संसाधन हों तो केजीएमयू में भी होगा हाथ का प्रत्यारोपण

ब्रेन डेड के हाथ काम आ सकेंगे जिन्दा इंसानों के

Capture4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । किसी भी दुर्घटना में हाथ गंवा देने वाले लोगों के लिए एक अच्छी खबर यह है कि राजधानी लखनऊ में हैंड ट्रांसप्लांट (हाथ प्रत्यारोपण) शुरू हो सकता है। कैडेवर प्रत्यारोपण के अन्तर्गत सबसे जटिल हाथ प्रत्यारोपण को ही माना जाता है। केजीएमयू में इससे पहले किडनी प्रत्यारोपण की शुरूआत हो चुकी है और अब हाथ प्रत्यारोपण शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। यहां के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो ए.के. सिंह ने बताया कि अगर सरकार संसाधन उपलब्ध कराये तो केजीएमयू में भी हाथ का प्रत्यारोपण किया जा सकता है।
अमृता आयुर्विज्ञान संस्थान कोच्चि के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष व भारत में सबसे पहले हाथ का प्रत्यारोपण करने वाले डा. सुब्रमण्य अय्यर ने बताया कि अब ब्रेन डेड के हाथ जिन्दा इंसानों के काम आ सकेंगे। देश में केवल एक ही स्थान कोच्चि में हैन्ड ट्रान्सप्लान्ट की शुरूआत हुई है। कोच्चि के अमृता इंस्टीट्यूट में अभी तक दो हैन्ड ट्रान्सप्लान्ट किये गये, जिसमें दोनों हैन्ड ट्रान्सप्लान्ट सफल रहेे। इन्होंने जनवरी 20015 में कोच्चि के अमृता आयुर्विज्ञान संस्थान में देश का पहला और अप्रैल 20015 में हाथ का दूसरा प्रत्यारोपण किया। 12 जनवरी, 2015 को 30 वर्षीय युवक मनु के लिए किया गया जो तीन वर्ष पहले रेल दुर्घटना अपने दोनों हाथ गंवा बैठा था। दूसरा हाथ प्रत्यारोपण 10 अप्रैल, 2015 को अफ गानिस्तानी सैनिक अब्दुल रहीम के लिए किया गया जो अपने दोनों हाथ खदान धमाके में खो चुका था।
बच्चों में हाथ का प्रत्यारोपण कठिन
वर्तमान में डा. सुब्रमण्यम ने बताया कि बच्चों के हाथ का प्रत्यारोपण थोड़ा कठिन होता है। उन्होंने बताया कि बच्चों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसके अलावा हाथ के प्रत्यारोपण के बाद लगातार दवाओं का सेवन करना होता है जो बच्चों के लिए थोड़ा कठिन होता है। सामान्यता हाथ का प्रत्यारोपण 28 से 30 वर्ष की आयु के बाद कराना चाहिए।

Pin It