संसद चलाइये सांसद जी, ये हमारे खून-पसीने का पैसा है

देश की अस्सी फीसदी आबादी को दो वक्त की रोटी नहीं नसीब
हमारे सांसद नहीं चलने देते संसद, करते हैं बेवजह हंगामा
संसद चलने पर एक दिन में 12 करोड़ रुपये होते हैं खर्च

T1संजय शर्मा
लखनऊ। जिस देश में आम आदमी को दो वक्त की रोटी भी नसीब न हो वहां पर हमारे चुने हुए प्रतिनिधि अगर हमारे खून पसीने की कमाई को अय्याशी में उड़ा रहे हों तो इसे देश की विडंबना नहीं कहा जायेगा तो भला और क्या कहा जायेगा। पिछले चार दिनों से जिस तरह हंगामा करके लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाहीं नहीं चलने दी जा रही है उससे यह लगता है कि हमारे सांसदों को हमारी और आपकी चिंता नहीं है।
चार दिनों से लोकसभा स्थगित की जा रही है और इन चार दिनों में लोकसभा का अनुमानित खर्चा लगभग पचास करोड़ रुपये हो चुका है। मतलब साफ है कि हमारी और आपकी खून पसीने की कमाई के पचास करोड़ रुपये पानी में बह चुके हैं।
यही हाल राज्य सभा का भी है। यहां भी हंगामे के चलते कोई कार्यवाहीं नहीं हो पा रही। लोकसभा की तरह राज्यसभा भी चलाने की कई बार कोशिशें हुई मगर कामयाबी नहीं मिल सकी। दोनों सदन कई बार स्थगित हुए।
यह सारा हंगामा कांग्रेस कर रही है। कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि भगौड़े ललित मोदी को संरक्षण देने और उन्हें मदद करने के आरोप में सुषमा स्वराज को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाय। वह चाहते हैं कि व्यापमं घोटाले में शामिल होने के आरोप में शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाय और ललित मोदी के साथ व्यापारिक रिश्तों के चलते वसुंधरा राजे को भी मुख्यमंत्री पद से बर्खास्त किया जाय।
इन्हीं आरोपो के चलते कांग्रेस ने पिछले कई दिनों से संसद ठप कर रखी है। जैसे ही कार्यवाही शुरू होती है कांग्रेसी सांसद सदन में हल्ला शुरू कर देते हैं। जिससे सदन नहीं चल पाता।
आज तो भाजपा ने भी हद कर दी। भाजापा संासदों ने कांग्रेस के भ्रष्टïाचार के खिलाफ संसद परिसर में धरना दिया। ये दुनिया में पहली घटना होगी, जब सत्ताधारी दल ने धरना दिया होगा। शरद यादव ने भी कहा कि सत्ता के लोग क्या भगवान से कुछ मांग रहे हैं।
यूपीए सरकार के दौरान जब कांग्रेस के मंत्री भ्रष्टïाचार के घेरे में थे तब एनडीए ने भी महीनों सदन नहीं चलने दिया था और हमारे और आपके हजारों करोड़ रुपये इसी हंगामें की भेंट चढ़ गये थे। जाहिर है चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस किसी को भी इस बात की चिंता नहीं है कि किस तरह यह करोड़ों रुपये बर्बाद हो रहे हैं और ये पैसे आम आदमी की खून पसीने की कमाई का हिस्सा है, जो वह टैक्स के रूप में देता है।
कांग्रेस की रणनीति देखकर लगता नहीं है कि आने वाले दिनों में भी संसद चल पायेगी, तो फिर हम सबको इंतजार करना चाहिये। कि आखिर यह हंगामा कब बंद हो और कब आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर सदन में चर्चा हो।

लोकसभा और राज्यसभा न चलना बेहद दुख का विषय है। अगर सदन नहीं चलेगा तो आम आदमी से जुड़े मुद्दों पर न तो बहस हो पायेगी और न ही कोई बिल पास हो पायेगा। पहले एनडीए सदन नहीं चलने देती थी और अब यूपीए। ये लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।
-कमाल खान
स्थानीय संपादक, एनडी टीवी

इस तरह सदन न चलना शर्मनाक है। ये पैसा आम आदमी का है। दुख की बात है कि राजनेता इस बात को महसूस नहीं करते कि आम आदमी के टैक्स का पैसा इस तरह बर्बाद नहीं किया जाना चाहिये। पहले भाजपा और अब कांग्रेस ऐसा ही कर रही है।
-शरद प्रधान, वरिष्ठï पत्रकार

नौकरी को अलविदा कहकर ताल ठोकेंगे एसपी सिंह

वरिष्ठï आईएएस सूर्य प्रताप सिंह ने कहा कि यूपी में नौकरी का नहीं है माहौल
चीफ सेक्रेटरी को सौंपा वीआरएस का खत
नौकरी छोडक़र लखनऊ में ही सरकार का विरोध करेंगे एसपी सिंह

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आईपीएस अमिताभ ठाकुर के बाद अब आईएएस सूर्य प्रताप सिंह भी सरकार के खिलाफ ताल ठोकने के लिए मैदान में आ गये हैं। सरकार उन्हें अमिताभ ठाकुर की तरह निलंबित करने की सोच ही रही थी कि उससे पहले एसपी सिंह ने नौकरी को ही अलविदा कह दिया। सरकार की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े करते हुए उन्होंने अपने खत में लिखा कि यूपी में अब डर लगता है कि कोई विरोध करने पर पेट्रोल डालकर जला ना दे। एसपी सिंह के इस खत की नौकरशाही में बहुत चर्चा है।
सूर्य प्रताप सिंह ने लम्बे समय से बगावती तेवर अपना रखे हैं। वह लगातार सरकार के खिलाफ फेसबुक पर लिखते रहे और कई टीवी चैनलों पर अपनी पीड़ा बताते रहे हैं। शुरूआत में तो सरकार उन्हें नजरअंदाज करती रही, मगर बाद में सरकार के सलाहकारों ने कहा कि अगर इन्हें भी अमिताभ ठाकुर की तरह नजरअंदाज किया गया, तो यह और बगावती होते रहेंगे। लिहाजा इनको अभी निलंबित कर दिया जाय।
इसी मंशा के तहत सूर्य प्रताप सिंह को चार्जशीट दी गयी। सरकार को लगता था कि इस चार्जशीट के बाद सूर्यप्रातप सिंह के तेवरों में कमी आयेगी। मगर सरकार उन्हें निलंबित कर पाती इससे पहले ही एसपी सिंह ने अपनी आईएएस की नौकरी को अलविदा कहने का मन बना लिया।
एसपी सिंह ने कहा कि चन्द्रशेखर आजाद के जन्मदिन पर एक कार्यक्रम में उनको लगा कि अगर सच्चाई के साथ जीना है तो आईएएस की महत्वाकांक्षी नौकरी को अलविदा कह देना चाहिये। उन्होंने कहा कि यूपी में जो माहौल है उसमें किसी ईमानदार और स्वाभिमानी व्यक्ति का नौकरी कर पाना संभव नहीं है।
श्री सिंह ने कहा कि वह नौकरी छोडक़र लखनऊ में ही रहेंगे और जनता से जुड़े मुद्दे और आम आदमी के उपर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहेंगे। जाहिर है कि नौकरशाहों के ये बगावती तेवर सरकार पर भारी पडऩे वाले हैं।

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