कोशिश

राजस्व कर्मी के साथ अधिवक्ताओं की मारपीट के बाद बिछने लगी बिसात

नये परिसर में तहसील शिफ्ट करने के बावजूद भी नहीं रुका कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के बीच का विवाद
तहसील कर्मियों ने संयुक्त रूप से दी हड़ताल पर जाने की चेतावनी

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। सदर तहसील को अस्थायी रूप से देवा रोड स्थित लेखपाल प्रशिक्षण केन्द्र में शिफ्ट करके चैन की सांस लेने वाले अधिकारियों की उम्मीदों को झटका लग गया है। तहसील में अपनी मर्जी के मुताबिक काम करने वाले कुछ अधिकारियों और अधिवक्ताओं का गुट दोबारा सक्रिय हो गया है, जिसने राजस्व कर्मियों और अधिवक्ताओं के बीच दबी विवादों की चिंगारी को हवा दे दी है। लंबित फाइलों का बहाना बनाकर अधिवक्ताओं ने एक बार फिर अपर तहसीलदार के पेशकार शत्रोहन मिश्रा को बुरी तरह पीटा। इसके बाद तहसील परिसर में तोडफ़ोड़ करके काम बंद करवा दिया। इस मामले को गंभीरता से लेकर राजस्व कर्मचारी संघ, तहसील कर्मचारी संघ, लेखपाल संघ और स्टेनोग्राफर एसोसिएशन समेत कई अन्य संगठनों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे दी है। ऐसे में प्रशासन के सामने सदर तहसील में सुचारू रूप से कामकाज चलाना और कर्मचारियों की सुरक्षा करना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
सदर तहसील का पुराना कार्यालय कैसरबाग स्थित हाईकोर्ट के पीछे था। यहां आये दिन अधिवक्ताओं और राजस्व कर्मचारियों के बीच मारपीट की घटनाएं होती रहती थीं। एक साल में करीब 28 बार अधिवक्ताओं और राजस्व कर्मचारियों के बीच मारपीट की घटना होने के बाद राजस्व कर्मियों में डर का माहौल पैदा हो गया। कर्मचारियों ने काम-काज करने से मना कर दिया और मारपीट के मामलों में दोषी अधिवक्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करवाने की मांग करने लगे। इसके साथ ही तकनीकी रूप से कंडम घोषित हो चुकी तहसील की बिल्डिंग को अन्यत्र शिफ्ट करने की मांग शुरू हो गई। इस मामले में अधिवक्ता और राजस्व कर्मी आमने-सामने आ गये। अधिवक्ताओं ने राजस्व कर्मियों पर काम करवाने के बदले घूस लेने का आरोप लगाकर उनकी सम्पत्तियों की जांच करवाने और सदर तहसील का काम-काज पुरानी बिल्डिंग में ही करवाने की मांग शुरू कर दी। जिला प्रशासन के सामने अधिवक्ताओं और राजस्व कर्मियों के विवाद का कोई हल नहीं सूझ रहा था। लेकिन यह तय माना जा रहा था संख्याबल में अधिक होने की वजह से अधिवक्ता राजस्व कर्मियों पर दबाव डालकर काम करवाने की परम्परा डाल चुके हैं। ऐसे में तहसील को अन्यत्र शिफ्ट करने में ही भलाई है। आखिरकार 8 मार्च 2015 को रातोंरात सदर तहसील को देवा रोड स्थित लेखपाल प्रशिक्षण केन्द्र में अस्थायी रूप से शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही नये कार्यालय में कामकाज भी शुरू हो गया। उप जिलाधिकारी सदर भी नये कार्यालय में बैठने लगे। अधिवक्ताओं ने भाग-दौड़ का हवाला देकर उप जिलाधिकारी सदर का कार्यालय दोबारा कलेक्ट्रेट भवन में शिफ्ट करवा दिया।

पुरानी रंजिश को हवा देने में कामयाब रहे अधिवक्ता
लेखपाल संघ के जिला अध्यक्ष सुशील शुक्ला के मुताबिक लेखपाल प्रशिक्षण केन्द्र में सदर तहसील शिफ्ट होने के बाद सारा कामकाज सुचारू रूप से चल रहा था। यहां आने वाले अधिवक्ताओं की संख्या बहुत कम थी। तहसील परिसर में अधिवक्ताओं को बस्ता रखने की अनुमति नहीं दी गई। इस कारण काम-काज सुचारू रूप से चल रहा था,लेकिन उप जिलाधिकारी सदर का कार्यालय कलेक्ट्रेट में स्थानान्तरित होने के कुछ महीने बाद ही अराजक तत्व सक्रिय हो गये। उन लोगों ने तहसील को अशांत करने की कोशिशें शुरू कर दीं। इसके बाद पुराने मुद्दों का बहाना बनाकर अधिवक्ताओं ने अपर तहसीलदार के पेशकार शत्रोहन मिश्रा के साथ मारपीट की। तहसील में कामकाज बंद करवा दिया। इसके पूर्व कम्प्यूटर आपरेटर ललित कुमार के साथ भी अधिवक्ताओं ने मारपीट की थी। दरअसल शत्रोहन मिश्रा के साथ मारपीट के बाद ही सदर तहसील को देवा रोड स्थित लेखपाल प्रशिक्षण केन्द्र में शिफ्ट किया गया था। इन घटनाओं को संयुक्त कर्मचारी संघर्ष समिति ने गंभीरता से लिया है। यदि प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेकर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी के साथ मारपीट करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की तो कर्मचारी आन्दोलन करने को बाध्य हो जायेंगे।

कहीं बड़ी साजिश तो नहीं
सदर तहसील को अशांत करने में अधिवक्ताओं के साथ ही राजस्व विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों का नाम भी दबी जुबान से लिया जा रहा है, जो बहुत ही खतरनाक है। सूत्रों की मानें तो सदर तहसील में एक ही पद पर कई वर्षों से तैनात कर्मचारी के साजिश में शामिल होने की आशंका जताई जा रही है। इसकी वजह यह है कि हाल के दिनों में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें उनकी पोल खुल गई। प्रशासन की तरफ से उनके खिलाफ विभागीय जांच और कार्रवाई भी की गई। इस कारण तहसील को अशांत कर सबका ध्यान भटकाने के उद्देश्य से बड़ी साजिश की जा रही है। प्रशासन समय रहते सचेत नहीं हुआ तो सदर तहसील में एक बार फिर कर्मचारियों का काम करना मुश्किल हो जायेगा। ये अलग बात है कि जब भी तहसील में मारपीट की घटना होती है, तो कर्मचारियों की सुरक्षा के नाम पर इक्का-दुक्का पुलिस कर्मियों को तहसील में तैनात कर दिया जाता है। इसके बाद मेामला शांत होने पर पुलिस कर्मियों को हटा लिया जाता है।

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