श्रावस्ती के पूर्व डीएम के खिलाफ रची गई साजिश

अभियंता की जांच करने के कारण स्थानीय विधायिका ने कराया ट्रांसफर

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर ने पूर्व डीएम श्रावस्ती मो. जुबैर अली हाशमी के अचानक हटाये जाने के सम्बन्ध में मुख्य सचिव आलोक रंजन से पुनर्विचार किये जाने का निवेदन किया है।
उन्होंने कहा कि उनकी श्री हाशमी से इस सम्बन्ध में विस्तृत वार्ता हुई जिसमें उन्होंने ने कहा कि उन पर डीपीआरओ को बंधक बनाए जाने का आरोप पूरी तरह गलत है। इसके विपरीत सच्चाई यह है कि उन्होंने अधिशाषी अभियंता आरईएस के खिलाफ जांच शुरू की थी जिसके बाद स्थानीय विधायिका इन्द्राणी वर्मा ने उन्हें गलत आरोपों में फंसा कर ट्रान्सफर करा दिया। उन्होंने कहा कि विधायिका की शिकायत पर ही जांच शुरू की गयी थी पर बाद में वे अनुचित कारणों से पलट गयीं। श्री ठाकुर के अनुसार श्री जुबैर हाशमी इस बात से भी बहुत व्यथित थे कि उनकी बात सुने बिना उनका ट्रान्सफर कर दिया गया। श्री ठाकुर ने कहा कि आईएएस कैडर रूल्स के अनुसार किसी आईएएस अफसर को दो साल से पहले ट्रान्सफर करने पर उसका स्पष्टीकरण लेना होता है पर इस मामले में बिना उन पर लगे आरोपों की पूछताछ किये मात्र 35 दिन पहले आये डीएम का ट्रान्सफर कर दिया गया जो उचित नहीं प्रतीत होता है। अत: उन्होंने श्री हाशमी को अपनी पूरी बात कहने का मौका देने और उसके बाद ही ट्रान्सफर कमिटी द्वारा कोई निर्णय लिए जाने का अनुरोध किया है।

बिना परिणाम कैसे करें पीजी के आवेदन
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में पीजी के आवेदन बहुत ही कम संख्या में हुए हैं। परिणाम में देरी के कारण छात्रों ने केवल रजिस्ट्रेशन ही कराया है। पीजी में अब तक जो भी आवेदन किये गये हैं वह केवल उन छात्रों के हैं जो साल भर पहले स्नातक कर चुके हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय व अन्य कॉलेजों में परिणाम आने में हो रही देरी के कारण छात्र पीजी के आवेदन नहीं भर पा रहे हैं। यह स्थिति आधिकतर कॉलेजों की है। छात्रों ने केवल रजिस्ट्रेशन कराकर छोड़ दिया है ताकि परिणाम आने पर आवेदन का मौका मिल सके। नियम के अनुसार जो छात्र रजिस्ट्रेशन करा लेंगे वही लेट फीस के साथ आवेदन कर सकते हैं। अधिकतर कॉलेजों के छात्र अपने कॉलेज के चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं, वहीं प्रवेश समन्वयक राजकुमार सिंह का कहना है कि स्नातक ाि रिजल्ट आने के कारण पीजी के आवेदन में देरी हो रही है। दूसरा सबसे बड़ा कारण यह है कि आवेदन में स्नातक के अंक भरना अनिर्वाय है लेकिन अधिकतर कॉलेजों के परिणाम अभी तक नहीं आए हैं जिसके कारण छात्र परिणाम की प्रतीक्षा में रुके हैं। वहीं केकेसी में पढऩे वाले रितेश का कहना है कि हम अपने कॉलेज के रोज चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अभी तक परिणाम का पता नही है। हमने पीजी के लिए रजिस्ट्रेशन इसलिये करा लिया है कि परिणाम आते ही आवेदन फार्म भरा जा सके।

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