शैक्षिक केंद्रों का बिगड़ता माहौल

जेएनयू कैंपस में विवादास्पद नारा लगाने वाले युवकों की कोई पुख्ता पहचान नहीं की जा सकी है। सरकार और दूसरी जांच एजेंसियां अभी भी खाली हाथ हैं। इसी तरह हैदराबाद में रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तार नहीं किया गया है।

sanjay sharma editor5जेएनयू (जवाहर लाल नेहरू) और दूसरे शैक्षिक संस्थानों में बिगड़ता शिक्षा का माहौल चिंताजनक है। एक के बाद एक शिक्षण संस्थानों का बिगड़ता माहौल छात्रों के हित में नहीं है। जेएनयू का सारा विवाद देश-विरोधी नारों को लेकर हुआ था। कुछ विवादास्पद वीडियो सामने आये, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय को ‘देशद्रोहियों का अड्डा’ तक कहा। नारों का सच सामने आ जाने के बाद भी अब तक इस मामले में कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं की जा सकी है। ऐसे में दूसरे विश्वविद्यालयों का इस तरह से शिक्षा से इतर चर्चा में आना अपने आप में देश हित में नहीं है।
जेएनयू कैंपस में विवादास्पद नारा लगाने वाले युवकों की कोई पुख्ता पहचान नहीं की जा सकी है। सरकार और दूसरी जांच एजेंसियां अभी भी खाली हाथ हैं। इसी तरह हैदराबाद में रोहित वेमुला की आत्महत्या के लिए जिम्मेवार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तार नहीं किया गया है। लेकिन, इस मामले में प्रतिरोध करनेवाले छात्रों को विश्वविद्यालय के अंदर और बाहर घसीटकर पीटा गया। विश्वविद्यालयों की यह हालत समाज के लिए किसी तरह से सही नहीं कही जाएगी। इसी तरह कश्मीर के एनआईटी में भी मामले का सही से आकलन किए बगैर पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दी। हालांकि कश्मीर मामले में केंद्रीय मंत्रियों की सक्रियता से मामला जल्द लोगों की समझ में आ गया। इसमें केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय की तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम भी मामले की जांच के लिए श्रीनगर पहुंच गई।
अब इसकी पड़ताल की जा रही है कि एनआइटी में ‘राष्ट्रवादी छात्रों’ के एक हिस्से पर लाठीचार्ज कैसे हो गया। यह विवाद भारत-वेस्टइंडीज क्रिकेट मैच के बाद की गई नारेबाजी से उभरा था। मामले को लेकर गृह मंत्रालय की सक्रियता भी काबिले तारीफ दिखती है। गृह मंत्रालय के मामले को लेकर पूरी जांच रिपोर्ट अधिकारियों से मांगी है।
देश के शिक्षण संस्थानों की यह हालत हमारे सामने कई सवाल खड़े करती है। हाल की घटनाओं से इन विश्वविद्यालय की छवि धूमिल हुई है। यह शिक्षण संस्थान देश के चुनिंदा शैक्षिक केंद्रों में से है। ऐसे में इन संस्थाओं के साथ किसी तरह का राजनीतिक खिलवाड़ हमारे देश के भविष्य पर भी असर डालेगा। यह संस्थान एक तय समय के बाद देश को इन हालात में मिले हैं जिससे यह एक नई दिशा देश को दे सकते हैं। ऐसे में शिक्षण संस्थानों के जरिए राजनीतिक दलों की राजनीति का खामियाजा पूरे देश को उठाना पड़ सकता है। बेहतर होगा हमारे राजनेता इन संस्थानों को अपनी राजनीति से बख्श दें।

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