सऊदी में भारतीयों के शव और सरकार की गंभीरता

सवाल यह है कि क्या विदेश में रखे इन शवों को लाने के लिए सरकार जरा भी संवेदनशील नहीं है? वे कौन सी वजहें हैं जिसके चलते विदेश मंत्रालय इस मामले को आज तक सुलझा नहीं सका? भारत ने सऊदी सरकार से इस मुद्दे पर अभी तक सीधे बात क्यों नहीं की? क्यों विदेश मंत्रालय वहां की कंपनियों पर दोषारोपण कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहा है? क्या विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के प्रति सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?

sajnaysharmaएक वर्ष से सऊदी अरब के शवगृहों में 150 भारतीयों के शव रखे हुए हैं। मृतकों के परिजन भारतीय विदेश मंत्रालय से इन शवों को स्वदेश लाने की गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं। लेकिन आज तक इसका हल नहीं निकल सका है। दिन बीतने के साथ मृतकों के परिजनों की उम्मीदें भी टूटती जा रही हैं। ये उन लोगों के शव हैं, जो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से रोजी-रोटी कमाने सऊदी अरब गए थे। सवाल यह है कि क्या विदेश में रखे इन शवों को लाने के लिए सरकार जरा भी संवेदनशील नहीं है? वे कौन सी वजहें हैं जिसके चलते विदेश मंत्रालय इस मामले को आज तक सुलझा नहीं सका? भारत ने सऊदी सरकार से इस मुद्दे पर अभी तक सीधे बात क्यों नहीं की? क्यों विदेश मंत्रालय वहां की कंपनियों पर दोषारोपण कर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहा है? क्या विदेश में रह रहे भारतीय नागरिकों के प्रति सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती?

सच यह है कि भारत सरकार ने इन शवों को लाने के लिए कोई गंभीर प्रयास ही नहीं किया। सऊदी अरब से हमारे मधुर रिश्ते हैं। यदि सरकार पहल करती तो इन शवों की स्वदेश वापसी आसानी से हो सकती है। यह दीगर है कि सऊदी अरब के रियाद स्थित भारतीय दूतावास और भारत का विदेश मंत्रालय इस मामले पर वहां की कंपनियों से अभी भी बातचीत कर रही है। विदेश मंत्रालय की दलील है कि कंपनियां कोई जवाब नहीं दे रही हैं। सवाल यह है कि मंत्रालय ने दूसरा रास्ता क्यों नहीं अपनाया? इस मामले में मंत्रालय वहां की पुलिस से मदद ले सकती थी। इसके पीछे का सच यह है कि मंत्रालय चाहता है कि संबंधित कंपनियां अपने खर्चें पर भारतीय कर्मचारियों का शव भेज दें। लेकिन कंपनियां ऐसा क्यों करेंगी? उन्हें लगता है कि यदि वे अपने खर्चें पर शवों को भारत भेजेंगी तो उन्हें मृतकों के परिजनों को मुआवजा देना होगा। यह कोई छोटी रकम नहीं होगी। लिहाजा वे सहयोग के बजाय अड़ंगा लगाने में जुटी हैं। वहीं, भारी-भरकम खर्च के कारण मृतकों के परिजन यहां से शव ले आने की स्थिति में नहीं है। सवाल यह है कि दूतावास और सरकार की उपेक्षा के कारण क्या भारतीयों के शव वहीं पड़े रहेंगे? सरकार को समझना चाहिए कि विदेशों में काम कर रहे लाखों भारतीय देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान करते हैं। आंध्र और तेलंगाना से कम से कम दस लाख भारतीय सऊदी में काम करते हैं और वहां से वे विदेशी मुद्रा भेजते हैं। जाहिर है यदि भारत सरकार ने इस मसले का हल जल्द नहीं निकाला तो विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ेगा। यह अच्छा संकेत नहीं है।

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