सच में सेल्फ गोल नहीं करते अखिलेश

सपा में घमासान

पूरे विवाद से साफ हो गया अपनी पर आ गए तो किसी की नहीं सुनेंगे अखिलेश
नेताजी ने भी अपने संदेशों से साफ कर दिया कि अखिलेश अपने दम पर करेंगे राजनीति

captureसंजय शर्मा
लखनऊ। सपा में चले घमासान के बाद हर शख्स की जबान पर यह चर्चा जरूर है कि आखिर सीएम अखिलेश यादव ने क्या खोया और क्या पाया। यह सवाल भी है कि क्या शिवपाल मजबूत हुए या अखिलेश। साथ ही जहन में यह बात भी कि नेता जी ने अखिलेश को इतना क्यों धमकाया। जो लोग सपा मुखिया मुलायम सिंह को बहुत करीब से जानते हैं वही इस बात को समझ पायेंगे कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद निकले संकेतों में नेताजी ने बड़ी सफाई से साबित कर दिया कि अब अखिलेश बदल गए हैं और वो राजनीति में किसी की नहीं सुनने वाले हैं। सामान्य आदमी भी प्रदेश में यही चर्चा करता था कि अखिलेश तो बहुत बढिय़ा हैं मगर उनकी चलती नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया कि अगर अखिलेश अपनी पर आ गए तो फिर सिर्फ उनकी ही चलेगी।
आइए कुछ उदाहरणों से यादव परिवार की इस राजनीति को समझने की कोशिश करते हैं और देश की राजनीति के सबसे मझे हुए खिलाड़ी सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की राजनीति को भी समझने का प्रयास करते हैं।
इस पूरे विवाद के बाद नेताजी ने खुलकर शिवपाल यादव का पक्ष लिया और कहा कि पार्टी खड़ी करने में उन्होंने अपनी जान की बाजी भी लगा दी। उन्होंने अखिलेश को लोकसभा चुनाव के बाद सीएम बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिस कारण सीएम उनसे नाराज रहते हैं। उन्होंने लगे हाथ अमर सिंह की तारीफ भी कर दी। साथ ही गायत्री को दोबारा पद दिलाने के लिए भी कह दिया। रणनीति यह थी कि भाई शिवपाल को एहसास हो कि नेताजी उनके पाले में ही खड़े हैं, मगर नेताजी को जानने वाले कुछ वरिष्ठï समाजवादी लोगों की राय इससे इतर है। इन लोगों का कहना है कि नेताजी के इशारे पर बड़ी सफाई से यह साबित हो गया कि अगर अखिलेश यादव अपनी जिद पर आ गए तो उन्हें अपने चाचा शिवपाल यादव के विभाग छीनने में कुछ मिनट ही लगेंगे। यह भी संदेश दे दिया कि सीएम गुस्से में अपने पिता के प्रिय गायत्री प्रजापति को भी बर्खास्त करने में जरा भी चूक नहीं करेंगे। यही नहीं जो अमर सिंह खुलेआम कहते हैं कि वह मुलायमवादी हैं। उन अमर सिंह को अखिलेश खुलेआम कह सकते हैं कि इस बाहरी आदमी को अब मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। यही नहीं अखिलेश की टीम खुद सपा मुखिया के खिलाफ भी नारेबाजी करने की हिम्मत जुटा सकती है। भले ही इन आरोपों में सच्चाई हो या न हो मगर इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से निगाह डालेंगे तो महसूस करेंगे कि ऐसे सारे कदम उठाकर सीएम ने साबित कर दिया कि अगर उनकी छवि पर दाग लगेगा तो वह एक मिनट में भी अपने सारे रिश्ते-नातों को भूलकर सिर्फ सीएम बन जायेंगे। हकीकत यही है कि मौजूदा दौर में सबसे जरूरी संदेश यही था कि सीएम सबको यह बता सके कि यूपी के सीएम सिर्फ और सिर्फ वहीं हैं। लोग खुश है कि नेताजी ने गायत्री को फिर मंत्री बनवाने की बात कहकर और और शिवपाल को प्रदेश अध्यक्ष बनवाकर अखिलेश का पक्ष कमजोर कर दिया। हकीकत यह है कि एक बार गायत्री को बर्खास्त करके सीएम ने यह संदेश तो दे ही दिया कि गायत्री के गड़बड़झाले में वह शामिल नहीं है साथ ही संसदीय बोर्ड कमेटी के चेयरमैन के पद पर अखिलेश की ताजपोशी साबित करती है कि संगठन में वह शिवपाल से कमजोर नहीं हुए क्योंकि टिकट बांटने का अधिकार इसी कमेटी को है और हकीकत यह है कि इस समय अखिलेश और शिवपाल के बीच रस्साकशी इसी बात को लेकर थी कि टिकट बांटने का अधिकार किसको मिलेगा और सबसे आखिर में शिवपाल को दो और विभाग देकर संदेश दिया गया कि इनके विभाग बढ़ा दिए गए हैं, मगर इसमें भी अखिलेश ने शिवपाल का सबसे पसंदीदा विभाग पीडब्ल्यूडी अपने पास रखकर साफ कर दिया कि असली ताकत अभी भी उनके पास ही है।

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