सत्ता के लिए ब्रांडिंग की जरूरत

हर कोई अपनी अपनी ब्रांडिंग करने में लगा है। अखिलेश यादव की जहां सरकार की योजनाओं के बहाने ब्रांडिंग हो रही है तो भाजपा केन्द्र सरकार की योजनाओं के सहारे अपनी ब्रांडिंग कर रही है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो होॄडगवार से आने वाले दिनों में राजनीतिक विरासत को कब्जा करने की तैयारी है, जिसे लेकर अभी से लोग सक्रिय हो गए हैं।

sanjay sharma editor5आज जमाना ब्रांडिंग का है। इस बात की जरूरत राजनीतिक पार्टियां भी समझ रही हैं। इसलिए बड़े-बड़े राजनीतिक दल अपनी ब्रांडिंग करा रहे हैं। यदि हम यह कहें कि ब्रांडिंग के भरोसे ही राजनीति चल रही है तो गलत नहीं होगा। ब्रांडिंग की अहमियत न होती तो मोदी सरकार अपने दो साल के कार्यकाल का पूरे देश में करोड़ों-अरबों रुपए खर्च कर ढिंढोरा न पीट रही होती। लोकसभा चुनाव में भी नरेन्द्र मोदी को ब्रांड की तरह उतारा गया था और आज भी भाजपा मोदी को ही ब्रांड की तरह उपयोग कर रही हैं। हां, यह जरूर है कि अब मोदी उतने बड़े ब्रांड नहीं रह गए हैं जितना लोकसभा चुनाव में दिखाया गया था। शायद इसीलिए फिर भाजपा दो साल के कार्यकाल के बहाने प्रधानमंत्री मोदी की ब्रांडिग कर रही है।
अब तो हालत यह हो गई कि अधिकांश राजनीतिक दल अपनी ब्रांडिंग में जुट गए हैं। माध्यम कोई भी हो। ब्रांडिंग के लिए सोशल मीडिया से लेकर पोस्टर तक का सहारा लिया जा रहा है। छोटे-छोटे नेता तक सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी ब्रांडिंग कराने में लगे हैं। बड़े-बड़े राजनीतिक दल तो इस दिशा में अच्छा-खासा पैसा खर्च कर रहे हैं। राजनीतिक दलों के लिए सोशल मीडिया एक कारगर माध्यम साबित हो रही है। छोटी-छोटी बात सोशल मीडिया के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच रही है। सोशल मीडिया पर जिस तरह से राजनीतिक दल सक्रिय हैं, ठीक उसी प्रकार से आजकल पोस्टर का दौर चल रहा है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में सियासी हलचल चरम पर है। विधानसभा चुनाव में महज कुछ महीने का वक्त है। इस लिहाज से सभी राजनीतिक दल रणनीति बनाने में जुटी हुई हैं। जनता तक पहुंच बनाने के लिए सारे हथकंडों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले दिनों तो राजनीतिक पार्टियों में खूब पोस्टर वार चला। इस समय भी पूरे प्रदेश में सपा से लेकर अन्य राजनीतिक दलों के पोस्टर भरे पड़े हैं। अखिलेश यादव की जहां सरकार की योजनाओं के बहाने ब्रांडिंग हो रही है तो भाजपा केन्द्र सरकार की योजनाओं के सहारे अपनी ब्रांडिंग कर रही है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो होॄडगवार से आने वाले दिनों में राजनीतिक विरासत को कब्जा करने की तैयारी है, जिसे लेकर अभी से लोग सक्रिय हो गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में खुद को अगली कतार में खड़ा किया जा सके। चुनाव करीब होने की वजह से अब तो ऐसा भी दिखने लगा है कि जहां पहले एक ही पोस्टर में पार्टी के कई दिग्गज दिखते थे, वहीं अब वह अलग-अलग पोस्टर में दिख रहे हैं। एक ही परिवार का हर आदमी अपनी-अपनी ब्रांडिंग करा रहा है। अच्छा हो राजनेता कुछ ऐसा करें जिससे उनको लाखों खर्च करके अपनी ब्रांडिंग न करनी पड़े बल्कि जनता खुद उनके गुणगान करे, इसी में देशहित निहित है।

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